#लातेहार #बालूमाथ : भैंसादोन में ग्रामीणों ने कंपनी गतिविधियों के खिलाफ एकजुट होकर निर्णय लिया।
लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड के भैंसादोन गांव में रविवार को ग्राम सभा की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें एनटीपीसी और एनएलसी से जुड़ी कंपनी गतिविधियों के खिलाफ ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाया। दुर्गा मंडप परिसर में ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिला परिषद उपाध्यक्ष अनीता देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि बिना ग्राम सभा की अनुमति किसी भी कंपनी को गांव में सर्वे, जनसुनवाई या गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके विरोध में 21 मई को गेरेंजा में बड़ी बैठक आयोजित करने का भी ऐलान किया गया।
- भैंसादोन गांव में ग्राम सभा बैठक में कंपनी गतिविधियों के खिलाफ बड़ा निर्णय लिया गया।
- ग्रामीणों ने एनटीपीसी और एनएलसी पर बिना सूचना सर्वे और जनसुनवाई का आरोप लगाया।
- सर्वसम्मति से तय हुआ कि बिना ग्राम सभा अनुमति कोई गतिविधि नहीं होगी।
- जिला परिषद उपाध्यक्ष अनीता देवी ने ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया।
- 21 मई को गेरेंजा में बड़ी बैठक कर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया।
लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत भैंसादोन गांव में रविवार को हुई ग्राम सभा की बैठक ने स्थानीय प्रशासन और कंपनियों के बीच संवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्गा मंडप परिसर में आयोजित इस बैठक में सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और एनटीपीसी तथा एनएलसी से जुड़ी गतिविधियों पर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनियां बिना पूर्व सूचना के गांव में सर्वे, बैठक और जनसुनवाई जैसी प्रक्रियाएं शुरू कर रही हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राम सभा में ग्रामीणों की एकजुटता
बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान द्वारा की गई, जिसमें ग्रामीणों ने एक स्वर में अपनी समस्याएं रखीं। लोगों ने कहा कि गांव में किसी भी बड़ी परियोजना या कंपनी गतिविधि से पहले ग्राम सभा को जानकारी देना अनिवार्य होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
कंपनियों पर बिना सूचना गतिविधि का आरोप
ग्रामीणों ने स्पष्ट आरोप लगाया कि एनटीपीसी और एनएलसी से जुड़ी कुछ कंपनियां बिना पंचायत और ग्राम सभा की सहमति के सर्वे और अन्य गतिविधियां कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे न केवल पारदर्शिता प्रभावित हो रही है बल्कि स्थानीय लोगों के अधिकारों की भी अनदेखी हो रही है।
ग्रामीणों ने मांग की कि किसी भी प्रक्रिया से पहले ग्राम सभा को औपचारिक रूप से सूचना दी जाए और स्थानीय प्रतिनिधियों को पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
सर्वसम्मति से लिया गया बड़ा फैसला
ग्राम सभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अब गांव में किसी भी प्रकार की कंपनी गतिविधि, सर्वे या जनसुनवाई बिना ग्राम सभा की अनुमति के नहीं होगी। यदि ऐसा किया जाता है तो ग्रामीण सामूहिक रूप से उसका विरोध करेंगे।
यह निर्णय ग्रामीणों की बढ़ती जागरूकता और अपने अधिकारों के प्रति उनकी सजगता को दर्शाता है।
21 मई को गेरेंजा में बड़ा जुटान
बैठक में यह भी तय किया गया कि 21 मई को गेरेंजा में एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आसपास के गांवों के ग्रामीण भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य कंपनी गतिविधियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज को और मजबूत करना है।
ग्रामीणों ने इस बैठक को आगे की रणनीति तय करने के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका और प्रतिक्रिया
जिला परिषद उपाध्यक्ष अनीता देवी ने बैठक में कहा कि ग्राम सभा सर्वोच्च संस्था है और बिना उसकी सहमति के किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के अधिकार, जमीन और सम्मान की रक्षा के लिए वे हमेशा उनके साथ खड़ी रहेंगी।
उन्होंने कंपनियों से भी अपील की कि वे स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर ही कोई भी प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।
ग्रामीणों की एकजुटता और आगे की रणनीति
बैठक में मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने एक स्वर में ग्राम सभा के फैसले का समर्थन किया और कंपनी की अपारदर्शी गतिविधियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। लोगों का कहना है कि जब तक पारदर्शिता और संवाद नहीं होगा, तब तक विरोध जारी रहेगा।
न्यूज़ देखो: ग्राम सभा की ताकत और पारदर्शिता की मांग
यह निर्णय दर्शाता है कि ग्रामीण अब अपने अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक और संगठित हो रहे हैं। ग्राम सभा का यह रुख कंपनियों और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि स्थानीय सहमति के बिना विकास प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। हालांकि, इस स्थिति में संवाद और पारदर्शिता की कमी को दूर करना सबसे बड़ी चुनौती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र की असली ताकत गांव से शुरू होती है
ग्राम सभा का यह निर्णय दिखाता है कि असली लोकतंत्र जमीनी स्तर पर ही मजबूत होता है। जब लोग एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो बदलाव संभव होता है।
आप भी अपने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों पर नजर रखें और पारदर्शिता की मांग करें।
सजग रहें, संगठित रहें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और जागरूकता की इस मुहिम को आगे बढ़ाएं।

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