#बानो #अंबेडकर_जयंती : एलिस संस्थान में आयोजन—बाबा साहेब के विचारों से छात्रों को किया प्रेरित।
सिमडेगा के बानो स्थित एलिस शैक्षणिक संस्थान में अंबेडकर जयंती मनाई गई। निदेशक बिमल कुमार ने छात्रों को बाबा साहेब के विचारों से अवगत कराया। कार्यक्रम में शिक्षा और समानता के महत्व पर जोर दिया गया। शिक्षक और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- एलिस संस्थान में अंबेडकर जयंती का आयोजन।
- बिमल कुमार ने छात्रों को किया संबोधित।
- शिक्षा और समानता पर दिया गया जोर।
- बाबा साहेब के विचारों से प्रेरित किया गया।
- शिक्षक और छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में शामिल।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड के चर्च रोड स्थित एलिस शैक्षणिक संस्थान में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को बाबा साहेब के जीवन, उनके संघर्ष और उनके विचारों से अवगत कराना था।
निदेशक बिमल कुमार का संबोधन
संस्थान के निदेशक बिमल कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए अंबेडकर जयंती के महत्व पर प्रकाश डाला।
बिमल कुमार ने कहा: “डॉ. भीमराव अंबेडकर समानता और सामाजिक न्याय के सशक्त समर्थक थे।”
उन्होंने छात्रों को बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
शिक्षा पर विशेष जोर
कार्यक्रम में बाबा साहेब के शिक्षा संबंधी विचारों को विशेष रूप से साझा किया गया।
बिमल कुमार ने कहा: “खुद को शिक्षित करो, क्योंकि शिक्षा ही प्रगति की रीढ़ है।”
उन्होंने कहा: “बाबा साहेब का मानना था कि शिक्षा ही सशक्तिकरण की असली कुंजी है।”
प्रेरणादायक विचारों का साझा
कार्यक्रम के दौरान बाबा साहेब के प्रसिद्ध विचारों को भी विद्यार्थियों के साथ साझा किया गया—
“मैं मूर्तियों में नहीं, किताबों में हूं। मुझे पूजने की नहीं, पढ़ने की जरूरत है।”
इन विचारों ने छात्रों को शिक्षा और ज्ञान के महत्व के प्रति जागरूक किया।
शिक्षक-छात्रों की भागीदारी
इस अवसर पर संस्थान के शिक्षक और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में दीपिका कुमारी (उपसचिव), सुष्मिता सिंह (काउंसलर), सुजाता कुमारी, अनिता कुमारी, अनुपा, वाणी कुमारी, प्रमिला कुमारी सहित अन्य स्टाफ और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
छात्रों में उत्साह
कार्यक्रम के दौरान छात्रों में उत्साह और जागरूकता देखने को मिली, जिससे यह आयोजन सफल रहा।
शिक्षा और संस्कार का संगम
यह आयोजन शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को समझाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।
न्यूज़ देखो: शिक्षा से ही सशक्त समाज
बानो का यह आयोजन दिखाता है कि यदि बच्चों को शुरू से ही सही दिशा दी जाए, तो वे समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बाबा साहेब के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा को बनाएं अपनी ताकत
ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है।
शिक्षा से ही समाज में बदलाव आता है।
बाबा साहेब के विचारों को अपनाएं।
आइए, हम शिक्षा को प्राथमिकता दें।
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