
#गिरिडीह #भ्रष्टाचार_मामला : डीटीओ कार्यालय समेत कई विभागों में बिचौलियों के वर्चस्व पर उठे गंभीर सवाल।
गिरिडीह में डीटीओ कार्यालय सहित कई सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। माले नेता राजेश सिन्हा ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए भ्रष्टाचार और बिचौलियों के वर्चस्व का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनता को अपने काम के लिए तय शुल्क से अधिक पैसे देने पड़ रहे हैं। मामले में उपायुक्त से हस्तक्षेप कर सुधारात्मक कदम उठाने की अपील की गई है।
- राजेश सिन्हा ने डीटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।
- डीटीओ, ब्लॉक, मत्स्य, शिक्षा, रजिस्ट्री विभाग में बिचौलियों का आरोप।
- लाइसेंस बनाने में सरकारी फीस से दोगुना वसूली का दावा।
- उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
- आम जनता को रिश्वत देकर काम कराने की मजबूरी।
- उपायुक्त से सीधे हस्तक्षेप कर सुधार की अपील।
गिरिडीह में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। माले नेता एवं गिरिडीह नगर सचिव सह जिला कमिटी सदस्य राजेश सिन्हा ने डीटीओ कार्यालय समेत कई विभागों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और बिचौलिया तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता को अपने सामान्य कार्यों के लिए भी अतिरिक्त पैसे देने पड़ रहे हैं, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
डीटीओ कार्यालय पर सबसे ज्यादा आरोप
राजेश सिन्हा ने कहा कि गिरिडीह डीटीओ कार्यालय में नए लाइसेंस बनवाने के दौरान सरकारी शुल्क से कहीं अधिक राशि वसूली जा रही है। उनके अनुसार, बिचौलियों के माध्यम से काम कराने पर लोगों को दोगुना तक पैसा देना पड़ता है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “डीटीओ कार्यालय में जितना सरकारी रसीद कटता है, उससे दोगुना पैसा बिचौलिये वसूलते हैं और यह पैसा कई स्तरों पर बंटता है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि भारी वाहनों के लाइसेंस में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है, जिसकी विस्तृत जानकारी जांच समिति को दी जाएगी।
अन्य विभागों में भी बिचौलियों का दबदबा
उन्होंने आरोप लगाया कि केवल डीटीओ ही नहीं, बल्कि गिरिडीह ब्लॉक, मत्स्य विभाग, शिक्षा विभाग और रजिस्ट्री कार्यालय जैसे अन्य विभागों में भी बिचौलियों का वर्चस्व है। जहां आम जनता का अधिक आना-जाना होता है, वहां यह समस्या और गंभीर रूप ले चुकी है।
राजेश सिन्हा ने कहा कि कई अफसर अच्छे काम कर रहे हैं, लेकिन जिन विभागों में जनता का सीधा संपर्क होता है, वहां स्थिति चिंताजनक है।
उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग
माले नेता ने गिरिडीह उपायुक्त से इस पूरे मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर जांच होती है तो उसका प्रभाव सीमित रह सकता है, इसलिए उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “इस व्यवस्था को सुधारने के लिए उपायुक्त को खुद पहल करनी होगी और सभी विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि माले पार्टी इस संबंध में सभी लिखित साक्ष्य जांच समिति को सौंपेगी।
ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवहार पर भी सवाल
राजेश सिन्हा ने गिरिडीह की ट्रैफिक व्यवस्था को भी खराब बताते हुए कहा कि इसमें सुधार की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी अधिकारियों को सुझाव दिए गए थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा उन्होंने डीटीओ अधिकारियों के जांच अभियान की सराहना करते हुए उनके कथित अभद्र व्यवहार पर आपत्ति जताई और कहा कि बिना अपमानजनक भाषा के भी व्यवस्था सुधारी जा सकती है।
अवैध संचालन और नाबालिग चालक पर चिंता
उन्होंने यह भी कहा कि कई टोटो चालक बिना नियम-कानून के वाहन चला रहे हैं और 18 वर्ष से कम उम्र के चालक भी सड़कों पर नजर आते हैं। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत बताई गई।
जनता से सवाल पूछने की अपील
राजेश सिन्हा ने जनता से अपील की कि वे अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से सवाल करें और जवाबदेही तय करें। उन्होंने कहा कि यदि लोग अपनी आवाज उठाने में डरते हैं तो वे संगठन से जुड़कर अपनी बात मजबूती से रख सकते हैं।
न्यूज़ देखो: व्यवस्था सुधार की मांग या राजनीतिक दबाव?
गिरिडीह में उठे ये आरोप प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। यदि वाकई बिचौलियों का इतना वर्चस्व है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। प्रशासन के लिए यह एक मौका है कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक नागरिक बनें, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं
भ्रष्टाचार केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करता है। जब आम लोग चुप रहते हैं, तब यह और बढ़ता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और गलत के खिलाफ आवाज उठाएं।
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