
#बानो #सनातन_नववर्ष : केतुंगा धाम में आस्था, परंपरा और विकास का अद्भुत संगम दिखा।
सिमडेगा के बानो स्थित केतुंगा धाम में विक्रम संवत 2083 के अवसर पर भव्य सनातन नववर्ष समारोह आयोजित किया गया। मानव धर्म रक्षक संघ और केतुंगा धाम न्यास समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक गतिविधियों और भंडारे का आयोजन हुआ। साथ ही धाम के विकास और व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।
- केतुंगा धाम में विक्रम संवत 2083 पर भव्य आयोजन सम्पन्न।
- भुवनेश्वरी सेनापति व नारायण दास ने ध्वज पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
- श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों और आचार्यों की बड़ी भागीदारी से भक्तिमय माहौल।
- बैठक में धाम विकास, पारदर्शिता और पंजीकरण व्यवस्था पर महत्वपूर्ण फैसले।
- अशोककालीन गौतम बुद्ध प्रतिमा संरक्षण के लिए प्रशासन को मांग पत्र देने का निर्णय।
बानो प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल केतुंगा धाम में सनातन नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आयोजन पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर धाम परिसर में शिव भक्तों, आचार्यों, विद्यार्थियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवा ध्वज फहराकर की गई।
धार्मिक अनुष्ठानों से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य शिक्षक रोहित साहू एवं गण शिक्षक उमेश कुमार साहू द्वारा भगवा ध्वज फहराकर किया गया। इसके बाद न्यास समिति के आजीवन न्यासी भुवनेश्वरी सेनापति और नारायण दास ने संयुक्त रूप से ध्वज पूजन, दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित कर आयोजन की शुरुआत की।
इसके पश्चात सभी उपस्थित आचार्यगण, समिति सदस्य और विद्यार्थियों ने भगवान के ध्वज के समक्ष तिलक लगाकर प्रणाम किया। इस दौरान अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
सनातन परंपरा और इतिहास पर दिया गया जोर
अपने संबोधन में भुवनेश्वरी सेनापति ने कहा:
भुवनेश्वरी सेनापति ने कहा: “सनातन परंपरा के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यह दिन अत्यंत पवित्र है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर समाज के लिए सकारात्मक कार्य करना चाहिए।”
उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य, आचार्य चाणक्य, रानी लक्ष्मीबाई और महारानी दुर्गावती जैसे महान व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए युवाओं को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी।
वहीं नारायण दास ने सनातन धर्म की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए समाज में एकता और जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।
भक्ति और उत्साह से गूंजा पूरा धाम परिसर
कार्यक्रम के दौरान “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “विक्रम संवत अमर रहे” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
ध्वज प्रार्थना का आयोजन उमेश कुमार साहू द्वारा कराया गया, जिसके बाद भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
बैठक में धाम विकास को लेकर लिए गए अहम निर्णय
कार्यक्रम के बाद केतुंगा धाम न्यास समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें धाम के विकास और व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि:
- सनातन नववर्ष का आयोजन हर वर्ष और अधिक भव्य तरीके से किया जाएगा।
- प्रभात फेरी, जनजागरण अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होंगे।
- धार्मिक संस्कारों के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा।
- सभी कार्यों का पारदर्शी लेखा-जोखा रखा जाएगा और वार्षिक ऑडिट कराया जाएगा।
ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण पर विशेष निर्णय
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि केतुंगा धाम के उत्तरी छोर पर स्थित गौतम बुद्ध की अशोककालीन प्रतिमा को संग्रहालय नहीं भेजा जाएगा। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए जिला प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग को मांग पत्र सौंपा जाएगा।
इसके अलावा धाम परिसर की शेष भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए एक समिति का गठन भी किया गया, जिससे भविष्य में विकास कार्यों को गति मिल सके।
कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में महासचिव ओम प्रकाश साहू, कोषाध्यक्ष अजीत साहू, संरक्षक दिलमोहन साहू, राजेंद्र बराइक, रामचंद्र साहू, उपाध्यक्ष बिलकुल महतो, संतु सिंह, सहसचिव दिलीप पांडा, प्रमोद सोनी, श्याम शिखर सोनी, महावीर सोनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अंत में समिति के अध्यक्ष सुकरा केरकेट्टा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन पर खुशी व्यक्त की।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ विकास की दिशा में बड़ा कदम
केतुंगा धाम में आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता का भी प्रतीक बना। समिति द्वारा लिए गए निर्णय यह दर्शाते हैं कि अब धार्मिक स्थलों के विकास में पारदर्शिता और व्यवस्थित प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। क्या ये योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होंगी, यह आने वाला समय बताएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति से जुड़ें, समाज को मजबूत बनाएं
हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं। ऐसे आयोजनों में भाग लेना और उन्हें आगे बढ़ाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
अगर हम अपनी विरासत को संजोएंगे, तभी आने वाली पीढ़ियां इसे गर्व के साथ आगे बढ़ा पाएंगी। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
आप भी ऐसे आयोजनों में भाग लें, अपनी संस्कृति को जानें और दूसरों को भी प्रेरित करें। अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जागरूक समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।






