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बाल विवाह के खिलाफ सिमडेगा में धार्मिक सहभागिता के साथ जागरूकता अभियान तेज, जुमे की नमाज के बाद दिलाया गया संकल्प

#सिमडेगा #सामाजिक_जागरूकता : 100 दिवसीय अभियान के तहत मस्जिद परिसर में मुस्लिम समुदाय ने बाल विवाह उन्मूलन का संकल्प लिया।

सिमडेगा जिले में बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे 100 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से विशेष हक्की मस्जिद, आजाद बस्ती इस्लामपुर में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय को बाल विवाह के विरुद्ध संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम में धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक मंचों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ मजबूत संदेश देना है।

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  • 100 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम का आयोजन।
  • हक्की मस्जिद आजाद बस्ती इस्लामपुर में जुमे की नमाज के बाद संकल्प।
  • जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा बाल विवाह उन्मूलन पर जोर।
  • सेंट्रल अंजुमन इस्लामिया और मुस्लिम धर्मगुरुओं की सक्रिय भागीदारी।
  • पीएलवी एस. सरफराज ने निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी दी।

सिमडेगा जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ प्रशासन और समाज मिलकर लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मस्जिद परिसर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने विशेष महत्व हासिल किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए और बाल विवाह, नशामुक्त समाज एवं बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व की मौजूदगी ने अभियान को और प्रभावी बनाया।

100 दिवसीय अभियान के तहत विशेष पहल

जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जिले में बाल विवाह के खिलाफ 100 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचाना है कि बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। मस्जिद जैसे धार्मिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित कर समुदाय के लोगों को सीधे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

जुमे की नमाज के बाद दिलाया गया संकल्प

विशेष हक्की मस्जिद, आजाद बस्ती इस्लामपुर में जुमे की नमाज के उपरांत मुस्लिम समुदाय के लोगों को बाल विवाह के विरुद्ध संकल्प दिलाया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने यह प्रतिज्ञा ली कि वे न केवल स्वयं बाल विवाह का विरोध करेंगे, बल्कि अपने आसपास भी इसे रोकने के लिए जागरूकता फैलाएंगे। साथ ही नशामुक्त समाज के निर्माण और बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने का संकल्प भी लिया गया।

धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों की अहम भूमिका

कार्यक्रम में मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ सेंट्रल अंजुमन इस्लामिया के पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक नेतृत्व समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और बाल विवाह जैसे मुद्दों पर स्पष्ट संदेश देना आवश्यक है।

सेंट्रल अंजुमन इस्लामिया के सदर मो. ग्यास ने कहा: “बाल विवाह समाज का गंभीर कलंक है और काजियों को चाहिए कि वे कम उम्र के बच्चों का निकाह कतई न कराएं। बच्चों को शिक्षा देना ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे मजबूत रास्ता है।”

बाल विवाह कानूनन अपराध, बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल

वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास को बाधित करता है। यह न केवल उनके भविष्य के साथ अन्याय है, बल्कि भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध भी है। समाज को इस सच्चाई को समझते हुए सामूहिक रूप से इसका विरोध करना होगा।

निःशुल्क विधिक सेवाओं की दी गई जानकारी

इस अवसर पर पीएलवी एस. सरफराज ने उपस्थित लोगों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोग प्राधिकार के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता, परामर्श और लोक अदालत जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इससे आम लोगों को न्याय तक आसान पहुंच मिलती है।

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सामूहिक प्रयास का लिया गया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, कानून के पालन और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। लोगों ने भरोसा दिलाया कि वे अपने परिवार और समाज में बाल विवाह को रोकने के लिए सजग रहेंगे।

आगे भी जारी रहेंगे जागरूकता कार्यक्रम

जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने जानकारी दी कि 100 दिवसीय अभियान के तहत आगे भी विभिन्न समुदायों, धार्मिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जिले को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके।

न्यूज़ देखो: सामाजिक बदलाव में धार्मिक मंचों की ताकत

यह कार्यक्रम दिखाता है कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई में धार्मिक और सामुदायिक मंच कितने प्रभावी हो सकते हैं। जब कानून, प्रशासन और समाज एक साथ खड़े होते हैं, तब बदलाव संभव होता है। बाल विवाह उन्मूलन के लिए ऐसे निरंतर प्रयास जरूरी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक समाज ही सुरक्षित भविष्य की नींव

बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाकर, शिक्षा को बढ़ावा देकर और कानून की जानकारी फैलाकर हम एक बेहतर समाज बना सकते हैं।

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Satyam Kumar Keshri

सिमडेगा नगर क्षेत्र

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