#बरवाडीह #सीआरपीएफ_जवान : अंतिम सलामी के बीच नम आंखों से शहीद जवान को दी गई विदाई।
बरवाडीह प्रखंड के खुरा गांव निवासी सीआरपीएफ जवान उपेंद्र राम का शव गुरुवार देर शाम उनके पैतृक गांव पहुंचा, जहां पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया। ड्यूटी पर लौटने के दौरान ट्रेन से गिरकर हुई उनकी मौत के बाद चार दिन बाद तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचा। सीआरपीएफ जवानों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी, जबकि हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार और ग्रामीणों की आंखें नम रहीं तथा पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल देखा गया।
- सीआरपीएफ जवान उपेंद्र राम का शव गुरुवार देर शाम खुरा गांव पहुंचा।
- ड्यूटी पर लौटने के दौरान ट्रेन से गिरकर हुई थी मौत।
- सीआरपीएफ जवानों ने पूरे सम्मान के साथ दी अंतिम सलामी।
- हजारों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए गांव में जुटे।
- सहायक कमांडेंट नीरज कुमार सोनकर ने परिजनों को तिरंगा सौंपा।
- दिवंगत जवान अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और तीन छोटे बेटों को छोड़ गए।
बरवाडीह प्रखंड के खुरा गांव में गुरुवार की देर शाम उस समय गमगीन माहौल बन गया, जब सीआरपीएफ जवान उपेंद्र राम का तिरंगे में लिपटा शव उनके पैतृक घर पहुंचा। चार दिन पहले ट्रेन से गिरकर हुई उनकी मौत के बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया। शव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
तिरंगे में लिपटा शव पहुंचते ही मचा कोहराम
जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ जवान उपेंद्र राम का चंडीगढ़ से बंगाल तबादला हुआ था। छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटने के दौरान ट्रेन से गिरकर उनकी मौत हो गई थी।
घटना के चार दिन बाद गुरुवार को जब उनका शव गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। गांव के लोग अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचे।
सीआरपीएफ जवानों ने दी अंतिम सलामी
सीआरपीएफ की 11वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट नीरज कुमार सोनकर के नेतृत्व में जवानों की टीम शव लेकर गांव पहुंची। घर के बाहर जवानों द्वारा पूरे सैन्य सम्मान के साथ दिवंगत जवान को अंतिम सलामी दी गई।
इस दौरान पूरा माहौल भावुक हो गया। तिरंगे में लिपटे शव को देखकर परिजन खुद को संभाल नहीं सके।
सहायक कमांडेंट नीरज कुमार सोनकर ने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया और नियमानुसार तिरंगा झंडा जवान की पत्नी को सौंपा।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
अंतिम दर्शन के दौरान उपेंद्र राम की माता-पिता, पत्नी और बच्चों ने तिरंगे में लिपटे शव को सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
गांव की महिलाओं और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ दिखाई दिया।
हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
शव की स्थिति चार दिन बाद खराब हो जाने के कारण अंतिम सलामी के बाद पार्थिव शरीर को सीधे खुरा घाट ले जाया गया।
यहां हजारों ग्रामीणों और सीआरपीएफ जवानों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। दिवंगत जवान के बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी।
कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
इस दौरान सहायक कमांडेंट नीरज कुमार सोनकर, इंस्पेक्टर ललन रंजन, जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर, थाना प्रभारी अनुराग कुमार, मुखिया जितेंद्र सिंह, विधायक प्रतिनिधि प्रेम सिंह पिंटू, विजय बहादुर सहित कई लोग मौजूद रहे।
सभी ने दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
2013 में हुए थे सीआरपीएफ में बहाल
बताया गया कि उपेंद्र राम वर्ष 2013 में सीआरपीएफ में बहाल हुए थे। वह अपने परिवार के एकमात्र सहारा थे और पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।
अपने पीछे वे माता-पिता, पत्नी और तीन छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। गांव के लोगों ने कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल
इस दुखद घटना के बाद बरवाडीह और आसपास के क्षेत्रों में गमगीन माहौल बना हुआ है। लोग लगातार परिवार के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि देश सेवा करते हुए जवानों का जीवन संघर्ष और समर्पण से भरा होता है, जिसे समाज कभी नहीं भूल सकता।
न्यूज़ देखो: देश सेवा करने वाले जवानों का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा
उपेंद्र राम की असमय मौत केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गहरा आघात है। देश की सुरक्षा में लगे जवान अपने परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में सेवा करते हैं। ऐसे जवानों का समर्पण और त्याग हमेशा सम्मान के योग्य है। अब जरूरत है कि शोक की इस घड़ी में परिवार को हरसंभव सहयोग और सहारा मिले, ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
देश सेवा करने वालों का सम्मान समाज की जिम्मेदारी
देश की सुरक्षा में लगे जवान हमारे गौरव और साहस के प्रतीक हैं।
उनका त्याग और समर्पण हमेशा याद रखा जाना चाहिए।
कठिन समय में शहीद और दिवंगत जवानों के परिवारों के साथ खड़ा होना समाज का कर्तव्य है।
एकजुट होकर संवेदना और सहयोग की भावना को मजबूत बनाएं।
दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करें।
इस खबर को साझा करें और देश सेवा करने वाले जवानों के सम्मान और योगदान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।

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