सोन पाइपलाइन योजना में कररबार और हरही डैम नहीं शामिल होने पर नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी

सोन पाइपलाइन योजना में कररबार और हरही डैम नहीं शामिल होने पर नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी

author Yashwant Kumar
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#हुसैनाबाद #सिंचाई_विवाद : डीपीआर से डैम बाहर—किसानों ने फैसले पर जताया विरोध।

पलामू के हुसैनाबाद क्षेत्र में सोन पाइपलाइन सिंचाई योजना से कररबार और हरही डैम को बाहर रखने पर विरोध बढ़ गया है। पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी मिथलेश सिंह ने इसे किसान विरोधी बताया है। उन्होंने सरकार से दोनों डैम को शामिल करने की मांग की है। समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

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  • कररबार और हरही डैम को डीपीआर से बाहर रखने पर विरोध
  • मिथलेश सिंह ने फैसले को बताया किसान विरोधी।
  • करीब 90 गांव और 5000 एकड़ भूमि प्रभावित
  • योजना में शामिल करने की सरकार से मांग
  • समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

पलामू जिले के हुसैनाबाद क्षेत्र में सोन पाइपलाइन सिंचाई योजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। योजना के डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में ऊपरी कररबार डैम और हरही सिंचाई डैम को शामिल नहीं किए जाने से किसानों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई है। इस मुद्दे पर पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी मिथलेश सिंह ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे क्षेत्र के किसानों के साथ अन्याय बताया है।

उन्होंने कहा कि इन दोनों जलस्रोतों को योजना से बाहर रखना किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है।

किसान विरोधी निर्णय का आरोप

मिथलेश सिंह ने कहा—

“प्रारंभिक स्तर पर इन डैमों को योजना में शामिल करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अंतिम डीपीआर में इन्हें हटाकर किसानों को गुमराह किया गया है।”

उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से किसान विरोधी निर्णय करार दिया।

90 गांव और हजारों एकड़ जमीन प्रभावित

मिथलेश सिंह के अनुसार, ऊपरी कररबार और हरही डैम के माध्यम से वर्षा ऋतु में करीब 90 गांवों की लगभग 5000 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है।

उन्होंने कहा: “सालभर पानी नहीं रहने के कारण रबी फसल की सिंचाई नहीं हो पाती।”

किसानों की उम्मीदों को लगा झटका

किसानों को उम्मीद थी कि सोन पाइपलाइन योजना के तहत इन डैमों में लिफ्ट के माध्यम से पानी भरकर सालभर सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी।

मिथलेश सिंह ने कहा: “इस योजना से स्थायी सिंचाई की उम्मीद थी, लेकिन अब यह अधूरी रह गई है।”

सरकार से की गई मांग

मिथलेश सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और संबंधित विभाग से मांग की—

“ऊपरी कररबार और हरही डैम को योजना में शामिल कर जल संचय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।”

आंदोलन की चेतावनी

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा—

“यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो किसानों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।”

योजना का व्यापक दायरा

गौरतलब है कि सूखा प्रभावित पलामू क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 456.63 करोड़ रुपये की लागत से सोन पाइपलाइन सिंचाई योजना चलाई जा रही है।

इस योजना का शिलान्यास 10 फरवरी 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन द्वारा किया गया था।

कई जलाशयों को जोड़ने की योजना

इस योजना के तहत कोयल, सोन और ओरंगा नदियों से पानी उठाकर विभिन्न जलाशयों में संग्रहित किया जाना है।

इनमें रानीताल, तेमरैन, बुटनडूबा, मलय, पोस्तिया, पनघटवा, कचरावटांड, कुंडलवा, हदहदवा, बतरे, धनकई, ताली, सुखनदिया और करमा कलां जैसे जलाशय शामिल हैं।

96 गांवों को मिलेगा लाभ

योजना के पूर्ण होने पर मेदिनीनगर, चैनपुर, सतबरवा, विश्रामपुर, छत्तरपुर, हुसैनाबाद, हैदरनगर और मोहम्मदगंज प्रखंड के 96 गांवों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

किसानों की आय बढ़ने की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के सफल होने पर कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा।

न्यूज़ देखो: अधूरी योजना, अधूरी उम्मीदें

यह मामला दिखाता है कि योजनाओं में क्षेत्रीय जरूरतों को नजरअंदाज करना किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। क्या सरकार इस मांग पर पुनर्विचार करेगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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Written by

हुसैनाबाद, पलामू

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