नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक नृत्य के साथ धमधमिया में सरहुल महोत्सव बना आस्था और संस्कृति का उत्सव

नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक नृत्य के साथ धमधमिया में सरहुल महोत्सव बना आस्था और संस्कृति का उत्सव

author Jitendra Giri
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#खलारीझारखंड #सरहुलमहोत्सव : पारंपरिक शोभायात्रा और नृत्य से जीवंत हुई आदिवासी संस्कृति।

खलारी क्षेत्र के ढुब पेटपेट धमधमिया में सरहुल महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। ढुब से धमधमिया चौक तक निकली शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा और नगाड़ों की थाप पर नृत्य देखने को मिला। कार्यक्रम में डीएसपी रामनारायण चौधरी समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन क्षेत्र की आदिवासी संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा।

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  • ढुब पेटपेट धमधमिया में आयोजित हुआ भव्य सरहुल महोत्सव
  • मुख्य अतिथि रहे डीएसपी रामनारायण चौधरी
  • शोभायात्रा ढुब से धमधमिया चौक तक निकाली गई।
  • नगाड़ों, ढोल-मांदर की थाप पर देर शाम तक नृत्य।
  • पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं और युवा बने आकर्षण।
  • सुरक्षा व्यवस्था में जुटे थाना प्रभारी धनंजय बैठा और पुलिस बल।

खलारी प्रखंड के ढुब पेटपेट धमधमिया में सरहुल महोत्सव का आयोजन पूरे उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ किया गया। इस मौके पर क्षेत्र के ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे इलाके में उत्सव का माहौल देखने को मिला। ढोल, मांदर और नगाड़ों की गूंज के बीच निकली शोभायात्रा ने सभी को आकर्षित किया।

भव्य शोभायात्रा में दिखी संस्कृति की झलक

सरहुल महोत्सव के अवसर पर ढुब से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो धमधमिया चौक तक पहुंची। इस शोभायात्रा में महिलाएं लाल पाड़ साड़ी में और युवा सफेद परिधान में नजर आए, जो आदिवासी परंपरा और संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत कर रहे थे।

गाजे-बाजे के साथ नाचते-गाते ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पूरा रास्ता पारंपरिक संगीत और नृत्य से सराबोर हो गया।

नगाड़ों की थाप पर उमड़ी भीड़

देर शाम तक ढोल, मांदर और नगाड़ों की थाप पर ग्रामीणों की भीड़ नृत्य करती रही। हर उम्र के लोग इस उत्सव में शामिल हुए और पारंपरिक नृत्य का आनंद लिया। यह दृश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में खलारी डीएसपी रामनारायण चौधरी उपस्थित रहे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में मैकलुस्कीगंज थाना प्रभारी धनंजय बैठा, रोहिणी परियोजना पदाधिकारी दीपक कुमार, मुखिया संतोष कुमार महली, पंचायत समिति सदस्य सहदेव महली, रैविमो प्रवक्ता रामलखन गंझू और लालदेव पाहन मौजूद थे।

डीएसपी रामनारायण चौधरी ने कहा: “सरहुल महोत्सव हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे हमें मिलकर संरक्षित करना चाहिए।”

सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन की तैयारियां

शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मैकलुस्कीगंज थाना प्रभारी धनंजय बैठा और पिकेट प्रभारी पुरुषोत्तम भगत पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। उन्होंने पूरे कार्यक्रम के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

आयोजन समिति द्वारा ग्रामीणों के लिए खिचड़ी की व्यवस्था भी की गई, जिससे सामूहिकता और भाईचारे का संदेश मिला।

बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता

इस आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और ग्रामीण शामिल हुए। प्रमुख रूप से मुखिया संतोष कुमार महली, पंचायत समिति सदस्य सहदेव महली, रामलखन गंझू, अमृत भोगता, लहसन भोगता, लालदेव पाहन, रमेशर भोगता, उमेश लोहरा, अरविंद शर्मा, धनेश्वर गंझू, लहसन भोगता, महावीर भोगता, सूरज लोहरा, रामा उरांव, भरत रजक, बिनोद उरांव, राजू लोहरा, सूरज लोहरा, रवि भोगता, सूरज गंझू, अरुण भोगता, मंतोष भोगता, किशुन लोहरा, राजेंद्र भोगता, संतोष भोगता, सुमित महली, विनोद गंझू, करण उरांव, संजय लोहरा, बिशु गंझू, सोनू लोहरा, रवि गंझू, संजय भोगता, उदय भोगता, अमर साव, सिकंदर गंझू, पप्पू राम, विजय गंझू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही।

सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना आयोजन

सरहुल महोत्सव केवल एक पर्व नहीं बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। इस आयोजन ने क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया।

न्यूज़ देखो: परंपरा के उत्सव में दिखी समाज की ताकत

धमधमिया में आयोजित सरहुल महोत्सव यह दर्शाता है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी संस्कृति और परंपरा के प्रति गहरा जुड़ाव है। ऐसे आयोजन न केवल हमारी विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में एकता और सामूहिकता को भी मजबूत करते हैं। प्रशासन की मौजूदगी और ग्रामीणों की सहभागिता इस बात का संकेत है कि परंपरा और व्यवस्था साथ-साथ चल सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी परंपरा को जिएं और अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं

हमारी संस्कृति ही हमारी असली पहचान है, और सरहुल जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। ऐसे आयोजनों में भाग लेना और उन्हें आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

अपने गांव, अपने समाज और अपनी परंपराओं के प्रति गर्व महसूस करें और उन्हें संजोकर रखें।
युवाओं को भी इन आयोजनों से जोड़ें ताकि हमारी संस्कृति हमेशा जीवित रहे।

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Written by

खलारी, रांची

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