#कोलेबिरा #किसान_आंदोलन : किसानों की मांगों को लेकर भाजपा ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कोलेबिरा प्रखंड कार्यालय में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार पर किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं करने और कृषि क्षेत्र में भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंपा गया। ज्ञापन में धान खरीद, खाद की कालाबाजारी, फसल बीमा और किसानों के बकाया भुगतान जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
- कोलेबिरा प्रखंड कार्यालय में भाजपा ने किसानों के मुद्दों पर धरना-प्रदर्शन किया।
- भाजपा नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार पर वादाखिलाफी और किसान विरोधी नीतियों का आरोप लगाया।
- राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर धान खरीद, खाद संकट और बकाया भुगतान की मांग उठाई गई।
- किसानों को ₹3200 प्रति क्विंटल धान मूल्य देने के वादे को अधूरा बताया गया।
- खाद और पीडीएस सामग्री की कालाबाजारी को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए।
- भाजपा नेताओं ने समस्याओं के समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
कोलेबिरा प्रखंड कार्यालय परिसर में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा किसानों की समस्याओं को लेकर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने झारखंड सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए राज्य सरकार पर किसानों के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद महामहिम राज्यपाल के नाम एक विस्तृत ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को सौंपा गया।
धरना कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले किसानों से किए गए बड़े-बड़े वादे आज तक धरातल पर नहीं उतर पाए हैं।
धान के समर्थन मूल्य और भुगतान का मुद्दा उठाया
भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान किसानों को ₹3200 प्रति क्विंटल धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि धान खरीद केंद्र समय पर नहीं खुलते, जिससे किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है। साथ ही धान खरीद के बाद भुगतान में हो रही देरी को भी गंभीर समस्या बताया गया।
भाजपा नेताओं ने कहा: “सरकार ने किसानों को 48 घंटे में भुगतान देने का वादा किया था, लेकिन महीनों बाद भी हजारों किसानों का पैसा बकाया है।”
नेताओं ने आरोप लगाया कि व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं होने के कारण बिचौलियों का दबदबा बढ़ गया है और किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।
खाद और पीडीएस सामग्री की कालाबाजारी का आरोप
धरना के दौरान भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर खाद और पीडीएस सामग्री की कालाबाजारी रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया। ज्ञापन में कहा गया कि किसानों को सरकारी दर पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है।
नेताओं का आरोप था कि ₹266 में मिलने वाली यूरिया की बोरी खुले बाजार में ₹800 तक में बेची जा रही है। इसके अलावा पीडीएस के तहत मिलने वाले नमक और अन्य सामग्री की भी कालाबाजारी होने की बात कही गई।
भाजपा नेताओं ने कहा: “सरकार किसानों को सस्ती दर पर खाद देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।”
फसल बीमा और कृषि योजनाओं पर सवाल
भाजपा कार्यकर्ताओं ने फसल बीमा और पशुधन बीमा योजना को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसानों को ₹1 प्रति डिसमिल की दर से फसल बीमा और ₹1 प्रति पशुधन की दर से बीमा सुविधा देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाया।
नेताओं ने कहा कि किसानों को सिंचाई, कृषि उपकरण और मुफ्त बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है। पंचायत स्तर पर कृषि यंत्र बैंक और बहुउद्देशीय गोदाम निर्माण की घोषणाएं भी अधूरी पड़ी हैं।
प्राकृतिक आपदाओं से परेशान किसान
धरना के दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि लगातार प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान पहले से ही परेशान हैं। इसके बावजूद सरकार सिंचाई और जल संरक्षण योजनाओं को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। किसानों को समय पर राहत और मुआवजा नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
भाजपा ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के बाद भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंपा। बीडीओ ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि इसे तय प्रक्रिया के तहत राज्यपाल तक पहुंचाया जाएगा।
भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी, तो पार्टी आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र करेगी।
कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष अशोक इंदवार, कार्यक्रम प्रभारी सह पूर्व प्रत्याशी सुजान मुंडा, चिंतामणि कुमार, जनेश्वर विलहोर, दिलेश्वर सिंह, श्यामसुंदर सिंह और कृष्णा दास सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: किसानों के मुद्दे राजनीति के केंद्र में, समाधान कब?
झारखंड में किसानों से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कोलेबिरा में भाजपा का प्रदर्शन यह दिखाता है कि कृषि, धान खरीद और खाद संकट जैसे मुद्दे ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी चिंता का कारण बने हुए हैं। यदि किसानों को समय पर भुगतान, खाद और सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
सरकार और विपक्ष दोनों के लिए जरूरी है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जाए। आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजबूत किसान ही मजबूत गांव और राज्य की पहचान हैं
देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। यदि किसानों को उचित मूल्य, समय पर संसाधन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, तो गांवों की तस्वीर बदल सकती है।
जरूरत इस बात की है कि किसान जागरूक बनें और अपने अधिकारों को लेकर संगठित रहें। प्रशासन और सरकार को भी किसानों की समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता दिखानी होगी।
किसानों की आवाज को मजबूत बनाएं और ग्रामीण मुद्दों पर खुलकर चर्चा करें।
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