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महुआडांड़ के चटकपुर गांव के बिपुल गुप्ता बने आईएएस यूपीएससी में 103वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान

#महुआडांड़ #यूपीएससीसफलता : चटकपुर के युवक बिपुल गुप्ता ने 103वीं रैंक पाकर आईएएस में चयन पाया।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत चटकपुर गांव के युवक बिपुल गुप्ता ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 103वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन प्राप्त किया है। इससे पहले वे भारतीय वन सेवा में कार्यरत थे। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में गर्व और उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।

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  • महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर गांव के युवक बिपुल गुप्ता बने आईएएस।
  • यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हासिल की 103वीं रैंक
  • पहले 300 से अधिक रैंक आने पर नहीं मिल सकी थी आईएएस सेवा।
  • उसी वर्ष भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में 35वीं रैंक हासिल की थी।
  • वर्तमान में वन सेवा में कार्यरत रहते हुए फिर से की तैयारी
  • सफलता की खबर पर गांव में मिठाइयां बांटकर मनाया गया जश्न

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर गांव के रहने वाले बिपुल गुप्ता ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है। उन्होंने इस वर्ष यूपीएससी परीक्षा में 103वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव और जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। जैसे ही उनकी सफलता की खबर गांव पहुंची, ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई।

पहले भी पास की थी यूपीएससी परीक्षा

बिपुल गुप्ता की सफलता एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह वर्षों की निरंतर मेहनत और संघर्ष का फल है।

बताया जाता है कि इससे पहले भी उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। हालांकि उस समय उनकी रैंक 300 से अधिक थी, जिसके कारण उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा नहीं मिल सकी थी।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ते रहे।

भारतीय वन सेवा में भी हासिल की थी शानदार सफलता

यूपीएससी के उसी वर्ष आयोजित भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में भी बिपुल गुप्ता ने शानदार प्रदर्शन किया था।

उन्होंने इस परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय वन सेवा में चयन प्राप्त किया था। इसके बाद वे वन सेवा में कार्यरत हो गए और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए देश की सेवा कर रहे थे।

लेकिन उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज और लोगों के लिए काम करने का सपना लगातार जीवित रहा।

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कड़ी मेहनत और अनुशासन से हासिल किया लक्ष्य

बिपुल गुप्ता का लक्ष्य शुरू से ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर जनसेवा करना था।

वन सेवा में कार्यरत रहने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी को जारी रखा। कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार 103वीं रैंक हासिल कर अपना सपना साकार कर लिया।

उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता अवश्य मिलती है।

गांव में जश्न और खुशी का माहौल

जैसे ही बिपुल गुप्ता के आईएएस बनने की खबर चटकपुर गांव पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

ग्रामीणों और परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। लोगों ने कहा कि बिपुल की सफलता पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है और इससे इलाके के युवाओं को नई प्रेरणा मिलेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि छोटे गांव से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आसान नहीं होता, लेकिन बिपुल ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति में आगे बढ़ सकती है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने बिपुल

बिपुल गुप्ता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

ग्रामीणों का मानना है कि उनकी उपलब्धि से यह संदेश जाता है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो छोटे गांवों के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान बना सकते हैं।

उनकी इस उपलब्धि से महुआडांड़ और लातेहार जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है।

न्यूज़ देखो: छोटे गांव से बड़ी उड़ान की प्रेरणादायक कहानी

चटकपुर के बिपुल गुप्ता की सफलता यह दिखाती है कि सपने चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, उन्हें मेहनत और दृढ़ संकल्प से हासिल किया जा सकता है। एक छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा में 103वीं रैंक हासिल करना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह सफलता यह भी साबित करती है कि ग्रामीण इलाकों के युवाओं में अपार क्षमता है, जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की है। अब उम्मीद है कि बिपुल प्रशासनिक सेवा में रहकर समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सपनों को हकीकत में बदलने का समय

बिपुल गुप्ता की कहानी यह बताती है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। छोटे गांवों के युवाओं के लिए यह उपलब्धि एक नई उम्मीद और प्रेरणा लेकर आई है।

आज जरूरत है कि युवा अपने सपनों को पहचानें, शिक्षा और मेहनत को अपनी ताकत बनाएं और समाज के विकास में योगदान दें।

अगर आपको भी यह प्रेरणादायक खबर अच्छी लगी हो तो अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें ताकि और युवाओं को भी अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिल सके।

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