चंदवा के तिलैयाटांड़ मदरसा में सालाना तालीमी मुजाहिरा और जलसा ए इस्लाह ए मोआशरा संपन्न, दीन और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर जोर

चंदवा के तिलैयाटांड़ मदरसा में सालाना तालीमी मुजाहिरा और जलसा ए इस्लाह ए मोआशरा संपन्न, दीन और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर जोर

author Ravikant Kumar Thakur
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#चंदवा #लातेहार #तालीमी_मुजाहिरा : मदरसा खैरुल उलूम में गरिमामय जलसा संपन्न हुआ।

लातेहार जिले के चंदवा पूर्वी पंचायत स्थित तिलैयाटांड़ मदरसा खैरुल उलूम परिसर में सालाना जलसा ए इस्लाह ए मोआशरा और तालीमी मुजाहिरा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दूरदराज से आए उलेमा ए कराम और स्थानीय गणमान्य लोगों ने भाग लिया। वक्ताओं ने दीन और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर जोर देते हुए नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया। अंत में छात्रों को सम्मानित कर सामूहिक दुआ के साथ आयोजन संपन्न हुआ।

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  • मदरसा खैरुल उलूम, तिलैयाटांड़ में सालाना तालीमी मुजाहिरा आयोजित।
  • कारी वहाजूल हक की तिलावत से कार्यक्रम का आगाज।
  • मुफ्ती शोएब आलम कासमी, मुफ्ती सनाउल्लाह मजाहिरी, मुफ्ती कमरे आलम समेत कई उलेमा उपस्थित।
  • कुरआन मुकम्मल करने वाले छात्रों का सम्मान व मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार।
  • अंजुमन के सदर मो. अब्दाल सहित कई समाजसेवी रहे मौजूद।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत चंदवा पूर्वी पंचायत के तिलैयाटांड़ स्थित मदरसा खैरुल उलूम परिसर में सालाना जलसा ए इस्लाह ए मोआशरा और तालीमी मुजाहिरा कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र सहित दूरदराज से आए उलेमा ए कराम, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। आयोजन ने शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सुधार के संदेश को मजबूती से सामने रखा।

कुरआन की तिलावत से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत कारी वहाजूल हक साहब की दिलकश तिलावत ए कुरआन से हुई। उनकी आवाज में कुरआन की आयतों की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। उपस्थित लोगों ने गहरी तन्मयता के साथ तिलावत को सुना।

इसके बाद मंच पर उपस्थित उलेमा ए कराम ने अपने विचार व्यक्त किए और समाज को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

दीन और दुनियावी तालीम के संतुलन पर जोर

अपने संबोधन में मुफ्ती शोएब आलम कासमी, मुफ्ती सनाउल्लाह साहब मजाहिरी, मुफ्ती कमरे आलम और मौलाना रिजवान दानिश नदवी ने वर्तमान समय में दीन और आधुनिक शिक्षा के संतुलन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

मुफ्ती शोएब आलम कासमी ने कहा:

“आज के दौर में केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि आधुनिक ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों का समावेश समाज की तरक्की के लिए जरूरी है।”

वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा को अपनी ताकत बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ें।

नातिया कलाम और शायरी ने बांधा समां

कार्यक्रम में नातिया कलाम और शायरी की विशेष प्रस्तुति ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया। अब्दुल कयूम साहब, मुफ्ती अतीकुर्रहमान साहब, कैफी आजमी और मौलाना जकारिया राजी साहब की पेशकश ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

भक्ति और अदब के इस संगम ने कार्यक्रम को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।

छात्रों का सम्मान और पुरस्कार वितरण

इस अवसर पर मदरसा से कुरआन शरीफ मुकम्मल करने वाले छात्रों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उलेमाओं ने छात्रों को दुआओं से नवाजते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

साथ ही शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। इससे बच्चों और अभिभावकों में विशेष उत्साह देखा गया। यह सम्मान समारोह विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

अध्यक्षता और संचालन

कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा के संचालक मौलाना रिजवान दानिश नदवी ने की। संचालन की जिम्मेदारी मौलाना अबूबकर ने बखूबी निभाई। अंत में सामूहिक दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर अंजुमन के सदर मो. अब्दाल, पूर्व उप प्रमुख सह वरिष्ठ समाजसेवी हाजी फिरोज अहमद, हाजी तौफीक, डॉ शम्स राजा, मो अरशद, मोहम्मद अली, चांद खान, मो एहतेशाम, हाजी रफीक, मो अफरोज उर्फ टिंकू, मो वसीम, मौलाना इरफान आलम कासमी, मो अमजद, मौलाना सलमान आशिक नदवी, मो तैयब, मो इजहार कासमी, मो आदिल, मौलाना जफर इकबाल समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: शिक्षा और सामाजिक सुधार का सशक्त मंच

चंदवा में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करने वाला मंच साबित हुआ। दीन और आधुनिक शिक्षा के संतुलन की बात वर्तमान समय की आवश्यकता को दर्शाती है। ऐसे आयोजन समाज को नैतिक आधार देने के साथ युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा और नैतिकता से ही बनेगा सशक्त समाज

समाज की असली ताकत उसके शिक्षित और संस्कारी युवा होते हैं।
जब धार्मिक और आधुनिक शिक्षा साथ चलती है, तभी संतुलित विकास संभव होता है।
हम सबकी जिम्मेदारी है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और सही मार्गदर्शन दें।
ऐसे आयोजनों को केवल कार्यक्रम न समझें, बल्कि बदलाव की पहल मानें।

आपकी क्या राय है दीन और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर?
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Written by

चंदवा, लातेहार

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