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मकर संक्रांति पर सेवा की मिसाल, चंदवा में 51 जरूरतमंद बच्चों को मिले गर्म वस्त्र और खुशियां

#चंदवा #मकर_संक्रांति : पर्व के अवसर पर जरूरतमंद बच्चों के बीच वस्त्र और सामग्री का वितरण।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सामाजिक सरोकार की एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। प्रियमसन फाउंडेशन और रामानंद साहू चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त प्रयास से जरूरतमंद बच्चों और ग्रामीणों के बीच सहायता सामग्री का वितरण किया गया। इस दौरान 51 बच्चों को गर्म वस्त्र और चॉकलेट देकर ठंड से राहत और पर्व की खुशियां साझा की गईं। आयोजन ने समाज में सेवा, समरसता और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

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  • 15 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजन।
  • नगर मंदिर अलौदिया, सेरक पंचायत और किता गांव में वितरण कार्यक्रम।
  • 51 जरूरतमंद बच्चों को गर्म वस्त्र व चॉकलेट प्रदान।
  • प्रियमसन फाउंडेशन और रामानंद साहू चैरिटेबल ट्रस्ट का संयुक्त आयोजन।
  • चूड़ा, गुड़ और तिलकुट का भी वितरण किया गया।

मकर संक्रांति के अवसर पर चंदवा प्रखंड में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक एकजुटता और सेवा भावना का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। पर्व की परंपरा को निभाते हुए जरूरतमंदों के साथ खुशियां साझा करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों के चेहरे पर मुस्कान और ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम का आयोजन नगर मंदिर अलौदिया, सेरक पंचायत और इसके अंतर्गत आने वाले किता गांव में किया गया। इस दौरान पारंपरिक रूप से मकर संक्रांति पर उपयोग होने वाले चूड़ा, गुड़ और तिलकुट का वितरण किया गया, वहीं किता गांव के 51 जरूरतमंद बच्चों को विशेष रूप से गर्म वस्त्र और चॉकलेट देकर ठंड के मौसम में राहत प्रदान की गई।

सेवा और समरसता का पर्व

मौके पर उपस्थित समाजसेवी राजकुमार पाठक ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सेवा भावना को मजबूत करने का अवसर भी है।

राजकुमार पाठक ने कहा: “मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा भावना को सुदृढ़ करने का अवसर है। समाज के वंचित बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही ऐसे कार्यक्रमों का वास्तविक उद्देश्य है।”

उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी वर्ग एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं, तभी सामाजिक संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

प्रियमसन फाउंडेशन की सोच और उद्देश्य

इस अवसर पर प्रियमसन फाउंडेशन के डायरेक्टर प्रिंस कुमार ने संस्था के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि फाउंडेशन निरंतर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

प्रिंस कुमार ने कहा: “हमारा उद्देश्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहयोग के माध्यम से ही समाज को सशक्त बनाया जा सकता है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में फाउंडेशन द्वारा इसी तरह के और भी सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जरूरतमंद बच्चों और परिवारों तक सहायता पहुंचाई जा सके।

बच्चों के लिए राहत और खुशी

ठंड के मौसम में गर्म वस्त्र पाकर बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। कई अभिभावकों ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की पहल से न केवल बच्चों को राहत मिलती है, बल्कि उनमें सामाजिक अपनापन और विश्वास भी बढ़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि पर्व के दिन इस प्रकार की सामूहिक गतिविधियां समाज को जोड़ने का काम करती हैं और बच्चों में भी पर्वों के वास्तविक अर्थ को समझने की भावना विकसित करती हैं।

कार्यक्रम में रही व्यापक सहभागिता

इस सेवा कार्यक्रम में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग सक्रिय रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमोद साहू, सतीश प्रसाद, राजू पाठक, सौरभ साहू, आदर्श रविराज, प्रदीप ठाकुर, धीरज कुमार सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया। सभी ने मिलकर बच्चों और ग्रामीणों के बीच सामग्री का वितरण किया और आयोजन को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया।

उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि ऐसे आयोजन समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और अन्य संगठनों को भी इस दिशा में आगे आना चाहिए।

परंपरा और आधुनिक सामाजिक जिम्मेदारी का संगम

मकर संक्रांति को परंपरागत रूप से दान-पुण्य और सामाजिक मेल-जोल का पर्व माना जाता है। चंदवा में आयोजित यह कार्यक्रम इसी परंपरा का आधुनिक रूप बनकर सामने आया, जहां धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी निर्वहन किया गया।

आयोजकों का मानना है कि जब पर्वों को सेवा और सहयोग से जोड़ा जाता है, तब उनका महत्व और बढ़ जाता है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

न्यूज़ देखो: सेवा से मजबूत होता समाज

चंदवा में मकर संक्रांति पर आयोजित यह कार्यक्रम बताता है कि स्थानीय स्तर पर की गई छोटी पहल भी बड़े सामाजिक बदलाव का आधार बन सकती है। जरूरतमंद बच्चों तक सहायता पहुंचाकर आयोजकों ने मानवीय मूल्यों को मजबूती दी है। ऐसे प्रयास समाज में भरोसा और एकता को बढ़ाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सेवा से ही पर्वों का सच्चा अर्थ

पर्व तभी सार्थक होते हैं जब खुशियां सभी तक पहुंचें।
जरूरतमंद बच्चों के साथ बांटी गई खुशियां समाज को जोड़ती हैं।
ऐसी पहलें दूसरों को भी आगे आने की प्रेरणा देती हैं।
आप भी अपने आसपास जरूरतमंदों की मदद करें।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट में साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और सेवा की भावना को फैलाएं।

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Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

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