बड़केतुंगा गांव में 10 साल बाद अष्टप्रहरी यज्ञ, 10 अप्रैल से तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन शुरू

बड़केतुंगा गांव में 10 साल बाद अष्टप्रहरी यज्ञ, 10 अप्रैल से तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन शुरू

author Shivnandan Baraik
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#सिमडेगा #धार्मिक_आयोजन : बड़केतुंगा में यज्ञ—कलश यात्रा से पूर्णाहुति तक कार्यक्रम तय।

सिमडेगा के बड़केतुंगा गांव में 10 वर्षों बाद अष्टप्रहरी यज्ञ का आयोजन 10 अप्रैल से शुरू होगा। तीन दिवसीय कार्यक्रम में कलश यात्रा, हरिकीर्तन और पूर्णाहुति शामिल है। कई गांवों की कीर्तन मंडलियां भाग लेंगी। आयोजन से क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है।

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  • 10 वर्षों बाद बड़केतुंगा में अष्टप्रहरी यज्ञ
  • 10 अप्रैल से तीन दिवसीय आयोजन शुरू
  • विभिन्न गांवों की कीर्तन मंडलियों की भागीदारी
  • केशव चंद्र पाणिग्रही मुख्य आचार्य होंगे।
  • आयोजन समिति द्वारा भव्य तैयारी

सिमडेगा जिले के बड़केतुंगा गांव में एक बार फिर धार्मिक आस्था और परंपरा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। करीब 10 वर्षों के अंतराल के बाद गांव में अष्टप्रहरी यज्ञ का आयोजन 10 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, जिसे लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

यह तीन दिवसीय आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है।

10 अप्रैल से होगा शुभारंभ

अष्टप्रहरी यज्ञ की शुरुआत 10 अप्रैल को प्रातः 7 बजे कलश यात्रा के साथ होगी। इस दिन गांव की महिलाओं और श्रद्धालुओं द्वारा कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिससे पूरे गांव में धार्मिक वातावरण का निर्माण होगा।

हरिकीर्तन और नामकरण

11 अप्रैल को प्रातः 7 बजे नामकरण के साथ हरिकीर्तन कार्यक्रम शुरू होगा। इस दौरान लगातार भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।

12 अप्रैल को पूर्णाहुति

तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन 12 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

कई गांवों की कीर्तन मंडलियां शामिल

इस यज्ञ में आसपास के कई गांवों की कीर्तन मंडलियां भाग लेंगी। इनमें बड़केतुंगा, रामजडी, उकौली, मरानी, लचरागढ़ चटकटोली, छोटका टोली, कारीमाटी और कुडरूम की मंडलियां प्रमुख हैं।

आचार्य और पुजारी की भूमिका

इस धार्मिक आयोजन में मुख्य आचार्य के रूप में श्री केशव चंद्र पाणिग्रही उपस्थित रहेंगे, जबकि आचार्य के रूप में श्री पवन शर्मा जिम्मेदारी निभाएंगे।

मुख्य पुजारी के रूप में श्री प्रदीप गोस्वामी के साथ श्री बाल गोविंद सिंह और उनकी धर्मपत्नी अनुष्ठान संपन्न कराएंगे।

जापक मंडली की सहभागिता

यज्ञ में जापक के रूप में अवधेश पाढ़ी, लिल्मोहन सिंह, शंकर होता, मनोज होता और रुपेश पांडा शामिल रहेंगे।

आयोजन समिति की जिम्मेदारी

यज्ञ को सफल बनाने के लिए समिति का गठन किया गया है, जिसमें—

अध्यक्ष कन्तु सिंह, उपाध्यक्ष प्रमोद पाणिग्रही और कुलदीप सिंह, सचिव केदारनाथ सिंह, कोषाध्यक्ष हरबंस सिंह, संरक्षक गणेश सिंह, जोधन सिंह, आनंद सिंह, राम कुमार सिंह, अर्जुन होता

के साथ अन्य सदस्य दशरथ सिंह, कमल सिंह, अशोक पंडा, भास्कर सिंह, कृष्ण सिंह, सुरेंद्र सिंह, दुखन सिंह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

धार्मिक महत्व और आस्था

सनातन परंपरा में यज्ञ का विशेष महत्व है। माना जाता है कि यज्ञ से आध्यात्मिक शांति मिलती है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

समिति के सचिव केदारनाथ सिंह ने कहा: “यह आयोजन गांव की एकता और आस्था का प्रतीक है।”

ग्रामीणों में उत्साह

इस आयोजन को लेकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।

न्यूज़ देखो: परंपरा और आस्था का संगम

बड़केतुंगा में आयोजित यह यज्ञ दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी परंपराओं और धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था से जुड़ें, समाज को जोड़ें

धार्मिक आयोजन हमें एकजुट करते हैं।
परंपराओं को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है।
आस्था से समाज में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
आइए, हम भी ऐसे आयोजनों में भाग लें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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