#बानो #बाईपास_विवाद : बिना ग्रामसभा अनुमति निर्माण पर ग्रामीणों ने जताया कड़ा विरोध।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में एनएच-320जी बाईपास सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को लोगों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना काम शुरू किया गया। सांसद ने 4 मई को स्थल निरीक्षण कर समाधान का आश्वासन दिया है।
- बानो प्रखंड (सिमडेगा) में एनएच-320जी बाईपास पर विवाद।
- ग्रामीणों ने पोकलेन और जेसीबी का काम रुकवाया।
- बिना ग्रामसभा अनुमति निर्माण का आरोप।
- खेती योग्य जमीन प्रभावित होने से आजीविका पर संकट।
- सांसद ने 4 मई को स्थल निरीक्षण का दिया आश्वासन।
- विधायक से भी मिलकर ग्रामीणों ने समस्या रखी।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड क्षेत्र में प्रस्तावित एनएच-320जी बाईपास सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का विरोध किया और पोकलेन तथा जेसीबी मशीनों को काम करने से रोक दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण कार्य बिना ग्रामसभा की अनुमति के शुरू किया गया है, जो नियमों का उल्लंघन है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभाग ने स्थानीय लोगों की सहमति लिए बिना ही परियोजना शुरू कर दी, जिससे क्षेत्र में असंतोष फैल गया है।
खेती की जमीन पर असर को लेकर चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित बाईपास सड़क उनकी उपजाऊ खेती योग्य जमीन से होकर गुजर रही है। इससे न केवल उनकी जमीन छिन जाएगी, बल्कि उनकी आजीविका पर भी सीधा असर पड़ेगा।
उनका कहना है कि खेती ही उनके जीवन का मुख्य आधार है और सड़क निर्माण से वे आर्थिक संकट में आ सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि नई बाईपास सड़क बनाने के बजाय पुरानी सड़क का चौड़ीकरण किया जाए, जिससे जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता कम हो।
जनप्रतिनिधियों तक पहुंची आवाज
विरोध के बीच ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय सांसद को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। सांसद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आश्वासन दिया कि वे 4 मई को स्वयं स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे।
सांसद ने कहा: “ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और मौके पर निरीक्षण कर उचित निर्णय लिया जाएगा।”
इसके साथ ही ग्रामीणों ने तोरपा के विधायक सुदीप गुड़िया से भी मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। विधायक ने भी सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन देते हुए इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखने की बात कही।
प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी
इस दौरान सांसद प्रतिनिधि अजित कुंडलना, महासचिव अभिषेक बागे, हर्षित संगा, पाहन प्रमोद लुगुन, समाजसेवी सुधीर लुगुन सहित कई ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को रखा और निर्माण कार्य पर रोक लगाने की बात कही।
समाधान की उम्मीद में ग्रामीण
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से उनकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।
यह मामला विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी सामने लाता है।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम अधिकार की जंग
बानो का यह मामला बताता है कि विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी कितनी जरूरी है। बिना ग्रामसभा की अनुमति के कार्य शुरू होना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह जनता के अधिकारों की अनदेखी भी है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे का समाधान कैसे निकालते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आपकी आवाज से ही बदलेगा सिस्टम
अगर आपके क्षेत्र में भी बिना सहमति के कोई कार्य हो रहा है, तो आवाज उठाना जरूरी है।
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विकास तभी सार्थक है, जब उसमें सभी की भागीदारी हो।
संगठित होकर अपनी बात रखने से समाधान का रास्ता निकलता है।
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