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नेहरू पार्क के पास प्रदूषण के खिलाफ गरजे ग्रामीण, जयराम महतो बोले— झारखंड मुनाफे के लिए नहीं, जीवन के लिए चाहिए

#धनबाद #पर्यावरण_संघर्ष : खेरा माइनिंग के खिलाफ एकदिवसीय धरना, वायु–जल प्रदूषण से ग्रामीणों का जीवन संकट में।
  • पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर करकेंद, धनबाद में एकदिवसीय धरना।
  • PB एरिया में खेरा माइनिंग से फैल रहे वायु एवं जल प्रदूषण का विरोध।
  • धरना स्थल पर पहुंचे डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो
  • BCCL व कॉर्पोरेट कंपनियों पर मुनाफाखोरी का आरोप।
  • ग्रामीणों में बीमारियों और जीवन संकट को लेकर गहरा आक्रोश।
  • धनबाद का AQI 173, फिर भी प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल।

धनबाद जिले के करकेंद स्थित नेहरू पार्क के समीप खेरा माइनिंग द्वारा PB एरिया में फैलाए जा रहे वायु एवं जल प्रदूषण के खिलाफ पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एकदिवसीय धरना दिया। इस धरना–प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए, जिन्होंने प्रदूषण से हो रही गंभीर समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया।

धरना स्थल पर माननीय डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो की उपस्थिति ने आंदोलन को मजबूती प्रदान की। उन्होंने ग्रामीणों के साथ एकजुटता दिखाते हुए खनन और ओबी डंपिंग से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट पर तीखा प्रहार किया।

“मुनाफा कंपनियों का, बीमारी जनता की”

धरना को संबोधित करते हुए विधायक जयराम कुमार महतो ने कहा कि माइनिंग और ओबी डंप के कारण आसपास के गांवों में भीषण वायु प्रदूषण फैल चुका है। इसका सीधा असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि
“BCCL और कॉर्पोरेट कंपनियों को मुनाफा हो रहा है, लेकिन वहां रहने वाले लोगों को बीमारी मिल रही है। यही आज झारखंड की पटकथा बन चुकी है।”

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाला भविष्य और भी भयावह होगा। यह केवल धनबाद की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की समस्या है।

प्रदूषण पर वैश्विक चिंता, लेकिन स्थानीय चुप्पी

जयराम महतो ने कहा कि आज पूरा विश्व पर्यावरण प्रदूषण को लेकर गंभीर है, लेकिन झारखंड और विशेषकर धनबाद जैसे इलाकों में इसे कोई मुद्दा नहीं माना जा रहा। उन्होंने बताया कि धनबाद पहले से ही देश और दुनिया में प्रदूषण के लिए कुख्यात है, इसके बावजूद जिम्मेदार संस्थाएं आंख मूंदे बैठी हैं।

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि धनबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 173 तक पहुंच चुका है, जबकि यह आदर्श रूप से बहुत कम होना चाहिए। इसके बावजूद न तो प्रभावी नियंत्रण हो रहा है और न ही खनन कंपनियों पर सख्ती।

ग्रामीणों की पीड़ा और चेतावनी

धरना में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग और पेयजल संकट तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रदूषण पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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न्यूज़ देखो: विकास बनाम जीवन का सवाल

धनबाद में उठी यह आवाज केवल एक धरना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चेतावनी है। विकास के नाम पर अगर जीवन ही असुरक्षित हो जाए, तो ऐसे विकास पर सवाल उठना लाज़मी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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