#गुमला #धार्मिक_महोत्सव : 551 महिलाओं की शोभायात्रा—हनुमान मंदिर महोत्सव शुरू।
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड के मुरुमकेला गांव में हनुमान मंदिर के चौथे वार्षिक महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर 551 महिलाओं और युवतियों ने भव्य कलश शोभायात्रा निकाली। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना कर अखंड हरि कीर्तन की शुरुआत की गई। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
- मुरुमकेला गांव में हनुमान मंदिर का चौथा वार्षिक महोत्सव शुरू।
- 551 महिलाओं और युवतियों ने भव्य कलश शोभायात्रा निकाली।
- शोभायात्रा दक्षिणी कोयल नदी डोम्बा घाट तक पहुंची।
- आचार्य कृष्णा मिश्रा और सत्यनारायण मिश्रा ने वैदिक पूजा संपन्न कराई।
- 24 घंटे के अखंड हरि कीर्तन-भजन का हुआ शुभारंभ।
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत बघिमा पंचायत के मुरुमकेला गांव में आयोजित हनुमान मंदिर का चौथा वार्षिक महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। इस अवसर पर निकाली गई भव्य कलश शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
भव्य कलश शोभायात्रा से गूंजा क्षेत्र
महोत्सव की शुरुआत 551 महिलाओं और युवतियों द्वारा निकाली गई भव्य कलश शोभायात्रा से हुई।
यह शोभायात्रा हनुमान मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर गुड़गुड़ा, मरदा, मलई होते हुए बागेसरा स्थित दक्षिणी कोयल नदी डोम्बा घाट तक पहुंची।
पूरे मार्ग में श्रद्धालु “जय श्रीराम” और “हनुमान जी की जय” के जयघोष के साथ भक्ति में लीन नजर आए।
वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुई पूजा
डोम्बा घाट पहुंचने के बाद आचार्य कृष्णा मिश्रा एवं सत्यनारायण मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कराई।
आचार्य कृष्णा मिश्रा ने कहा: “इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार करते हैं।”
इसके बाद सभी महिलाओं और युवतियों ने अपने-अपने कलश में पवित्र जल भरकर पुनः शोभायात्रा के साथ मंदिर परिसर की ओर प्रस्थान किया।
मंदिर परिसर में विधिवत स्थापना
मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने कलश के साथ मंदिर की परिक्रमा की और विधिवत स्थापना की।
इसके पश्चात आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ देवी-देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान श्री हनुमान जी की पूजा-अर्चना प्रारंभ कराई गई।
अखंड हरि कीर्तन से भक्तिमय माहौल
महोत्सव के दौरान 24 घंटे के अखंड हरि कीर्तन-भजन का शुभारंभ किया गया।
“हरे रामा… हरे कृष्णा…” के जयघोष से पूरा मुरुमकेला क्षेत्र गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए।
यह धार्मिक आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को भी मजबूत करने का माध्यम बना।
आयोजन में सक्रिय सहभागिता
इस महोत्सव को सफल बनाने में कई स्थानीय लोगों का सराहनीय योगदान रहा।
इस अवसर पर दिनेश सिंह, बबलू साहू, सूरज साहू, दिलीप साहू, अजित सिंह, हुलेश साहू, राजेश लोहरा, शिवदयाल सिंह, चरकू बड़ाईक, ललित बड़ाईक, महावीर बड़ाईक, हरक साहू समेत सैकड़ों महिला-पुरुष, युवक-युवतियों और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल और यादगार बनाने में अपनी भूमिका निभाई।
न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
मुरुमकेला में आयोजित यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि समाज में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। ऐसे आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को जोड़ने का भी कार्य करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था से जुड़े, समाज को जोड़ें
धार्मिक आयोजन हमें एकजुट रहने और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा देते हैं।
ऐसे अवसर समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना को बढ़ाते हैं।
जरूरत है कि हम इन परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए समाज में सद्भाव बनाए रखें।
हर व्यक्ति की भागीदारी से ही ऐसे आयोजन सफल बनते हैं।
आइए, अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजें।
इस खबर को शेयर करें, अपनी राय कमेंट में दें और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाएं।

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