गढ़वा में सरस्वतिया नदी पुनरुद्धार को लेकर प्रशासन सक्रिय, एसडीएम ने अधिकारियों संग बनाई कार्ययोजना

गढ़वा में सरस्वतिया नदी पुनरुद्धार को लेकर प्रशासन सक्रिय, एसडीएम ने अधिकारियों संग बनाई कार्ययोजना

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #नदी_पुनरुद्धार : सरस्वतिया और तिलैया नदी को अतिक्रमण मुक्त करने की तैयारी तेज।

गढ़वा में सरस्वतिया नदी और तिलैया नदी के पुनरुद्धार को लेकर प्रशासन ने व्यापक पहल शुरू की है। उपायुक्त अनन्य मित्तल के निर्देश पर एसडीएम संजय कुमार ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर संरक्षण और सफाई अभियान की रणनीति तैयार की। नदी से अतिक्रमण हटाने, गाद सफाई और सामाजिक सहभागिता के जरिए जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी।

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  • एसडीएम संजय कुमार ने सरस्वतिया और तिलैया नदी पुनरुद्धार को लेकर बैठक की।
  • नदी किनारे हुए अतिक्रमण हटाने और सफाई अभियान की रणनीति बनाई गई।
  • नगर परिषद को अवैध कब्जा करने वालों की पहचान कर कार्रवाई का निर्देश।
  • जल संसाधन विभाग को गहरीकरण और गाद हटाने की योजना तैयार करने को कहा गया।
  • अभियान में सामाजिक संस्थाओं और निजी एजेंसियों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
  • बैठक के बाद एसडीएम ने सरस्वतिया नदी का स्थल निरीक्षण भी किया।

गढ़वा जिले में विलुप्तप्राय होती सरस्वतिया नदी और तिलैया नदी के पुनरुद्धार को लेकर प्रशासन अब गंभीर पहल करता नजर आ रहा है। उपायुक्त अनन्य मित्तल के निर्देश पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने शनिवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।

बैठक में गढ़वा अंचल, जल संसाधन विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा नगर परिषद के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सरस्वतिया एवं तिलैया नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और अतिक्रमण मुक्ति को लेकर समन्वित कार्ययोजना तैयार करना था।

नदी संरक्षण को लेकर हुई विस्तृत समीक्षा

बैठक के दौरान एसडीएम संजय कुमार ने नदी संरक्षण को लेकर पूर्व में किए गए प्रयासों की समीक्षा की और अधिकारियों से विस्तृत फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि नदियों का अस्तित्व बचाना पर्यावरण और शहर दोनों के भविष्य के लिए जरूरी है।

अधिकारियों के साथ नदी क्षेत्र में मौजूद समस्याओं, गाद जमाव, कचरे और अतिक्रमण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

एसडीएम संजय कुमार ने कहा: “सरस्वतिया नदी के पुनर्जीवन के लिए तैयार कार्ययोजना को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा।”

अतिक्रमण हटाने की बनी रणनीति

बैठक में नदी किनारों पर वर्षों से जमा कचरा, गाद और अवरोध हटाने के साथ-साथ स्थायी एवं अस्थायी अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर रणनीति तैयार की गई।

नगर परिषद को निर्देश दिया गया कि नदी क्षेत्र में जानबूझकर मिट्टी, पत्थर और भवन निर्माण सामग्री डालकर कब्जे की कोशिश करने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाए और इसकी रिपोर्ट अनुमंडल कार्यालय को भेजी जाए।

अंचल अधिकारी गढ़वा को पूर्व में नोटिस प्राप्त कर चुके अतिक्रमणकारियों को अंतिम नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। साथ ही अतिक्रमणकारियों की सूची भी अनुमंडल कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया।

गहरीकरण और सफाई अभियान पर जोर

जल संसाधन विभाग को निर्देशित किया गया कि नदी विभागीय संपत्ति होने के कारण उसके संरक्षण और विकास के लिए ठोस योजना तैयार की जाए।

बैठक में नदी के गहरीकरण, गाद हटाने और जल प्रवाह को सुचारू करने के लिए शीघ्र कार्य शुरू करने पर जोर दिया गया। प्रशासन का मानना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो नदी का अस्तित्व और अधिक संकट में पड़ सकता है।

नगर परिषद को कचरा प्रभावित क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाने और नियमित सफाई अभियान चलाने का निर्देश भी दिया गया।

सामाजिक संस्थाओं की भी होगी भागीदारी

एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरस्वतिया नदी पुनरुद्धार अभियान केवल प्रशासनिक कार्य नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इस अभियान में सामाजिक संगठनों, युवाओं और निजी एजेंसियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनसहयोग के बिना नदी संरक्षण अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है।

नदी के भूगोल पर भी हुई चर्चा

बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि सरस्वतिया नदी मेराल प्रखंड के गोंदा स्थित किशुन आहर से निकलकर लगभग 14 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए सोनपुरवा क्षेत्र में जाकर मिलती है।

अधिकारियों ने कहा कि इस नदी का ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व काफी बड़ा है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए दीर्घकालिक योजना जरूरी है।

युवाओं से भी मिले एसडीएम

बैठक समाप्त होने के बाद एसडीएम संजय कुमार ने सरस्वतिया नदी की सफाई की मांग कर रहे गढ़वा के युवाओं के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की।

इसके बाद उन्होंने शहरी क्षेत्र स्थित सरस्वतिया नदी का स्थल निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद समस्याओं को देखा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासनिक पहल से अब नदी पुनर्जीवन अभियान को नई गति मिलेगी।

न्यूज़ देखो: नदियों को बचाना सिर्फ प्रशासन नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी

सरस्वतिया जैसी नदियां केवल जल स्रोत नहीं बल्कि शहर की पहचान और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गढ़वा प्रशासन द्वारा शुरू की गई यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी होगी। यदि अतिक्रमण, गंदगी और अवैध कब्जों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों के सामने जल संकट और गंभीर हो सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जल स्रोत बचेंगे तभी सुरक्षित रहेगा भविष्य

नदियां किसी भी शहर और गांव की जीवनरेखा होती हैं। उन्हें बचाना केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।

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गढ़वा

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