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जनसुराज में बगावत के सुर, मोतिहारी के कल्याणपुर से सुबोध तिवारी निर्दलीय मैदान में उतरेंगे

#मोतिहारी #जनसुराज : टिकट न मिलने पर सुबोध तिवारी ने फूंका पोस्टर, कहा – अब जनता तय करेगी उम्मीदवार कौन
  • मोतिहारी के कल्याणपुर में जनसुराज के टिकट बंटवारे पर असंतोष खुलकर सामने आया।
  • स्थानीय नेता सुबोध तिवारी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया।
  • सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पार्टी पोस्टर जलाकर जताया विरोध।
  • दो साल से जनसुराज से जुड़े रहे तिवारी को टिकट न मिलने से नाराजगी।
  • 50 लाख की प्रचार सामग्री छपवाने के बाद भी टिकट कटने से समर्थक स्तब्ध।

मोतिहारी जिले के कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र में जनसुराज पार्टी के भीतर असंतोष ने खुला रूप ले लिया है। दो वर्षों से पार्टी के लिए सक्रिय रहे सुबोध तिवारी ने टिकट वितरण में हुई अनदेखी से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ जनसुराज पार्टी के पोस्टर और बैनर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।

टिकट बंटवारे पर बढ़ता असंतोष

सूत्रों के अनुसार, टिकट वितरण को लेकर पार्टी के कई जिलों में असंतोष की स्थिति है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि मेहनती और जमीनी नेताओं को नजरअंदाज कर कुछ नए चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। कल्याणपुर में तिवारी के विरोध के बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

सुबोध तिवारी ने कहा — “दो साल तक जनसुराज के लिए काम किया, लेकिन आखिरी वक्त पर टिकट छीन लिया गया। अब जनता ही मेरा टिकट देगी।”

टिकट ‘लगभग फाइनल’ होने का दावा

सुबोध तिवारी ने सभा में समर्थकों से कहा कि उन्हें कुछ दिन पहले पटना से फोन आया था कि उनका टिकट लगभग फाइनल है। इस भरोसे पर उन्होंने करीब 50 लाख रुपये की प्रचार सामग्री छपवाई, जिसमें 500 चाबी रिंग, एक लाख पेन, सैकड़ों कॉपियां, स्टीकर और हजारों जनसुराज टी-शर्ट शामिल थीं। तिवारी ने कहा कि उनका उद्देश्य पूरे विधानसभा क्षेत्र को अभियान से जोड़ना था, लेकिन अंतिम समय में टिकट कट जाने से कार्यकर्ताओं में भारी निराशा फैल गई।

पार्टी नेतृत्व पर उठे सवाल

स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी के भीतर टिकट चयन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। कई जगह समर्थकों द्वारा पोस्टर फाड़ने और जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। यह दर्शाता है कि जनसुराज के भीतर बढ़ता असंतोष अब खुला विरोध बन चुका है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जनसुराज, जो खुद को जनता आधारित आंदोलन बताती रही है, अब उसी जनता के असंतोष से जूझ रही है।

न्यूज़ देखो: जनसुराज के भीतर जन असंतोष का उबाल

कल्याणपुर की यह बगावत जनसुराज के संगठनात्मक ढांचे पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि ऐसे ही असंतोष कई क्षेत्रों में पनपता रहा, तो पार्टी को बिहार चुनाव में रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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जनता तय करेगी असली जनसुराज

लोकतंत्र में जनता से बड़ा कोई फैसला नहीं। सुबोध तिवारी का निर्दलीय कदम आने वाले चुनाव में जनसुराज के लिए चुनौती बन सकता है। अब समय है कि हर मतदाता अपनी राय स्पष्ट रूप से रखे। अपनी राय कॉमेंट करें और इस खबर को शेयर करें ताकि सच्ची जनआवाज़ सब तक पहुंचे।

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