#पलामूसमाचार #बालूमाफिया : तोलरा अंडरपास निर्माण में अवैध बालू उठाव को लेकर ग्रामीणों का आरोप।
पलामू जिले के बिश्रामपुर प्रखंड स्थित तोलरा अंडरपास निर्माण कार्य में अवैध बालू उपयोग का आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि कोयल नदी से रात के समय बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है। मामले में करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान और प्रशासनिक निष्क्रियता के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- तोलरा अंडरपास निर्माण में अवैध बालू उपयोग का ग्रामीणों ने लगाया आरोप।
- ग्रामीणों के अनुसार कोयल नदी से अब तक लगभग 300 ट्रिप बालू उठाया गया।
- रात में अवैध बालू उठाव और प्रशासनिक मिलीभगत के लगाए गए आरोप।
- औरंगाबाद सोन घाट का चालान दिखाकर बालू परिवहन करने की बात सामने आई।
- ग्रामीणों ने मामले में करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग तेज हुई।
पलामू जिले के बिश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत तोलरा फाटक के समीप रेलवे अंडरपास निर्माण कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूर्व मध्य रेलवे के तहत बन रहे अंडरपास निर्माण में अवैध तरीके से बालू का उपयोग किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि तोलरा कोयल नदी से रात के समय बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव कर निर्माण स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार यह कार्य लंबे समय से जारी है और अब तक लगभग 300 ट्रिप बालू का अवैध उठाव किया जा चुका है। मामले को लेकर गांव में लगातार चर्चा बनी हुई है और लोग प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अंडरपास निर्माण स्थल पर उठे सवाल
तोलरा फाटक के नजदीक पोल संख्या 312/400 के पास रेलवे अंडरपास का निर्माण कार्य कई वर्षों से चल रहा है। इसी निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे बालू को लेकर विवाद शुरू हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त बालू स्थानीय कोयल नदी से अवैध रूप से निकाला जा रहा है। उनका कहना है कि रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के माध्यम से बालू पहुंचाया जाता है ताकि किसी को जानकारी न हो सके।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी स्थानीय लोग इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें समझा-बुझाकर या आर्थिक लालच देकर शांत करा दिया जाता है।
एक ग्रामीण ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया:
“यदि औरंगाबाद सोन घाट से बालू लाने का दावा किया जा रहा है तो रास्ते के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए, सब सच सामने आ जाएगा।”
ग्रामीणों का कहना है कि कोयल नदी से रात में बालू गिराया जाता है और इसमें कई लोगों की मिलीभगत होने की आशंका है।
औरंगाबाद सोन घाट के चालान पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि निर्माण कार्य से जुड़े लोग औरंगाबाद सोन घाट का चालान दिखाकर बालू उपयोग को वैध बताने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी से बालू लाना आर्थिक रूप से संभव नहीं लगता।
एक ग्रामीण ने कहा कि तोलरा से औरंगाबाद की दूरी लगभग 135 किलोमीटर एक तरफ है। ऐसे में एक ट्रिप बालू लाने में लगभग 30 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि 300 ट्रिप से अधिक बालू लाया गया है, तो इतनी बड़ी लागत का हिसाब क्या है।
राजस्व चोरी का आरोप
ग्रामीणों ने दावा किया कि अब तक लगभग 50 लाख रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हो चुका है। कुछ लोगों का कहना है कि यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच सकता है क्योंकि बड़ी मात्रा में बालू का उपयोग किया गया है।
उन्होंने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मामले में अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
मुंशी और संवेदक पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य से जुड़े मुंशी रियाज खान संवेदक का नंबर सार्वजनिक नहीं करते और स्वयं बालू प्रबंधन का काम देखते हैं।
मीडिया द्वारा संपर्क करने पर रियाज खान ने औरंगाबाद सोन नदी से बालू लाने की बात कही और एक वाउचर भी प्रस्तुत किया। हालांकि ग्रामीण इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज, वाहन मूवमेंट और बालू परिवहन दस्तावेजों की जांच कराई जाए।
लोगों का यह भी कहना है कि यदि अवैध उत्खनन साबित होता है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि सरकारी राजस्व की चोरी रोकी जा सके।
न्यूज़ देखो: विकास कार्यों के बीच संसाधनों की पारदर्शिता सबसे जरूरी
यह मामला केवल बालू चोरी का आरोप नहीं बल्कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी बड़ा सवाल है। यदि निर्माण कार्यों में अवैध संसाधनों का उपयोग होता है तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है और व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
ग्रामीणों द्वारा लगातार सवाल उठाए जाने के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासनिक गंभीरता पर भी प्रश्न खड़े करता है। अब जरूरत निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और जिम्मेदार विकास की जरूरत
नदी, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। यदि अवैध उत्खनन और राजस्व चोरी जैसी घटनाओं को समय रहते नहीं रोका गया तो इसका असर समाज और पर्यावरण दोनों पर पड़ेगा।
जरूरी है कि विकास कार्य नियम और पारदर्शिता के साथ हों ताकि जनता का भरोसा बना रहे। स्थानीय लोगों की जागरूकता और सक्रियता भी ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण है।
सजग रहें, सवाल पूछें और अपने क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाएं। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जिम्मेदार नागरिक बनने की भूमिका निभाएं।

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