
#गढ़वा #कृषिमौसमसेवा : विद्यार्थियों को मौसम प्रसारण केंद्र का कराया गया शैक्षणिक भ्रमण।
11 फरवरी 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा स्थित कृषि मौसम सेवा केंद्र में कृषि महाविद्यालय के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने आधुनिक खेती में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका समझाई। छात्रों को स्वचालित मौसम डेटा प्रणाली की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक कृषि के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
- 11 फरवरी 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित।
- डॉ. बंधुनु उरांव ने कृषि मौसम सेवा की उपयोगिता पर दिया विस्तृत व्याख्यान।
- नवलेश कुमार (एसआरएफ) ने स्वचालित मौसम डेटा प्रणाली की जानकारी दी।
- डॉ. सुलोचना ने आधुनिक कृषि में मौसम सेवा की अनिवार्यता बताई।
- केंद्र के वैज्ञानिकों व कर्मचारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न।
11 फरवरी 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, गढ़वा स्थित कृषि मौसम सेवा केंद्र में कृषि महाविद्यालय गढ़वा के द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि मौसम सेवा केंद्र की कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक तथा वैज्ञानिक खेती में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका से अवगत कराना था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने केंद्र में स्थापित विभिन्न उपकरणों और मौसम डेटा संग्रह प्रणाली को नजदीक से देखा और समझा।
वैज्ञानिक खेती में मौसम सेवा की भूमिका
केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. बंधुनु उरांव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कृषि मौसम सेवा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“आधुनिक भारत में वैज्ञानिक विधि से खेती करने में कृषि मौसम सेवा प्रसारण की अहम भूमिका है।”
उन्होंने बताया कि मौसम पूर्वानुमान के माध्यम से किसानों को आने वाले दिनों में तापमान, वर्षा, आर्द्रता और मौसम की स्थिति की जानकारी मिलती है। इससे किसान यह तय कर सकते हैं कि किस समय कौन-सा कृषि कार्य करना है, बीज बुवाई कब करनी है, सिंचाई या उर्वरक का प्रयोग कब करना है तथा संभावित प्राकृतिक आपदा से कैसे बचाव करना है। उन्होंने यह भी समझाया कि मौसम की सटीक जानकारी किसानों को नुकसान से बचाने में सहायक होती है।
स्वचालित मौसम डेटा प्रणाली की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान केंद्र के एसआरएफ श्री नवलेश कुमार ने विद्यार्थियों को ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के अंतर्गत संचालित स्वचालित प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया:
“ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के अंतर्गत स्थापित स्वचालित प्रणाली मौसम का विभिन्न प्रकार का डेटा रिकॉर्ड करती है।”
उन्होंने बताया कि यह प्रणाली तापमान, वर्षा की मात्रा (मिलीमीटर में), वायुदाब, हवा की गति तथा हवा की दिशा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को रिकॉर्ड करती है। इन आंकड़ों के आधार पर कृषि विशेषज्ञ किसानों के लिए सलाह तैयार करते हैं, जिससे फसल उत्पादन को बेहतर बनाया जा सके।
आधुनिक कृषि में मौसम पूर्वानुमान की अनिवार्यता
कृषि महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर सह कनीय वैज्ञानिक डॉ. सुलोचना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा:
“मौसम सेवा प्रसारण हर क्षेत्र में कारगर है, विशेषकर कृषि क्षेत्र में इसके उपयोग के बिना आधुनिक कृषि संभव नहीं है।”
उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं तथा भविष्य में किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बदलते जलवायु परिदृश्य में मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अत्यंत आवश्यक हो गया है।
विद्यार्थियों ने जाना उपकरणों का उपयोग
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने मौसम मापक यंत्रों, डेटा रिकॉर्डिंग उपकरणों तथा प्रसारण प्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देखा। उन्हें यह समझाया गया कि किस प्रकार एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण कर कृषि परामर्श तैयार किया जाता है। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
इस अवसर पर केंद्र के सहायक श्री सियाराम पांडे, सुनील कुमार, राकेश रंजन चौबे, कृष्ण कुमार चौबे तथा केंद्र के प्रक्षेत्र प्रबंधक श्री विंध्याचल राम भी उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों को तकनीकी जानकारी प्रदान करने में सहयोग किया।
शिक्षा और अनुसंधान का सेतु
यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिली कि मौसम विज्ञान और कृषि के बीच गहरा संबंध है। वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर खेती को अधिक लाभकारी और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि आधुनिक तकनीक और शिक्षा के समन्वय से ही कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव भविष्य की पढ़ाई और शोध कार्य में सहायक सिद्ध होगा।

न्यूज़ देखो: तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर
गढ़वा में आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण दर्शाता है कि कृषि शिक्षा अब केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी प्रयोगशालाओं और मौसम केंद्रों तक पहुंच रही है। बदलते जलवायु परिदृश्य में वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित खेती ही टिकाऊ समाधान है। यदि मौसम सेवा का लाभ हर किसान तक पहुंचे, तो उत्पादन और आय दोनों में सुधार संभव है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
वैज्ञानिक सोच अपनाएं, कृषि को बनाएं सशक्त
नई पीढ़ी के कृषिविद ही भविष्य की खेती की दिशा तय करेंगे।
मौसम की जानकारी को समझें और वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं।
तकनीक और परंपरा का संतुलन ही सफलता की कुंजी है।
कृषि को ज्ञान आधारित बनाना समय की मांग है।
अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें और इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि वैज्ञानिक खेती का संदेश हर गांव तक पहुंचे।







