
#पालकोट #महिला_दिवस : मुरूमकेला गांव में ग्रामीण महिलाओं को अधिकार और कानूनी सहायता योजनाओं से किया गया जागरूक।
पालकोट प्रखंड के बाघिमा पंचायत अंतर्गत मुरूमकेला गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं को उनके अधिकारों और जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला द्वारा मिलने वाली निशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में पैरा लीगल वॉलेंटियर राजू साहू ने महिलाओं को जागरूक किया।
- मुरूमकेला गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम।
- ग्रामीण महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की दी गई जानकारी।
- जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गुमला की मुफ्त कानूनी सहायता योजनाओं पर चर्चा।
- पैरा लीगल वॉलेंटियर राजू साहू ने किया कार्यक्रम का संचालन और मार्गदर्शन।
- जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सलाह और सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
पालकोट प्रखंड के बाघिमा पंचायत अंतर्गत मुरूमकेला गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) रांची के दिशा-निर्देशन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गुमला के अध्यक्ष ध्रुव चंद्र मिश्रा एवं सचिव रामकुमार लाल गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया।
महिलाओं को बताया गया महिला दिवस का महत्व
कार्यक्रम के दौरान पैरा लीगल वॉलेंटियर (PLV) राजू साहू ने ग्रामीण महिलाओं और उपस्थित लोगों को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हर वर्ष 8 मार्च को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने और उनके अधिकार, समानता तथा सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को याद करने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलना अत्यंत जरूरी है, तभी एक मजबूत और विकसित समाज का निर्माण संभव हो सकता है।
कानूनी अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला द्वारा मिलने वाली निशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
महिलाओं को बताया गया कि गरीब, असहाय, महिला, बच्चे, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोग तथा जरूरतमंद व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से मुफ्त कानूनी सलाह और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लेने की अपील
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण महिलाओं को किसी भी प्रकार की समस्या होने पर विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस मौके पर गांव की कई महिलाएं और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम में भाग लेकर कानूनी अधिकारों और सहायता योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
न्यूज़ देखो : जागरूकता से ही संभव है सशक्त समाज
ऐसे जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब महिलाओं को कानून और उनके अधिकारों की जानकारी होती है, तो वे समाज में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकती हैं।
जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत है
अपने अधिकारों को जानना हर नागरिक के लिए जरूरी है।
जागरूकता से ही समाज में समानता और न्याय की नींव मजबूत होती है।
आइए, अपने आसपास के लोगों को भी कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करें।






