पेसा कानून के तहत पांच गांवों की संयुक्त ग्राम सभा का बड़ा फैसला, बंद पड़े प्लांट क्षेत्र पर ग्रामीणों ने जताया सामुदायिक अधिकार

पेसा कानून के तहत पांच गांवों की संयुक्त ग्राम सभा का बड़ा फैसला, बंद पड़े प्लांट क्षेत्र पर ग्रामीणों ने जताया सामुदायिक अधिकार

author Ravikant Kumar Thakur
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#चंदवा #ग्रामसभा_निर्णय : पांच गांवों के ग्रामीणों ने बंद औद्योगिक क्षेत्र पर सामुदायिक अधिकार का दावा किया।

चंदवा प्रखंड के सरहुलिया महुआ क्षेत्र में बुधवार को पांच प्रभावित गांवों की संयुक्त ग्राम सभा आयोजित हुई, जिसमें बंद पड़े औद्योगिक क्षेत्र और उससे जुड़ी जमीनों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने पेसा कानून का हवाला देते हुए जल, जंगल और जमीन पर सामुदायिक अधिकार की बात कही। ग्राम सभा में रोजगार, मुआवजा और विकास योजनाओं से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, रैयतों और महिला प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सामूहिक रणनीति बनाने का निर्णय लिया गया।

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  • चंदवा के सरहुलिया महुआ क्षेत्र में पांच गांवों की संयुक्त ग्राम सभा आयोजित हुई।
  • अनगड़ा, चतरो, अरधे, तुपी और चकला गांव के ग्रामीणों ने सामुदायिक अधिकार का प्रस्ताव पारित किया।
  • ग्रामीणों ने बंद पड़े प्लांट और अधिग्रहित जमीन को लेकर प्रशासन से समाधान की मांग की।
  • ग्राम सभा में रोजगार, मुआवजा और गुजारा भत्ता नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
  • बड़ी संख्या में रैयत, महिला प्रतिनिधि और पारंपरिक ग्राम प्रधान बैठक में शामिल हुए।
  • ग्राम सभा ने गांवों के विकास और स्थानीय युवाओं के रोजगार को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।

चंदवा प्रखंड के सरहुलिया महुआ क्षेत्र में बुधवार को आयोजित संयुक्त ग्राम सभा में ग्रामीणों ने अपने अधिकारों और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया। पांच प्रभावित गांवों के लोगों ने पेसा कानून के तहत अपनी बात रखते हुए बंद पड़े औद्योगिक क्षेत्र और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों पर सामुदायिक नियंत्रण की घोषणा की। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों पहले विकास और रोजगार के नाम पर जमीन ली गई थी, लेकिन परियोजना बंद होने के बाद स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। ग्राम सभा में रोजगार, पुनर्वास और आर्थिक संकट जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

पांच गांवों के ग्रामीणों ने जताई एकजुटता

संयुक्त ग्राम सभा में अनगड़ा, चतरो, अरधे, तुपी और चकला गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक में महिला प्रतिनिधियों, रैयतों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों ने भी अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने कहा कि औद्योगिक परियोजना बंद होने के बाद इलाके में बेरोजगारी और आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ी है।

ग्रामीणों का कहना था कि जिन उम्मीदों के साथ भूमि अधिग्रहण किया गया था, वे पूरी नहीं हो सकीं। स्थानीय लोगों को न तो स्थायी रोजगार मिला और न ही समय पर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इससे प्रभावित परिवारों के सामने आजीविका का संकट गहराता गया।

पेसा कानून का हवाला देकर लिया गया निर्णय

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने पेसा कानून के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांव की जमीन, जल और प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय समुदाय का होना चाहिए। ग्राम सभा में सामूहिक प्रस्ताव पारित कर यह कहा गया कि बंद पड़े प्लांट क्षेत्र और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों के उपयोग को लेकर आगे की रणनीति ग्रामीणों की सहमति से तय की जाएगी।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि आने वाले समय में गांवों के विकास, रोजगार सृजन और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएंगे। बैठक में आपसी सहयोग और सामाजिक एकता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

रोजगार और मुआवजा को लेकर उठी आवाज

ग्राम सभा में मौजूद कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना बंद होने के बाद प्रभावित परिवारों को रोजगार, मुआवजा और गुजारा भत्ता जैसी सुविधाएं नियमित रूप से नहीं मिलीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में ठोस पहल करने की मांग की।

ग्रामीणों ने कहा: “स्थानीय लोगों के अधिकारों और समस्याओं को गंभीरता से लेकर समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।”

बैठक में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आगे भी सामूहिक रूप से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

ग्राम सभा ने प्रशासन से की यह मांग

ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से कई मांगें रखीं। इनमें प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार उपलब्ध कराने, बंद पड़े प्लांट क्षेत्र के उपयोग को लेकर स्पष्ट नीति बनाने तथा ग्राम सभा के निर्णयों को संवैधानिक मान्यता देने की मांग शामिल रही।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि किसी भी विकास योजना में स्थानीय समुदाय की सहमति और सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। बैठक में क्षेत्र में शांति और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने का संदेश भी दिया गया।

न्यूज़ देखो: ग्राम सभाओं की सक्रियता ने स्थानीय अधिकारों की बहस को फिर किया मजबूत

चंदवा में आयोजित यह संयुक्त ग्राम सभा सिर्फ एक बैठक नहीं बल्कि स्थानीय अधिकारों और सामुदायिक भागीदारी की बड़ी अभिव्यक्ति के रूप में सामने आई है। पेसा कानून के तहत ग्रामीणों द्वारा अपनी बात मजबूती से रखना यह दिखाता है कि अब गांव स्तर पर लोग अपने अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे संवाद और समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल करें। प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान ही क्षेत्र में स्थायी विश्वास और विकास का रास्ता खोल सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक ग्राम सभा ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान

जब गांव के लोग एकजुट होकर अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आवाज उठाते हैं, तभी लोकतंत्र की असली ताकत दिखाई देती है। स्थानीय संसाधनों, रोजगार और विकास से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक भागीदारी समाज को नई दिशा देती है। जरूरत इस बात की है कि संवाद, शांति और संवैधानिक व्यवस्था के साथ समस्याओं का समाधान निकाला जाए।

अपने गांव, अपने अधिकार और अपने भविष्य को लेकर सजग रहिए।
स्थानीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखिए और सकारात्मक बदलाव की पहल का हिस्सा बनिए।
इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर दें और इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें, ताकि जनहित से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ सके।

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Written by

चंदवा, लातेहार

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