
#पलामू #सरस्वती_पूजा : मेदिनीनगर के बैरिया चौक पर महिलाओं ने परंपरागत श्रद्धा और अनुशासन से किया आयोजन।
पलामू जिले के मेदिनीनगर स्थित बैरिया चौक के समीप नवनिर्माण शक्ति संघ के तत्वाधान में महिलाओं द्वारा सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया। यह पूजा पूरी तरह शांतिपूर्ण, भक्तिभाव और पारंपरिक स्वरूप में संपन्न हुई। आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सामाजिक संदेश विशेष रूप से देखने को मिला।
- नवनिर्माण शक्ति संघ पलामू के तत्वाधान में महिलाओं द्वारा पूजा आयोजन।
- बैरिया चौक, मेदिनीनगर में पीले थीम पर सुसज्जित पंडाल।
- सभी महिलाओं ने पीले वस्त्रों में मां सरस्वती की विधिवत पूजा की।
- अध्यक्ष स्नेहा ओझा ने सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया संदेश।
- धार्मिक संगीत और पारंपरिक पूजा पद्धति पर रहा विशेष जोर।
पलामू जिले के मेदिनीनगर शहर में इस वर्ष सरस्वती पूजा का एक अलग और प्रेरणादायक स्वरूप देखने को मिला, जब नवनिर्माण शक्ति संघ पलामू के तत्वाधान में महिलाओं ने सामूहिक रूप से विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा का आयोजन किया। बैरिया चौक के समीप आयोजित यह पूजा पूरी तरह शांतिपूर्ण वातावरण, भक्तिभाव और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई, जिसने स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
पीले थीम में सजा पंडाल, भक्तिभाव से हुई पूजा
पूरे आयोजन की विशेषता यह रही कि पूजा पंडाल को पीले रंग की थीम पर आकर्षक ढंग से सजाया गया। पीले फूलों, पीले वस्त्रों और पारंपरिक सजावट ने पंडाल को आध्यात्मिक आभा प्रदान की। सभी महिलाओं ने पीले परिधान धारण कर मां सरस्वती को सिंदूर, गुलाल, भोग और प्रसाद अर्पित किया। पूजा के दौरान अनुशासन और सामूहिक श्रद्धा का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
संस्कृति संरक्षण पर अध्यक्ष का संदेश
नवनिर्माण शक्ति संघ की अध्यक्ष स्नेहा ओझा ने पूजा के दौरान समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज का समाज तेजी से पश्चिमी सभ्यता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा:
“हमारी सभ्यता और परंपरा ही हमारी पहचान है। आने वाली पीढ़ी को इनके मूल्य समझाने के लिए ऐसे पूजा आयोजन राष्ट्र के लिए बहुत जरूरी हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि पूजा आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ा जा सकता है।
धार्मिक संगीत को दी गई प्राथमिकता
इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि पूजा के दौरान बॉलीवुड संगीत या रैप के बजाय पूरी तरह धार्मिक भजनों और मंत्रों का ही उपयोग किया गया। संघ की अध्यक्ष ने बताया कि धार्मिक संगीत नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों की ओर आकर्षित करता है, जिससे उनमें आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।
आयोजन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका
पूरे आयोजन को सफल बनाने में संघ की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रिया सिंह ने पंडाल की सजावट से लेकर पूजा व्यवस्था, अतिथियों के स्वागत और प्रसाद वितरण तक में अहम भूमिका निभाई। उनके सहयोग से आयोजन व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ।
संघ की अन्य सदस्यों ने भी आयोजन को सफल बनाने में सामूहिक जिम्मेदारी निभाई, जिससे यह कार्यक्रम एक उदाहरण बनकर सामने आया।
सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्य
संघ के सदस्यों ने बताया कि नवनिर्माण शक्ति संघ केवल सामाजिक कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंदू धर्म की रीति-रिवाजों, परंपराओं और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी संघ का प्रमुख उद्देश्य है। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।
उपस्थित रहीं ये प्रमुख सदस्य
इस अवसर पर संस्था की कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहीं, जिनमें सोनी पाठक, प्रियंका मिश्रा, वागीशा विश्वकर्मा, रानी उपाध्याय, प्रिया सिंह, इंदु मेहता, स्नेहा ओझा, अनुपा सिंह, सुधा दुबे, इंदु देवी, आरती देवी, चंपा देवी, मंजू देवी, अभिनिशा सिंह सहित अन्य महिलाएं शामिल थीं। सभी ने सामूहिक रूप से पूजा में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।
स्थानीय लोगों ने की सराहना
पूजा आयोजन को देखने पहुंचे स्थानीय नागरिकों ने महिलाओं द्वारा किए गए इस प्रयास की सराहना की। लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।



न्यूज़ देखो: महिलाओं की पहल, संस्कृति की मिसाल
नवनिर्माण शक्ति संघ द्वारा आयोजित यह पूजा दिखाती है कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश और भी प्रभावी बनते हैं। परंपरा, अनुशासन और आध्यात्मिकता का यह संगम समाज के लिए प्रेरणादायक है। क्या ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने में सफल होंगे? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति से जुड़ें, परंपरा को आगे बढ़ाएं
सरस्वती पूजा का यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि हमारी जड़ें हमारी ताकत हैं। भारतीय संस्कृति को समझें, अपनाएं और अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।
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