#बरवाडीह #चेकडैम_विवाद : निरीक्षण में निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप लगा।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड स्थित चपरी गांव के पास बोदे चेक डैम के जीर्णोद्धार और नाली निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर जनप्रतिनिधियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया, जहां पुराने पत्थरों और कमजोर निर्माण सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया गया। निरीक्षण के बाद जनप्रतिनिधियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
- चपरी गांव के समीप बोदे चेक डैम निर्माण में गड़बड़ी का आरोप।
- निरीक्षण में पुराने और कमजोर पत्थरों के इस्तेमाल की बात सामने आई।
- नाली निर्माण में मिट्टी पर गिट्टी और ऊपर मसाला डालने का आरोप।
- भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद, सांसद प्रतिनिधि दीपक राज और उप मुखिया राणा प्रताप सिंह ने किया निरीक्षण।
- कार्यस्थल पर नहीं मिला कोई विभागीय बोर्ड या योजना संबंधी जानकारी।
- जांच नहीं होने पर आंदोलन और काम बंद कराने की चेतावनी।
बरवाडीह प्रखंड की छेचा पंचायत अंतर्गत चपरी गांव के समीप बोदे चेक डैम के जीर्णोद्धार और नाली निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और गुणवत्ता की अनदेखी का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद, सांसद प्रतिनिधि दीपक राज और उप मुखिया राणा प्रताप सिंह निर्माण स्थल पहुंचे और कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थितियों ने ग्रामीणों के आरोपों को और मजबूत कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों की योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता की अनदेखी कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में निर्माण कार्य पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है।
पुराने और कमजोर पत्थरों के उपयोग का आरोप
निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने पाया कि चेक डैम के जीर्णोद्धार कार्य में पुराने और कमजोर पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि डैम के गेट निर्माण में भी जर्जर और मृत पत्थरों को दोबारा लगाया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कमजोर सामग्री का उपयोग जारी रहा तो बरसात के मौसम में डैम को नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने कहा: “जनता के पैसे से हो रहे निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
नाली निर्माण में भी लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने नाली निर्माण में भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। निरीक्षण के दौरान देखा गया कि नाली निर्माण के लिए पहले मिट्टी डाली जा रही है, उसके ऊपर केवल एक इंच गिट्टी बिछाकर मसाला चढ़ाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण तकनीकी मानकों के पूरी तरह विपरीत है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि पहली ही बारिश में नाली टूट सकती है या मिट्टी से भर सकती है, जिससे पूरा निर्माण कार्य बेकार साबित होगा।
जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि नाली की ऊंचाई बेहद कम रखी गई है, जिससे जल निकासी की समस्या बनी रहेगी। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य को जल्दबाजी में पूरा कर सरकारी राशि की बंदरबांट की जा रही है।
कार्यस्थल पर नहीं मिला योजना बोर्ड
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि निर्माण स्थल पर किसी भी प्रकार का विभागीय बोर्ड नहीं लगाया गया था। योजना की लागत, कार्य एजेंसी, संवेदक और विभाग की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
ग्रामीणों ने कहा कि बिना शिलान्यास और बिना सूचना बोर्ड के कार्य शुरू करना पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। लोगों का आरोप है कि जानकारी छुपाकर मनमाने तरीके से निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने कहा: “यदि जल्द जांच नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ मिलकर निर्माण कार्य बंद कराया जाएगा।”
निरीक्षण के दौरान नहीं मिला कोई अधिकारी
ग्रामीणों ने बताया कि जब जनप्रतिनिधि निरीक्षण के लिए पहुंचे, उस समय मौके पर न तो कोई विभागीय अधिकारी मौजूद था और न ही संवेदक या मुंशी दिखाई दिया। इससे लोगों में और नाराजगी बढ़ गई।
उप मुखिया राणा प्रताप सिंह ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से हो रहे निर्माण कार्य में इस प्रकार की लापरवाही गंभीर मामला है। उन्होंने संबंधित विभाग से तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
उप मुखिया राणा प्रताप सिंह ने कहा: “गांव के विकास के नाम पर घटिया निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता की मेहनत की कमाई का सही उपयोग होना चाहिए।”
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि चेक डैम और नाली निर्माण गांव के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। यदि निर्माण सही तरीके से नहीं हुआ तो बरसात के दौरान जल संरक्षण और जल निकासी दोनों प्रभावित होंगे।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बाद ही आगे काम कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

न्यूज़ देखो: विकास योजनाओं में पारदर्शिता सबसे जरूरी
चपरी बोदे चेक डैम विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि ग्रामीण विकास योजनाओं में गुणवत्ता की निगरानी कितनी गंभीरता से की जा रही है। जल संरक्षण और सिंचाई से जुड़ी योजनाएं गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन यदि निर्माण में लापरवाही बरती जाए तो सरकारी धन और जनता दोनों का नुकसान होता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे। जनता के भरोसे और विकास योजनाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक ग्रामीण ही मजबूत विकास की पहचान
गांवों का विकास तभी संभव है जब जनता जागरूक होकर योजनाओं की निगरानी करे और गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाए। सरकारी योजनाएं जनता की सुविधा और भविष्य के लिए बनाई जाती हैं, इसलिए उनकी गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
यदि आपके क्षेत्र में भी किसी योजना में अनियमितता दिखाई दे रही है तो जिम्मेदारी के साथ अपनी आवाज उठाएं। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हर नागरिक का अधिकार है। अपनी राय कमेंट करें, खबर को ज्यादा से ज्यादा साझा करें और जनहित से जुड़े मुद्दों को आवाज दें।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).