#जारी #अवैधबालूखनन : संयुक्त बैठक में ग्रामीणों ने खुद निगरानी करने और आंदोलन की चेतावनी दी।
जारी प्रखंड के गोबिन्दपुर पंचायत अंतर्गत तिगरा और कमलपुर गांव में रविवार को अवैध बालू खनन के खिलाफ सैकड़ों ग्रामीणों की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में कमलपुर व तिगरा बालू घाटों से हो रहे अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने प्रशासनिक निष्क्रियता पर चिंता जताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र हस्तक्षेप नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
- तिगरा-कमलपुर गांव में सैकड़ों ग्रामीणों की संयुक्त बैठक आयोजित।
- संत कुमार भगत की अध्यक्षता में लिया गया सर्वसम्मत निर्णय।
- कमलपुर और तिगरा बालू घाट से अवैध खनन पर रोक की मांग।
- छत्तीसगढ़ के ट्रैक्टर मालिकों पर अवैध बालू उठाव का आरोप।
- जलस्तर गिरने और राजस्व नुकसान को लेकर गंभीर चिंता।
- ग्रामीणों द्वारा स्वयं निगरानी और आंदोलन की चेतावनी।
जारी प्रखंड के गोबिन्दपुर पंचायत अंतर्गत तिगरा और कमलपुर गांवों में अवैध बालू खनन को लेकर ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश अब संगठित रूप लेता नजर आ रहा है। रविवार को दोनों गांवों के बीच आयोजित संयुक्त बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए और अवैध खनन से हो रहे पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान पर खुलकर चर्चा की। बैठक का उद्देश्य बालू घाटों पर हो रही अनियमित गतिविधियों को रोकना और प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट करना रहा।
बैठक की अध्यक्षता और ग्रामीणों की एकजुटता
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता कमलपुर पड़हा व्यवस्था के बेल साहब एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष संत कुमार भगत ने की। बैठक में तिगरा और कमलपुर दोनों गांवों के ग्रामीणों ने एक स्वर में अवैध बालू खनन के खिलाफ आवाज बुलंद की। ग्रामीणों ने कहा कि यह समस्या लंबे समय से जारी है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं की गई है।
अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने बैठक में आरोप लगाया कि कमलपुर बालू घाट से प्रतिदिन छत्तीसगढ़ के कई ट्रैक्टर मालिकों द्वारा अवैध रूप से बालू का उठाव किया जा रहा है। यह गतिविधि न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खुलेआम हो रहे इस खनन के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
जलस्तर और भविष्य की पीढ़ियों पर खतरा
बैठक में ग्रामीणों ने इस बात पर विशेष चिंता जताई कि अवैध बालू खनन के कारण क्षेत्र के नदी और जल स्रोतों का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में पेयजल और सिंचाई की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसका सीधा असर खेती, पशुपालन और ग्रामीण जीवन पर पड़ेगा, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है।
स्वयं निगरानी और संगठित कार्रवाई का निर्णय
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब तिगरा और कमलपुर गांवों के ग्रामीण स्वयं तिगरा बालू घाट और कमलपुर बालू घाटों पर निगरानी रखेंगे। ग्रामीणों ने संगठित होकर अवैध खनन को रोकने का संकल्प लिया और कहा कि वे किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके साथ ही प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर सख्त कानूनी कदम उठाने की मांग की गई।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
इस बैठक में विमल भगत, दिनेश उरांव, राजकुमार उरांव, धनेश्वरी उरांव, सरस्वती उरांव, मनोज उरांव, कृष्ण उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एकजुट होकर अवैध बालू खनन के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने बैठक के अंत में स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा अवैध खनन पर तत्काल और प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई केवल बालू की नहीं, बल्कि पर्यावरण, जल और भविष्य की सुरक्षा की है।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण चेतना ने दिखाई ताकत
तिगरा-कमलपुर की बैठक यह साबित करती है कि जब प्रशासनिक कार्रवाई कमजोर पड़ती है, तब ग्रामीण समाज स्वयं आगे आता है। अवैध बालू खनन जैसे गंभीर मुद्दे पर ग्रामीणों की एकजुटता सराहनीय है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जब गांव जागता है, बदलाव की शुरुआत होती है
अवैध खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रकृति और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
तिगरा और कमलपुर के ग्रामीणों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया है कि गांव अब चुप नहीं रहेगा।
संगठित प्रयास से ही पर्यावरण और संसाधनों की रक्षा संभव है।
आप भी अपने क्षेत्र की समस्याओं पर आवाज उठाएं और जिम्मेदार बनें।
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