News dekho specials
Palamau

दीदी बाड़ी योजना के नाम पर अनियमितता का आरोप, पाण्डु में महिलाएं पीछे और ठेकेदार आगे

#पाण्डु #दीदीबाड़ी_योजना : मनरेगा संकट के बीच योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई दीदी बाड़ी योजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि योजना का लाभ अब महिलाओं के बजाय ठेकेदार उठा रहे हैं। मनरेगा कार्यों में कमी के चलते ठेकेदारों के इस योजना में दखल की बात कही जा रही है। यह स्थिति योजना के मूल उद्देश्य और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • पाण्डु प्रखंड में दीदी बाड़ी योजना के क्रियान्वयन पर सवाल।
  • महिलाओं की जगह ठेकेदारों के काम करने के आरोप।
  • मनरेगा कार्य कम होने से बदली जमीनी हकीकत।
  • योजना का उद्देश्य महिला आत्मनिर्भरता से भटकने का दावा।
  • स्थानीय स्तर पर निगरानी की मांग तेज।

दीदी बाड़ी योजना को राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस योजना के तहत महिलाओं को सब्जी उत्पादन, बागवानी और कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड में योजना की जमीनी तस्वीर इससे अलग नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में मनरेगा के कार्यों में भारी कमी आई है। इसका सीधा असर मजदूरों और ठेकेदारों दोनों पर पड़ा है। ऐसे में आरोप है कि मनरेगा से जुड़े कुछ ठेकेदार अब दीदी बाड़ी योजना के कार्यों में दखल दे रहे हैं और महिलाओं की जगह स्वयं काम कर रहे हैं या उन्हें केवल नाम मात्र के लिए आगे रखा जा रहा है।

दीदी बाड़ी योजना का मूल उद्देश्य

दीदी बाड़ी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत महिलाओं को अपने घर या आसपास की जमीन पर बाड़ी विकसित कर सब्जी और फल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। योजना से महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित करने की परिकल्पना की गई है।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यह योजना महिलाओं के समूहों और व्यक्तिगत लाभार्थियों के माध्यम से संचालित की जानी है, ताकि महिलाओं को सीधे लाभ मिल सके और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।

मनरेगा कार्यों में कमी से बदली स्थिति

पाण्डु प्रखंड में पिछले कुछ समय से मनरेगा के तहत चलने वाले कार्यों की संख्या में कमी आई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां बड़ी संख्या में मजदूरों को काम मिलता था, अब वही काम सीमित हो गया है। इस स्थिति में मनरेगा से जुड़े ठेकेदारों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

इसी पृष्ठभूमि में आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ ठेकेदार दीदी बाड़ी योजना के कार्यों में सक्रिय हो गए हैं। महिलाओं के नाम पर स्वीकृत योजनाओं में वास्तविक काम ठेकेदारों द्वारा कराए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

महिलाओं की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय महिला समूहों से जुड़ी कुछ महिलाओं का कहना है कि योजना का लाभ उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में महिलाओं को केवल कागजों में लाभार्थी दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक कार्य और संसाधनों पर नियंत्रण दूसरे लोगों का है। इससे महिलाओं की आत्मनिर्भरता का उद्देश्य कमजोर पड़ता दिख रहा है।

News dekho specials

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो दीदी बाड़ी योजना भी अन्य योजनाओं की तरह अपने लक्ष्य से भटक सकती है।

निगरानी और पारदर्शिता की मांग

पाण्डु प्रखंड में सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों द्वारा दीदी बाड़ी योजना की निष्पक्ष जांच और सख्त निगरानी की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि योजना वास्तव में महिलाओं के लिए है, तो इसका संचालन भी पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होना चाहिए।

स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि मनरेगा कार्यों को पुनः गति दी जाए, ताकि मजदूरों और ठेकेदारों को अलग-अलग योजनाओं में अनुचित दखल देने की स्थिति न बने।

न्यूज़ देखो: योजना के उद्देश्य बनाम जमीनी हकीकत

पाण्डु प्रखंड की यह स्थिति बताती है कि अच्छी मंशा से शुरू की गई योजनाएं भी कमजोर निगरानी के कारण अपने लक्ष्य से भटक सकती हैं। दीदी बाड़ी योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है, लेकिन यदि महिलाओं की जगह अन्य लोग इसका लाभ लेने लगें, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह जमीनी स्तर पर सच्चाई की जांच करे और योजना को सही दिशा में ले जाए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

महिलाओं की आत्मनिर्भरता बचाने की जरूरत

महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि उनके सही क्रियान्वयन से संभव है। यदि महिलाएं स्वयं निर्णय और कार्य में शामिल होंगी, तभी दीदी बाड़ी जैसी योजनाएं सफल होंगी। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि योजनाओं का लाभ सही हाथों तक पहुंचे।

आपके क्षेत्र में दीदी बाड़ी या अन्य योजनाओं की स्थिति कैसी है? अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

Related News

Back to top button
🔔

Notification Preferences

error: