बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ मजदूरों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी, प्रशासनिक जांच तेज

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ मजदूरों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी, प्रशासनिक जांच तेज

author News देखो Team
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#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : पांच मजदूरों की छंटनी के विरोध में धरना लगातार जारी रहा।

गिरिडीह स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने पांच मजदूरों को बिना नोटिस हटाए जाने के विरोध में दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना जारी रहा। असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के बीच प्रशासनिक अधिकारी भी धरनास्थल पहुंचे और पीड़ित मजदूरों से बातचीत की। आंदोलनकारियों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूर विरोधी रवैया अपनाने और अवैध गतिविधियों के आरोप लगाए। मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि उचित कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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  • बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ दूसरे दिन भी जारी रहा धरना।
  • पांच मजदूरों की छंटनी को लेकर भाकपा माले और मजदूर मोर्चा का विरोध।
  • जांच के लिए पहुंचे अंचल अधिकारी, थाना प्रभारी और श्रम विभाग के अधिकारी।
  • धरनार्थियों ने फैक्ट्री पर बालू, पत्थर और उसरी से पानी चोरी का आरोप लगाया।
  • राजेश सिन्हा ने कहा कि प्रशासन के सामने फैक्ट्री की सच्चाई लाना लक्ष्य।
  • धरनास्थल पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर मौजूद रहे।

गिरिडीह में बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ मजदूरों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पांच मजदूरों को बिना नोटिस हटाए जाने के विरोध में असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के संयुक्त नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। धरने के दौरान बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर फैक्ट्री के सामने बैठे रहे और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मजदूरों की शिकायतों की जांच शुरू की।

धरनास्थल पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी

धरने की सूचना के बाद प्रशासन की ओर से अंचल अधिकारी गिरिडीह, मुफ्फसिल थाना प्रभारी गिरिडीह तथा श्रम विभाग के अधिकारी धरनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने सबसे पहले पीड़ित मजदूरों से बातचीत की और उनसे संबंधित दस्तावेजों एवं मांग पत्रों की जांच की।

धरनास्थल पर मौजूद मजदूर नेताओं ने अधिकारियों को विस्तार से बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा मजदूरों को बिना किसी पूर्व सूचना और प्रक्रिया के बाहर कर दिया गया। मजदूरों ने कहा कि इससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

अधिकारियों ने मजदूरों की बातें सुनने के बाद फैक्ट्री परिसर में जाकर प्रबंधन पक्ष से भी बातचीत की। जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी अधिकारी वहां से लौट गए।

मुफ्फसिल थाना प्रभारी ने फोन पर जानकारी दी: “मामले की जांच के लिए श्रम विभाग को सौंपा गया है और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।”

मजदूर नेताओं ने उठाए गंभीर आरोप

धरनास्थल पर मौजूद मजदूर नेताओं ने केवल छंटनी का ही नहीं बल्कि फैक्ट्री संचालन से जुड़े अन्य मामलों को भी उठाया। मजदूर नेता कन्हाई प्रसाद ने आरोप लगाया कि बालमुकुंद फैक्ट्री मजदूरों के खिलाफ काम कर रही है और अवैध रूप से बालू, पत्थर तथा उसरी क्षेत्रों से टैंकर के जरिए पानी लाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि खनन विभाग की सुस्ती के कारण इस तरह की गतिविधियां लगातार जारी हैं और यदि इस पर रोक नहीं लगी तो जल्द ही खनन विभाग के खिलाफ भी आंदोलन किया जाएगा।

कन्हाई प्रसाद ने कहा: “बालमुकुंद मजदूर विरोधी रवैया अपना रहा है। बालू, पत्थर और उसरी क्षेत्रों से पानी चोरी कर टैंकरों से लाया जा रहा है। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो खनन विभाग के खिलाफ भी आंदोलन होगा।”

प्रशासन के सामने सच्चाई लाने की बात

धरना में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिन्हा ने कहा कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य प्रशासन के सामने फैक्ट्री की वास्तविक स्थिति और कथित अनियमितताओं को उजागर करना है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राजेश सिन्हा ने कहा कि मजदूरों को बिना कारण हटाना अन्यायपूर्ण है और प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों के साथ लगातार हो रहे अन्याय के खिलाफ जन आंदोलन और मजबूत किया जाएगा।

राजेश सिन्हा ने कहा: “प्रशासन के सामने बालमुकुंद की सच्चाई और काले करतूतों को लाना हमारा लक्ष्य है। मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।”

उचित पहल तक जारी रहेगा धरना

धरनार्थियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रशासन या फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई ठोस और उचित पहल नहीं होती, तब तक शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह स्पष्ट और न्यायसंगत हैं।

धरनास्थल पर मौजूद मजदूरों और नेताओं ने कहा कि मजदूरों की बहाली, रोजगार सुरक्षा और फैक्ट्री की गतिविधियों की जांच उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं। आंदोलन के दौरान लगातार नारेबाजी भी होती रही।

बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर मौजूद

धरनास्थल पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर मौजूद रहे। आंदोलन में कन्हाई पांडे, हूब लाल राय, राजेश सिन्हा, किशोरी राय, भिखारी राय, सूदन कोल, दीपक गोस्वामी, तुलसी तुरी, इम्तियाज अंसारी, नवीन पांडे, लखन कोल, भीम कोल, दिलचंद कोल सहित कई लोग शामिल रहे।

महिला साथियों में निमिया देवी, ललिता देवी, सरिता देवी, कुसुम देवी, करनी देवी, जगिया देवी, थलमुनी देवी और सुगिया देवी समेत सैकड़ों महिलाएं धरने में शामिल हुईं।

धरनार्थियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल पांच मजदूरों की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि मजदूरों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।

मजदूर संगठनों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों के साथ अन्याय होने पर चुप नहीं बैठा जाएगा।

नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि मजदूरों की छंटनी मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही फैक्ट्री संचालन और पानी उपयोग से जुड़े आरोपों की भी जांच की मांग की गई।

न्यूज़ देखो: मजदूरों की आवाज सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ जारी यह आंदोलन केवल पांच मजदूरों की नौकरी का मामला नहीं बल्कि श्रमिक अधिकारों और सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। यदि मजदूरों को बिना प्रक्रिया के हटाया जाता है तो इससे श्रम कानूनों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं। प्रशासन की जांच से अब उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन वास्तविक न्याय तभी माना जाएगा जब निष्पक्ष कार्रवाई दिखाई दे। मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े सामाजिक विवाद को जन्म दे सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मजदूर अधिकारों के लिए जागरूक बनें, न्याय की आवाज मजबूत करें

किसी भी उद्योग की सबसे बड़ी ताकत वहां काम करने वाले मजदूर होते हैं। यदि श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे तो सामाजिक और आर्थिक संतुलन भी प्रभावित होगा। जरूरत है कि हर नागरिक मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से समझे और न्यायपूर्ण व्यवस्था के समर्थन में आवाज उठाए।

स्थानीय मुद्दों और श्रमिक संघर्षों को सामने लाना समाज की जिम्मेदारी भी है। यदि आपके क्षेत्र में भी मजदूरों, किसानों या आम जनता से जुड़ी समस्याएं हैं तो उन्हें सामने लाना जरूरी है। अपनी राय कमेंट करें, खबर को अधिक लोगों तक साझा करें और जनहित के मुद्दों पर जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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