#चंदवा #मातृ_दिवस : संस्कार और सम्मान से सराबोर रहा विद्यालय का भावनात्मक समारोह।
लातेहार जिले के चंदवा स्थित ग्लिटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल में मातृ दिवस भावनात्मक और सांस्कृतिक माहौल के बीच मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी माताओं के चरण धोकर आशीर्वाद लिया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सम्मान व्यक्त किया। विद्यालय प्रबंधन ने इसे बच्चों में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
- विद्यार्थियों ने माताओं के चरण धोकर आशीर्वाद लिया।
- विद्यालय में आयोजित हुए गीत, नृत्य और कविता कार्यक्रम।
- माताओं के लिए विशेष मनोरंजक प्रतियोगिताएं भी हुईं।
- निदेशिका कादम्बरी सिंह ने संस्कारों के महत्व पर जोर दिया।
- प्राचार्य हिमांशु सिंह ने नैतिक मूल्यों के संरक्षण की बात कही।
- समारोह में अभिभावकों और विद्यालय परिवार की बड़ी भागीदारी रही।
लातेहार जिले के चंदवा स्थित ग्लिटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल में मातृ दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साह, हर्षोल्लास और भावनात्मक माहौल के बीच किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी माताओं के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त करते हुए उनके चरण धोकर आशीर्वाद लिया। इस अनोखे दृश्य ने पूरे विद्यालय परिसर को भावनाओं और संस्कारों से सराबोर कर दिया।
विद्यालय पहुंचीं माताओं का भव्य स्वागत किया गया। बच्चों और अभिभावकों की मौजूदगी से कार्यक्रम का माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा।
संस्कार और सम्मान का अनोखा दृश्य
मातृ दिवस समारोह के दौरान सबसे भावुक पल तब आया जब विद्यार्थियों ने अपनी माताओं के चरण धोकर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान कई माताओं की आंखें नम हो गईं।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों में माता-पिता के प्रति सम्मान, संस्कार और संवेदनशीलता की भावना विकसित करना है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य और कविता प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी माताओं के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त की।
छोटे बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के दौरान पूरा विद्यालय परिसर तालियों और खुशियों से गूंजता रहा।
माताओं के लिए आयोजित हुई विशेष प्रतियोगिताएं
समारोह को और खास बनाने के लिए माताओं के लिए विभिन्न मनोरंजक गतिविधियां और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
माताओं ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान बच्चों और अभिभावकों के बीच आत्मीयता का खूबसूरत माहौल देखने को मिला।
विद्यालय केवल शिक्षा नहीं, संस्कार का भी केंद्र
विद्यालय की निदेशिका कादम्बरी सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना भी बेहद जरूरी है।
कादम्बरी सिंह ने कहा: “विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर संस्कार, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारियों का विकास करने का माध्यम भी है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर अपनी माताओं के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश दिया।
नैतिक मूल्यों को बचाए रखना जरूरी
विद्यालय के प्राचार्य हिमांशु सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में माता-पिता और गुरुजनों के प्रति सम्मान बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
हिमांशु सिंह ने कहा: “ऐसे आयोजनों का उद्देश्य बच्चों में संस्कार, नैतिकता और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।”
उन्होंने कहा कि परिवार और समाज के प्रति संवेदनशीलता ही बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव होती है।
शिक्षकों और प्रबंधन की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं विद्यालय के प्रशासक सुमंत सिंह के सहयोग और मार्गदर्शन की भी सराहना की गई।
विद्यालय परिवार ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी अभिभावकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
माताओं को किया गया सम्मानित
समारोह के अंत में सभी माताओं को सम्मानित कर उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान विद्यालय और अभिभावकों के बीच आत्मीयता और विश्वास का मजबूत रिश्ता देखने को मिला।
अभिभावकों ने इस तरह के संस्कारपूर्ण आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
मातृ दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं बल्कि बच्चों को संस्कार और सम्मान की सीख देने वाला प्रेरणादायक प्रयास रहा। आज के दौर में जहां पारिवारिक मूल्य धीरे-धीरे कमजोर होते दिख रहे हैं, वहां ऐसे आयोजन बच्चों को संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा दिखाते हैं। विद्यालयों की यह भूमिका समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
माता-पिता का सम्मान ही सबसे बड़ा संस्कार
मां का प्रेम और आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी ताकत होता है। बच्चों में संस्कार, सम्मान और संवेदनशीलता विकसित करना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
अपने बच्चों को माता-पिता और गुरुजनों के सम्मान की सीख दें। खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और सकारात्मक संस्कारों को समाज तक पहुंचाने की इस पहल को आगे बढ़ाएं।

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