बंदरचुंआ ग्राम सभा में पेसा नियमावली 2025 पर चर्चा, ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर लोगों को किया गया जागरूक

बंदरचुंआ ग्राम सभा में पेसा नियमावली 2025 पर चर्चा, ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर लोगों को किया गया जागरूक

author Birendra Tiwari
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#कोलेबिरा #पेसा_नियमावली : ग्राम सभा बैठक में स्वशासन और अधिकारों पर हुई विस्तृत चर्चा।

कोलेबिरा प्रखंड के बंदरचुंआ गांव में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर पेसा नियमावली 2025 के प्रावधानों पर चर्चा की गई। बैठक में विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने कहा कि पेसा नियमावली आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वशासन एवं अधिकारों को मजबूत करने वाला कानून है। उन्होंने ग्राम सभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं होने और लघु वनोपज तथा छोटे खनिजों पर ग्राम सभा के अधिकार की जानकारी दी। बैठक में ग्रामीणों ने पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई।

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  • बंदरचुंआ गांव में पेसा नियमावली 2025 को लेकर ग्राम सभा आयोजित।
  • नमन विक्सल कोनगाड़ी ने ग्राम सभा के अधिकारों पर दिया जोर।
  • भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की अनुमति को बताया अनिवार्य।
  • लघु वनोपज, बालू घाट और छोटे खनिजों पर ग्राम सभा के अधिकार की जानकारी।
  • बैठक में ग्रामीणों ने प्रभावी क्रियान्वयन की उठाई मांग।
  • बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद।

कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत बंदरचुंआ पंचायत के बंदरचुंआ गांव में ग्राम सभा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य रूप से पेसा नियमावली 2025 के प्रावधानों, ग्राम सभा के अधिकारों और आदिवासी स्वशासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी, विधायक प्रतिनिधि रावेल लकड़ा तथा जेम्स पी. केरकेट्टा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान ग्रामीणों को पेसा नियमावली के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई और ग्राम सभा की भूमिका को लेकर जागरूक किया गया।

पेसा नियमावली को बताया ऐतिहासिक कानून

बैठक को संबोधित करते हुए विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने कहा कि पेसा नियमावली 2025 आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्वशासन और अधिकारों की रक्षा करने वाला ऐतिहासिक कानून है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार अधिनियम 1935 से लेकर सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट और विल्किंसन रूल जैसे कानून आदिवासी समुदायों को जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर अधिकार प्रदान करते हैं। पेसा नियमावली इन्हीं संवैधानिक अधिकारों को और अधिक मजबूत करने का कार्य करती है।

नमन विक्सल कोनगाड़ी ने कहा: “पेसा नियमावली 2025 आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्वशासन और अधिकारों की रक्षा करने वाला ऐतिहासिक कानून है।”

उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को मजबूत बनाकर स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की व्यवस्था को प्रभावी किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण और संसाधनों पर ग्राम सभा का अधिकार

विधायक ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि लघु वनोपज, बालू घाट तथा छोटे खनिजों पर भी ग्राम सभा का अधिकार होगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी योजना का चयन ग्राम सभा की सहमति से ही किया जाएगा। इसके लिए ग्राम सभा में 33 प्रतिशत उपस्थिति और उसमें भी 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य होगी।

नमन विक्सल कोनगाड़ी ने कहा: “स्थानीय विकास, संसाधनों के उपयोग और विवादों के समाधान से जुड़े निर्णय अब अधिकारी नहीं बल्कि ग्राम सभा करेगी।”

उन्होंने ग्रामीणों से ग्राम सभा की बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

राजनीतिक मुद्दों पर भी बोले विधायक

बैठक के दौरान विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी शुरू से पेसा कानून और आदिवासी अधिकारों की समर्थक रही है, जबकि भाजपा ने इस कानून को रोकने और कमजोर करने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही पेसा नियमावली लागू की गई ताकि इसका सीधा लाभ स्थानीय ग्राम सभाओं को मिल सके।

इसके अलावा विधायक ने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दोनों संगठन फिर से “स्वर्ण व्यवस्था” लागू करना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस सामाजिक न्याय और आदिवासी स्वशासन की पक्षधर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियों से बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा और ग्रामीण क्षेत्रों की खनिज तथा वन संपदा का अधिक दोहन हुआ।

ग्रामीणों ने उठाई प्रभावी क्रियान्वयन की मांग

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने भी पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्राम सभा के अधिकारों को मजबूत करने की मांग उठाई।

ग्रामीणों का कहना था कि कानून के प्रावधानों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचनी चाहिए ताकि लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।

लोगों ने कहा कि ग्राम सभा को मजबूत बनाने से स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान में आसानी होगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी।

बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित

बैठक में विकटोर डुंगडुंग, जस्टिन बेक, अजय एक्का, प्रदीप टोप्पो, सुबरदानी लुगून, मुलयनी डांग, दानियेल समद तथा मुखिया बिलयम समद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने पेसा नियमावली से जुड़े विषयों पर सवाल भी पूछे, जिनका जवाब उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा दिया गया।

न्यूज़ देखो: ग्राम सभाओं की भूमिका को समझना होगा जरूरी

पेसा नियमावली 2025 को लेकर गांव स्तर पर आयोजित इस तरह की बैठकों से लोगों में अधिकारों और स्वशासन के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका केवल औपचारिक नहीं बल्कि स्थानीय निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। हालांकि किसी भी कानून का वास्तविक प्रभाव उसके सही क्रियान्वयन और जनजागरूकता पर निर्भर करता है। अब जरूरत इस बात की है कि ग्रामीणों को कानून की जानकारी सरल भाषा में दी जाए और ग्राम सभाओं को व्यवहारिक रूप से मजबूत बनाया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें, ग्राम सभा को मजबूत करें

गांव और समाज के विकास में ग्राम सभा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब लोग अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझते हैं, तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनती है। जागरूक नागरिक और सक्रिय ग्राम सभा मिलकर स्थानीय समस्याओं का बेहतर समाधान निकाल सकते हैं। समाज की एकता, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा के लिए सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

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Written by

सिमडेगा

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