
#गुमला #सड़कसुरक्षा #हेलमेटअनिवार्य : प्रशासन का भावनात्मक अभियान, बच्चों ने ली सुरक्षा की शपथ
गुमला जिला प्रशासन ने सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक अनूठी और भावनात्मक पहल शुरू की है। भविष्य की पीढ़ी को जागरूक कर अभिभावकों के व्यवहार में बदलाव लाने के उद्देश्य से जिला परिवहन पदाधिकारी के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 26 फरवरी 2026 को राजकीयकृत मध्य विद्यालय, टोटो में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां बच्चों को सड़क सुरक्षा के महत्व से अवगत कराया गया।
- राजकीयकृत मध्य विद्यालय, टोटो में विशेष जागरूकता कार्यक्रम
- कक्षा 4 से 7 तक के बच्चों को दिखाई गई दुर्घटनाओं की वास्तविक वीडियो
- हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर जोर
- बच्चों ने माता-पिता को नियम पालन कराने की ली शपथ
- जिले के चौक-चौराहों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार हो रही घोषणा
हादसों के वीडियो देख सहम गए बच्चे
अभियान के तहत मोटरयान निरीक्षक (MVI) ने बच्चों को सीसीटीवी में कैद सड़क दुर्घटनाओं की वास्तविक फुटेज दिखाई। भयावह दृश्य देखकर बच्चे सिहर उठे। उन्हें समझाया गया कि सड़क पर महज एक सेकंड की लापरवाही किस तरह पूरे परिवार की खुशियां छीन सकती है।
तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि अधिकांश सड़क हादसों में मौत का मुख्य कारण सिर में गंभीर चोट होती है, जिसे मानक हेलमेट पहनकर काफी हद तक टाला जा सकता है।
“गार्जियन को बनना होगा रोल मॉडल”
कार्यक्रम के दौरान MVI ने अभिभावकों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि जब घर के बड़े स्वयं हेलमेट नहीं पहनते, तो बच्चों से नियम पालन की अपेक्षा करना व्यर्थ है। माता-पिता ही बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं। यदि वे खुद नियमों का पालन करेंगे, तो आने वाली पीढ़ी इसे संस्कार के रूप में अपनाएगी।
यह अभियान जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल के निर्देशानुसार चलाया जा रहा है।
बच्चों ने ली सुरक्षा की शपथ
कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं ने सामूहिक शपथ ली कि—
- वे अपने माता-पिता को बिना हेलमेट या सीट बेल्ट लगाए वाहन चलाने नहीं देंगे।
- तेज रफ्तार में वाहन चलाने पर तुरंत टोकेंगे।
- अपने आसपास के लोगों को धीमी गति और सुरक्षित यात्रा के लिए प्रेरित करेंगे।
बच्चों की इस प्रतिबद्धता ने अभियान को भावनात्मक और प्रभावशाली बना दिया।
पूरे जिले में गूंज रही है ‘सुरक्षा की आवाज’
डीटीओ ज्ञान शंकर जायसवाल ने बताया कि यह पहल केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। गुमला के प्रमुख चौक-चौराहों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम (लाउडस्पीकर) सक्रिय कर दिए गए हैं, जिनके माध्यम से लोगों को लगातार यातायात नियमों, हेलमेट की अनिवार्यता और तेज रफ्तार के खतरों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
न्यूज़ देखो विश्लेषण
प्रशासन की यह पहल इसलिए खास है क्योंकि इसमें बच्चों को बदलाव का वाहक बनाया गया है। जब बच्चे अपने माता-पिता को सुरक्षा का पाठ पढ़ाएंगे, तो इसका असर निश्चित रूप से गहरा होगा। सड़क सुरक्षा केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा का संकल्प है।
👉 आपकी राय क्या है?
क्या बच्चों के माध्यम से चलाया गया यह अभियान सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में कारगर साबित होगा? अपनी राय साझा करें और सुरक्षा का संदेश आगे बढ़ाएं।






