#चतरा #स्वास्थ्य_व्यवस्था : मरीजों को ले जाने पहुंची 108 एंबुलेंस खुद बीमार निकली।
चतरा जिले के हंटरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। करेंट लगने से घायल दो मासूमों को रेफर करने पहुंची 108 एंबुलेंस अस्पताल परिसर में ही बंद हो गई। ग्रामीणों और परिजनों ने एंबुलेंस को धक्का देकर चालू करने की कोशिश की, लेकिन वाहन स्टार्ट नहीं हुआ। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था और एंबुलेंस फिटनेस पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
- हंटरगंज स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को ले जाने पहुंची 108 एंबुलेंस बीच में खराब हो गई।
- करेंट लगने से घायल दो मासूमों को गया रेफर किया गया था, लेकिन एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई।
- ग्रामीणों और परिजनों ने एंबुलेंस को धक्का देकर चालू करने का प्रयास किया।
- चालक रविन्द्र यादव ने बताया कि वाहन लंबे समय से खराब चल रहा है।
- डॉ वेद प्रकाश ने एंबुलेंस फिटनेस व्यवस्था को लचर बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठाए।
- अंततः परिजनों को निजी एंबुलेंस से बच्चों को इलाज के लिए भेजना पड़ा।
चतरा जिले के हंटरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार शाम स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर उस समय सामने आई, जब मरीजों को अस्पताल से रेफर करने पहुंची 108 एंबुलेंस खुद ही खराब हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने एंबुलेंस को धक्का देकर स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन वाहन चालू नहीं हुआ। आखिरकार मरीजों को निजी एंबुलेंस के सहारे इलाज के लिए भेजना पड़ा।
करेंट लगने के बाद दो मासूमों को किया गया था रेफर
जानकारी के अनुसार हंटरगंज थाना क्षेत्र के फिटिंगटाड़ गांव के दो मासूम बच्चे करेंट की चपेट में आ गए थे। दोनों की हालत गंभीर होने पर उन्हें हंटरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए गया रेफर कर दिया।
परिजनों ने सरकारी सुविधा के तहत 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया। कुछ देर बाद एंबुलेंस अस्पताल पहुंची भी, लेकिन जैसे ही मरीजों को वाहन में बैठाया गया, एंबुलेंस बंद हो गई।
धक्का देने के बाद भी स्टार्ट नहीं हुई एंबुलेंस
मौके पर मौजूद ग्रामीणों और मरीज के परिजनों ने एंबुलेंस को धक्का देकर चालू करने की कोशिश की। काफी देर तक प्रयास चलता रहा, लेकिन वाहन स्टार्ट नहीं हुआ। इस दौरान अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ लग गई और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ती गई।
ग्रामीणों ने कहा कि जिस वाहन का उपयोग गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए किया जाता है, उसकी ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब एंबुलेंस की नियमित जांच और फिटनेस नहीं होगी, तो मरीजों की जान कैसे सुरक्षित रहेगी।
निजी एंबुलेंस से भेजे गए मरीज
सरकारी एंबुलेंस के फेल होने के बाद परिजनों ने मजबूरी में निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की। इसके बाद दोनों बच्चों को गया इलाज के लिए भेजा गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर निजी वाहन नहीं मिलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने कहा कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद खराब है।
चालक ने कहा लंबे समय से खराब है वाहन
108 एंबुलेंस चालक रविन्द्र यादव ने बताया कि वाहन लंबे समय से खराब चल रहा है और इसकी जानकारी कई बार वरीय अधिकारियों को दी जा चुकी है।
रविन्द्र यादव ने कहा: “एम्बुलेंस काफी दिनों से खराब है। इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
चालक के बयान के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया कि आखिर विभागीय अधिकारी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।
चिकित्सा पदाधिकारी ने फिटनेस व्यवस्था पर उठाए सवाल
घटना को लेकर हंटरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ वेद प्रकाश ने भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि 108 एंबुलेंस की फिटनेस व्यवस्था बेहद खराब है।
डॉ वेद प्रकाश ने कहा: “108 एंबुलेंस की फिटनेस व्यवस्था बहुत लचर है। इसे लेकर कई बार जिला सीएल राजकुमार से बात की गई, लेकिन गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।”
डॉक्टर के इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही पर सवाल और तेज हो गए हैं।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर उठाए सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने कहा कि सरकार ने आम जनता की सुविधा के लिए 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की थी, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण लोगों को समय पर सुविधा नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में गंभीर मरीजों के लिए सरकारी एंबुलेंस ही एकमात्र सहारा होती है। ऐसे में यदि वही सेवा समय पर काम नहीं करे तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
लोगों ने मांग की कि जिले की सभी एंबुलेंस की तकनीकी जांच कराई जाए और खराब वाहनों को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
लगातार सामने आ रही हैं स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां
चतरा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं डॉक्टरों की कमी, कहीं दवाइयों की अनुपलब्धता तो कहीं एंबुलेंस सेवा की लापरवाही लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही सीधे मरीजों की जिंदगी से जुड़ा मामला होता है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
न्यूज़ देखो: मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक?
हंटरगंज की यह घटना सिर्फ एक खराब एंबुलेंस की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है। सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब जमीनी स्तर पर सुविधाएं सही तरीके से काम करें। अगर शिकायतों के बावजूद खराब एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना हम सभी की जिम्मेदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा किसी भी परिवार के लिए जीवन रेखा होती है। जब आपात स्थिति में एंबुलेंस ही जवाब दे दे, तो लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है। जरूरत है कि आम नागरिक भी ऐसी समस्याओं को खुलकर सामने लाएं और जवाबदेही तय करने की मांग करें।
यदि आपके क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कोई समस्या है, तो उसे आवाज दें। आपकी जागरूकता किसी की जिंदगी बचा सकती है। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने में सहयोग करें।

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