#बरवाडीह #विस्थापन_विरोध : ग्रामीणों ने रेलवे योजना के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड स्थित छिपादोहर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। संघर्ष समिति के नेतृत्व में 13 मई को धरना देने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों ने रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर योजना पर पुनर्विचार की मांग की है। यह मामला स्थानीय अधिकारों और विकास योजनाओं के बीच टकराव को दर्शाता है।
- छिपादोहर रेलवे स्टेशन (लातेहार) क्षेत्र में विस्थापन का विरोध।
- 13 मई 2026 को धरना प्रदर्शन का निर्णय।
- संघर्ष समिति ने रेल मंत्री सहित अधिकारियों को ज्ञापन भेजा।
- ग्रामीणों ने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन का संकल्प लिया।
- स्टेशन प्रबंधक ने ज्ञापन आगे भेजने का आश्वासन दिया।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत छिपादोहर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में प्रस्तावित विस्थापन को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे को लेकर संगठित रूप से आंदोलन का निर्णय लिया है। छिपादोहर–हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन विस्थापन संघर्ष समिति के नेतृत्व में 13 मई 2026 को धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित योजना से उन्हें अपने घर और जमीन से विस्थापित होना पड़ेगा, जिससे उनके जीवन और आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा।
ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध
इस विरोध के क्रम में समिति के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने छिपादोहर रेलवे स्टेशन के स्टेशन प्रबंधक राम आशीष महतो को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन रेल मंत्री, रेलवे बोर्ड, महाप्रबंधक हाजीपुर और मंडल रेल प्रबंधक धनबाद के नाम भेजा गया है।
स्टेशन प्रबंधक राम आशीष महतो ने कहा: “सभी ज्ञापनों को संबंधित विभागों तक पहुंचाया जाएगा ताकि आगे की कार्रवाई हो सके।”
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि बिना उनकी सहमति के किसी भी प्रकार का विस्थापन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संघर्ष समिति की भूमिका
छिपादोहर–हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन विस्थापन संघर्ष समिति इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। समिति की अध्यक्ष बेरोनिका कुजूर ने कहा कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई है।
समिति के अन्य पदाधिकारी—उमेश चंद्रवंशी (मुख्य सचिव), देवनाथ सिंह (महामंत्री), विजय कुमार प्रसाद (कोषाध्यक्ष), संजय सिन्हा (संपर्क प्रमुख)—ने भी एक स्वर में आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी
इस दौरान ग्राम प्रधान मनदीप सिंह, मीडिया प्रभारी मुन्ना कुमार गुप्ता, सांसद प्रतिनिधि भीमानंद गिरी, पंचायत समिति सदस्य दिलीप कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सभी ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।
आगे क्या होगा
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। 13 मई को होने वाला धरना प्रदर्शन इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह मामला एक बार फिर विकास परियोजनाओं और स्थानीय लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर करता है।

न्यूज़ देखो: विकास के नाम पर विस्थापन कब तक
छिपादोहर का यह मामला बताता है कि विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की सहमति और भागीदारी कितनी जरूरी है। अगर लोगों को विश्वास में लिए बिना योजनाएं लागू होंगी, तो विरोध होना तय है। क्या प्रशासन इस बार समय रहते संवाद स्थापित करेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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