रास्ते के विवाद में दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष, लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से कई लोग घायल

रास्ते के विवाद में दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष, लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से कई लोग घायल

author Udaychand Kumar
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#सिसई #मारपीट_विवाद : रास्ते को लेकर हुए विवाद में दोनों पक्षों ने थाने में आवेदन दिया।

गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र अंतर्गत गुड़गांव में रास्ते के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज कराया गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडा और कुल्हाड़ी से हमला करने का आरोप लगाते हुए सिसई थाना में आवेदन दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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  • गुड़गांव गांव में रास्ते के विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट।
  • लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला करने का आरोप।
  • दोनों पक्षों के कई लोग घायल, कराया गया इलाज।
  • संध्या पौराणिक और लाली देवी ने थाने में दिया आवेदन।
  • सिसई थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच।

गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र के सकरौली पंचायत अंतर्गत ग्राम गुड़गांव में रास्ते के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गुरुवार को गांव में ही दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी चलने की बात सामने आई है। इस घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए, जिसके बाद मामला सिसई थाना पहुंचा।

घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने दोनों पक्षों का आवेदन लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जमीन और रास्ते के विवाद से बढ़ा तनाव

पहले पक्ष की ओर से 27 वर्षीय संध्या पौराणिक, पिता प्रभाकर पौराणिक, निवासी गुड़गांव ने सिसई थाना में आवेदन देते हुए आरोप लगाया कि पड़ोसी सवना उरांव, पिता स्वर्गीय जेठू उरांव ने उनकी जमीन में अतिक्रमण करते हुए घेरा कर दिया था।

आवेदन में कहा गया है कि जब इस बात का विरोध किया गया, तो दूसरे पक्ष के लोगों ने अचानक हमला कर दिया।

संध्या पौराणिक ने आरोप लगाया: “विरोध करने पर हमारे परिवार पर लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए।”

संध्या पौराणिक के अनुसार इस हमले में उनके चाचा राजकुमार पौराणिक, पिता प्रभाकर पौराणिक और बहन खुशबू पौराणिक घायल हो गए।

दूसरे पक्ष ने भी लगाया जानलेवा हमले का आरोप

वहीं दूसरे पक्ष की ओर से 60 वर्षीय लाली देवी, पति दिनेश उरांव ने भी थाना में आवेदन देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदन में कहा गया कि रास्ते के विवाद को लेकर उनके परिवार पर हमला किया गया।

लाली देवी ने आरोप लगाया कि राजकुमार पौराणिक, प्रभाकर पौराणिक, संध्या पौराणिक और खुशबू पौराणिक लाठी-डंडा और कुल्हाड़ी लेकर उनके परिवार पर टूट पड़े।

लाली देवी ने कहा: “हमारे परिवार पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें मेरे सिर पर गंभीर चोट लगी और काफी खून बहने लगा।”

आवेदन के अनुसार इस हमले में उनके पति दिनेश उरांव और बेटा नितेश उरांव भी घायल हो गए। बाद में सभी घायलों को इलाज के लिए रेफरल अस्पताल सिसई ले जाया गया।

गांव में तनाव का माहौल

घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार रास्ते और जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच चल रहे थे, जो अब हिंसक संघर्ष में बदल गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विवाद का समाधान कराया जाता, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। घटना के बाद गांव में लोगों के बीच दहशत और चिंता का माहौल देखा गया।

पुलिस ने शुरू की जांच

सिसई थाना प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है और मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

थाना प्रभारी नीरज कुमार ने कहा: “मामले में विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।”

पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के आरोपों और घटनास्थल की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। मामले में मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे विवाद बन रहे बड़ी समस्या

ग्रामीण इलाकों में रास्ते और जमीन से जुड़े विवाद अक्सर गंभीर संघर्ष का रूप ले लेते हैं। कई मामलों में पंचायत स्तर पर समाधान नहीं होने के कारण विवाद बढ़ते-बढ़ते हिंसा तक पहुंच जाते हैं। गुड़गांव की घटना भी इसी तरह के विवाद का उदाहरण बनकर सामने आई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों को समय रहते ऐसे विवादों के समाधान के लिए पहल करनी चाहिए ताकि गांवों में शांति और सामाजिक सौहार्द बना रहे।

न्यूज़ देखो: छोटे विवादों को समय रहते सुलझाना जरूरी

गांवों में रास्ते और जमीन से जुड़े विवाद अक्सर सामाजिक तनाव की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। गुड़गांव की घटना यह दिखाती है कि संवाद और समाधान की कमी किस तरह हिंसा में बदल सकती है। प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय पंचायतों और समाज के जिम्मेदार लोगों की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है ताकि छोटे विवाद गंभीर संघर्ष का रूप न लें। अब जरूरत निष्पक्ष जांच और शांति बहाली की है ताकि गांव का माहौल सामान्य हो सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विवाद नहीं, संवाद से ही बनता है बेहतर समाज

गांव और समाज की ताकत आपसी भाईचारा और शांति में होती है।
छोटे विवादों को बातचीत और समझदारी से सुलझाना ही सबसे बड़ा समाधान है।
हिंसा किसी समस्या का हल नहीं, बल्कि नई परेशानियों की शुरुआत होती है।
सजग नागरिक बनें और समाज में सौहार्द बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।
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Written by

सिसई, गुमला

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