
#लावालौंग #चतरा #जमीनी_विवाद : कस्तूरबा स्कूल के समीप दो पक्षों में मारपीट, कई घायल।
चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र में रविवार को जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। कस्तूरबा स्कूल के समीप दो पक्षों के बीच हुई झड़प में लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। मामले में एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।
- कस्तूरबा स्कूल, लावालौंग के पास दो पक्षों में मारपीट।
- लगभग एक दर्जन लोग घायल, सभी को पीएचसी में भर्ती कराया गया।
- प्रथम पक्ष के हरि साव, ब्रह्मदेव साव, बैजनाथ साव, रामेश्वर शास्त्री शामिल।
- द्वितीय पक्ष के अशोक साव, बिरजू साव, प्रभु साव व परिजन मौजूद।
- पुलिस ने कहा – आवेदन मिलने पर होगी प्राथमिकी दर्ज।
लावालौंग थाना क्षेत्र के मुख्य चौक स्थित कस्तूरबा स्कूल के समीप रविवार को जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच जोरदार झड़प हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते लाठी-डंडे से मारपीट में बदल गई। इस घटना में दोनों पक्षों के लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए।
सूचना मिलते ही लावालौंग पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। घायल लोगों को तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लावालौंग में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
कैसे बढ़ा विवाद
स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद की जड़ जमीन से जुड़ा पुराना मामला है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रविवार को दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और बात मारपीट तक पहुंच गई।
प्रथम पक्ष की ओर से हरि साव, ब्रह्मदेव साव, बैजनाथ साव, रामेश्वर शास्त्री सहित अन्य लोग शामिल थे। वहीं द्वितीय पक्ष में अशोक साव, बिरजू साव, प्रभु साव और अशोक साव की मां सहित अन्य परिजन मौजूद थे।
प्रथम पक्ष का आरोप
घटना के संबंध में रामेश्वर शास्त्री ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
“अशोक साव एवं उसके परिजनों द्वारा मेरी जमीन और मकान पर पिछले तीन वर्षों से जबरन कब्जा कर ताला जड़ दिया गया है।”
उन्होंने आगे बताया:
“चार माह पूर्व मेरे घर को भी तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। हमने इस संबंध में लावालौंग थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी और पुलिस ने जांच भी की थी।”
रामेश्वर शास्त्री का आरोप है कि शिकायत के बाद से उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही थीं और अभद्र व्यवहार किया जा रहा था। उनका कहना है कि रविवार की घटना उसी विवाद की परिणति है।
पुलिस का बयान
इस मामले में जब लावालौंग थाना से संपर्क किया गया तो पुलिस ने बताया:
“दोनों पक्षों की ओर से अभी तक मारपीट के संबंध में कोई औपचारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन मिलने पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।”
पुलिस ने यह भी संकेत दिया कि प्राथमिकी दर्ज होने की संभावना है और मामला दर्ज होने के बाद ही विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी।
क्षेत्र में तनाव की स्थिति
घटना के बाद आसपास के इलाके में तनाव का माहौल देखा गया। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में रही। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पुराने भूमि विवादों का जल्द समाधान कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
न्यूज़ देखो: जमीन विवादों का बढ़ता तनाव, प्रशासन की भूमिका अहम
लावालौंग की यह घटना बताती है कि लंबित भूमि विवाद समय पर नहीं सुलझे तो वे हिंसक रूप ले सकते हैं। प्रशासन और स्थानीय राजस्व तंत्र की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों का शीघ्र और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जाए। समय पर हस्तक्षेप न होने से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है। अब देखना होगा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विवाद नहीं, संवाद बने समाधान का रास्ता
जमीनी विवाद केवल कानूनी मसला नहीं, सामाजिक शांति से भी जुड़ा होता है।
छोटी कहासुनी कब बड़ी घटना बन जाए, कहना मुश्किल है।
जरूरी है कि हम कानून पर भरोसा रखें और विवादों का समाधान न्यायिक प्रक्रिया से करें।
हिंसा से किसी का भला नहीं होता, बल्कि दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ता है।
आपकी क्या राय है – क्या भूमि विवादों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष पहल होनी चाहिए?
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