ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 20 मई को गढ़वा की सभी दवा दुकानें रहेंगी बंद… अध्यक्ष

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 20 मई को गढ़वा की सभी दवा दुकानें रहेंगी बंद… अध्यक्ष

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #दवादुकानबंद : ऑनलाइन दवा बिक्री और नकली दवाओं के विरोध में केमिस्ट एसोसिएशन ने बंद का ऐलान किया।

ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट तथा जेसीडीए के संयुक्त आह्वान पर 20 मई को गढ़वा जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहेंगी। गढ़वा केमिस्ट एसोसिएशन ने ऑनलाइन दवा बिक्री, नकली दवाओं और कॉर्पोरेट कंपनियों की भारी छूट नीति के विरोध में इस देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन दवा कारोबार से छोटे दुकानदारों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

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  • 20 मई को गढ़वा जिले की सभी दवा दुकानें बंद रखने का निर्णय।
  • ऑनलाइन दवा बिक्री और नकली दवाओं के खिलाफ हड़ताल।
  • कॉर्पोरेट कंपनियों के भारी डिस्काउंट का भी विरोध।
  • एसोसिएशन ने कहा — छोटे दुकानदार भुखमरी के कगार पर।
  • 15 मई से केमिस्ट काला बिल्ला लगाकर करेंगे विरोध प्रदर्शन।
  • बैठक में नंद किशोर श्रीवास्तव, मनीष कश्यप समेत कई लोग मौजूद रहे।

गढ़वा जिले में 20 मई को दवा दुकानों का पहिया पूरी तरह थम जाएगा। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) और जेसीडीए के संयुक्त निर्देशानुसार गढ़वा केमिस्ट एसोसिएशन ने जिले की सभी दवा दुकानों को बंद रखने का निर्णय लिया है। यह बंद ऑनलाइन दवा बिक्री, बाजार में बढ़ती नकली दवाओं और कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा भारी डिस्काउंट दिए जाने के विरोध में किया जा रहा है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि आम लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा और छोटे व्यवसायियों के अस्तित्व से जुड़ा मामला है।

ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ लामबंद हुए केमिस्ट

गढ़वा केमिस्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे और मध्यम वर्ग के दवा दुकानदारों को भारी नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रही हैं, जिससे स्थानीय दुकानदार आर्थिक संकट में आ गए हैं।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि दवा व्यवसाय में पहले से सीमित मार्जिन होता है। ऐसे में बड़े स्तर पर छूट देना छोटे दुकानदारों के लिए संभव नहीं है।

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा: “अगर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक नहीं लगी तो छोटे दुकानदार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।”

नकली दवाओं को लेकर भी जताई चिंता

बैठक में बाजार में बिक रही नकली दवाओं का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। एसोसिएशन का कहना है कि अत्यधिक छूट और अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री के कारण नकली दवाओं का कारोबार बढ़ रहा है, जो आम लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता है।

पदाधिकारियों ने कहा कि कई बार अत्यधिक डिस्काउंट के लालच में लोग ऐसी दवाएं खरीद लेते हैं जिनकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे मामलों में सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

“12 लाख से अधिक दुकानदारों का भविष्य खतरे में”

बैठक में कहा गया कि देशभर में लगभग 12 लाख 40 हजार दवा दुकानें पंजीकृत हैं, जिनसे लाखों परिवारों का रोजगार जुड़ा हुआ है। यदि ऑनलाइन और कॉर्पोरेट मॉडल इसी तरह बढ़ता रहा तो हजारों छोटे दुकानदारों की दुकानें बंद होने की स्थिति आ सकती हैं।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि दवा दुकानदारों को मिलने वाला लगभग 23 प्रतिशत मार्जिन ही स्टाफ वेतन, दुकान किराया और अन्य खर्चों में समाप्त हो जाता है। ऐसे में भारी छूट देकर कारोबार चलाना संभव नहीं है।

नशे की दवाओं के दुरुपयोग पर चिंता

बैठक के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कुछ लोग नशे से संबंधित दवाएं आसानी से मंगा रहे हैं, जिससे युवाओं में दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है।

एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम बनाए जाएं और बिना उचित निगरानी के दवा आपूर्ति पर रोक लगाई जाए।

15 मई से शुरू होगा विरोध प्रदर्शन

गढ़वा केमिस्ट एसोसिएशन ने बताया कि 15 मई से जिले के दवा दुकानदार काला बिल्ला लगाकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 20 मई को पूर्ण बंद रखा जाएगा।

इस दौरान जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहेंगी। हालांकि आपातकालीन स्थिति को लेकर क्या व्यवस्था रहेगी, इस पर अभी अलग से निर्णय लिया जाना बाकी है।

बैठक में कई पदाधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक में एसोसिएशन के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। इनमें:

  • नंद किशोर श्रीवास्तव — सचिव
  • मनीष कश्यप — कोषाध्यक्ष
  • मुरली प्रसाद गुप्ता
  • वीरेंद्र सिंह
  • संतोष गुप्ता
  • संतोष दुबे
  • जितेंद्र कुमार
  • अशोक गुप्ता

सहित अन्य लोग शामिल थे।

बैठक में सभी ने एकजुट होकर 20 मई की हड़ताल को सफल बनाने का निर्णय लिया।

न्यूज़ देखो: छोटे व्यवसाय बनाम कॉर्पोरेट मॉडल की बढ़ती लड़ाई

गढ़वा समेत पूरे देश में दवा दुकानदारों का यह आंदोलन केवल व्यापारिक विरोध नहीं, बल्कि बदलते बाजार ढांचे की बड़ी तस्वीर भी दिखाता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कॉर्पोरेट मॉडल जहां ग्राहकों को छूट का लाभ दे रहे हैं, वहीं छोटे दुकानदार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। साथ ही नकली दवाओं और अनियंत्रित बिक्री जैसे मुद्दे स्वास्थ्य सुरक्षा से भी सीधे जुड़े हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध और मांगों पर क्या रुख अपनाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक ग्राहक और सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों जरूरी

दवाएं केवल व्यापार नहीं बल्कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील विषय हैं। जरूरी है कि लोग दवा खरीदते समय गुणवत्ता, प्रमाणिकता और सुरक्षा का ध्यान रखें।

सरकार, दवा विक्रेता और आम नागरिक — सभी की साझा जिम्मेदारी है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए। छोटे व्यवसायों की सुरक्षा और मरीजों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाना समय की मांग है।

इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है? कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें। खबर को शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोग इस हड़ताल और उसके कारणों को समझ सकें।

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Written by

गढ़वा

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