जयरागी में सरहुल महोत्सव की धूम, पारंपरिक नृत्य और शोभायात्रा ने जीता दिल

जयरागी में सरहुल महोत्सव की धूम, पारंपरिक नृत्य और शोभायात्रा ने जीता दिल

author Aditya Kumar
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डुमरी में धूमधाम से मनाया गया पंचायत स्तरीय सरहुल महोत्सव, पारंपरिक नृत्य और शोभायात्रा ने बांधा समडुमरी (गुमला) | #Sarhul2026 #AdivasiCulture #JharkhandFestival


डुमरी प्रखंड के जयरागी बाजारटांड़ में पंचायत सरहुल पूजा समिति द्वारा मंगलवार को सरहुल महोत्सव पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक उत्साह के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस दौरान प्रकृति पूजा, भव्य शोभायात्रा और सामूहिक नृत्य ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया।

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मुख्य बातें:

  • 27 खोड़हा की सक्रिय भागीदारी, पूरे क्षेत्र में उत्साह
  • सरना स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना
  • पारंपरिक वेशभूषा में भव्य शोभायात्रा
  • मांदर, नगाड़ा और ढोल की थाप पर झूमे लोग
  • नृत्य मंडलियों ने दी आकर्षक प्रस्तुति

📖 पूजा-अर्चना से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत जयरागी स्थित सरहुल सरना स्थल पर हुई, जहां मुख्य बैगा संतोष मुंडा ने अपने सहयोगियों गुलाब मुंडा, सुरजू मुंडा, मनोज मुंडा, बिछवा मुंडा और सुखू मुंडा के साथ पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान प्रकृति, जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई।

भव्य शोभायात्रा ने बढ़ाया उत्साह
पूजा के बाद सरना स्थल से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजे हुए मांदर, नगाड़ा और ढोल की थाप पर नाचते-गाते हुए विभिन्न मार्गों से गुजरते रहे। युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी उत्साहपूर्वक शामिल हुए।सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
बाजारटांड़ पहुंचने के बाद सामूहिक नृत्य का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न नृत्य मंडलियों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। झारखंडी लोकनृत्य की लय और ताल ने पूरे माहौल को जीवंत बना दियासम्मान और पुरस्कार वितरण
कार्यक्रम के दौरान समाज के अग्रणी लोगों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी नृत्य मंडलियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए गएउपस्थित गणमान्य लोग
इस अवसर पर पंचायत की मुखिया रेखा मिंज, उपप्रमुख हबील टोप्पो, कामिल भगत, बिक्रम भगत, रामसाय भगत, संजय साहू, प्रदीप साहू सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

न्यूज़ देखो विश्लेषण:
सरहुल महोत्सव सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, प्रकृति प्रेम और सामूहिक एकता का प्रतीक है। इस तरह के आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराते हैं।

आप भी अपनी संस्कृति पर गर्व करें और ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें — यही हमारी पहचान है!

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Written by

डुमरी, गुमला

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