#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ 14वें दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना।
गिरिडीह के टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा के बैनर तले जारी अनिश्चितकालीन धरना 14वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन में पहुंचे पूर्व विधायक विनोद सिंह और राजकुमार यादव ने मजदूरों के समर्थन में फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। मजदूर नेताओं ने छंटनी, प्रदूषण, स्थानीय मजदूरों की अनदेखी और श्रम कानूनों के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
- 13 मई से जारी आंदोलन 14वें दिन भी जारी रहा।
- पूर्व विधायक विनोद सिंह और राजकुमार यादव ने धरना स्थल पहुंचकर समर्थन दिया।
- मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर अवैध छंटनी और शोषण का आरोप लगाया।
- नेताओं ने कहा कि फैक्ट्री में 70% स्थानीय मजदूरों के नियम का पालन नहीं हो रहा।
- प्रशासनिक वार्ता विफल होने के बाद आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी।
- हजारों महिला-पुरुष और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता धरने में शामिल रहे।
गिरिडीह जिले के टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के संयुक्त बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन लोकतांत्रिक धरना लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। 13 मई से शुरू हुआ यह आंदोलन अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार कर रहा है और श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
धरना स्थल पर सोमवार को पूर्व विधायक राजकुमार यादव और विनोद सिंह पहुंचे, जहां उन्होंने मजदूरों को संबोधित करते हुए फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन पर तीखे आरोप लगाए। नेताओं ने कहा कि मजदूरों की लड़ाई अब पूरे गिरिडीह के सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।
प्रशासन की वार्ता विफल, प्रबंधन पर भागने का आरोप
धरनास्थल पर प्रशासन की ओर से अंचल अधिकारी जितेंद्र प्रसाद, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो तथा लेबर ऑफिस के प्रतिनिधियों ने वार्ता कराने का प्रयास किया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मौजूद आशुतोष तिवारी और अन्य अधिकारी बातचीत से बचते रहे और बीच में ही निकल गए।
धरनार्थियों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री मालिक बाहर रहते हैं और स्थानीय प्रबंधन उन्हें गलत जानकारी देकर मजदूरों की समस्याओं को दबाने का प्रयास कर रहा है।
रामू बैठा, बिरनी प्रमुख ने कहा:
“प्रशासन ने समझौते की कोशिश की, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन के लोग बातचीत छोड़कर भाग गए। इससे साफ है कि वे समाधान नहीं चाहते।”
मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप
धरनार्थियों का कहना है कि फैक्ट्री में बिना नियम-कानून मजदूरों को काम से निकाला जा रहा है। आंदोलनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि 8 घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम कराया जाता है और स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।
मजदूर संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार के नियम के अनुसार उद्योगों में 70 प्रतिशत स्थानीय मजदूरों को रोजगार दिया जाना चाहिए, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा।
राजकुमार यादव ने प्रदूषण और शोषण का मुद्दा उठाया
पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने अपने संबोधन में कहा कि गिरिडीह में प्रदूषण और औद्योगिक अव्यवस्था लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
राजकुमार यादव ने कहा:
“माले और असंगठित मजदूर मोर्चा मजदूरों और गरीबों की हक-अधिकार की लड़ाई लड़ रहा है। खेत बर्बाद हो रहे हैं, जल-जंगल-जमीन प्रभावित हो रहे हैं। फैक्ट्री प्रबंधन और पूंजीपतियों के दबाव में आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। यदि मजदूरों की मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन पूरे गिरिडीह का चक्का जाम आंदोलन बन जाएगा।”
उन्होंने महंगाई, पेट्रोल-डीजल कीमतों और सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि जनता अब सब समझ रही है।
विनोद सिंह ने कहा — “ईंट से ईंट बजा देंगे”
पूर्व विधायक विनोद सिंह ने अपने संबोधन में गिरिडीह की ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि औद्योगिक विस्तार के नाम पर खेती योग्य जमीन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
विनोद सिंह ने कहा:
“हम उद्योग के विरोधी नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। 70 से 75 प्रतिशत स्थानीय मजदूर रखने का नियम लागू क्यों नहीं किया जा रहा? फैक्ट्री प्रबंधन यह सोच रहा है कि माले और मजदूर संगठन पीछे हट जाएंगे, तो यह उनकी भूल है। जरूरत पड़ी तो महीनों और सालों तक आंदोलन चलेगा।”
उन्होंने कहा कि आंदोलन अब सिर्फ चतरो या टुंडी रोड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे गिरिडीह के मजदूरों को जोड़ा जाएगा।
अन्य नेताओं ने भी प्रबंधन पर साधा निशाना
भाकपा माले जिला सचिव अशोक पासवान ने कहा कि गिरिडीह के मजदूरों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अशोक पासवान ने कहा:
“मजदूरों के साथ अन्याय हुआ तो पूरा संगठन सड़क पर उतरेगा। मजदूरों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से और मजबूती से लड़ी जाएगी।”
किसान नेता पूरन महतो ने फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया।
पूरन महतो ने कहा:
“मजदूरों को जानवरों की तरह ट्रीट किया जा रहा है। यह अन्याय अब नहीं चलेगा। किसान और मजदूर मिलकर संघर्ष को और मजबूत करेंगे।”
माले नेता कन्हाई पांडेय ने कहा कि मजदूरों का हक छीना नहीं जाने दिया जाएगा।
कन्हाई पांडेय ने कहा:
“मजदूरों को बिना नोटिस हटाना पूरी तरह गलत है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।”
राजेश सिन्हा ने जनता से समर्थन की अपील की
माले नेता राजेश सिन्हा ने औद्योगिक क्षेत्र के लोगों से आंदोलन के समर्थन में आगे आने की अपील की।
राजेश सिन्हा ने कहा:
“औद्योगिक क्षेत्र की जनता को अब खुलकर विरोध करना होगा। मजदूरों की लड़ाई सिर्फ मजदूरों की नहीं बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है।”
उन्होंने कहा कि जनता को यह समझना होगा कि कौन उनके साथ खड़ा है और कौन सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देता है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया जायजा
धरना स्थल पर अनुमंडल अधिकारी धीरेन्द्र कुमार, अंचल अधिकारी जितेंद्र प्रसाद, एसडीपीओ जितवाहन उरांव, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी राजेश कुमार सहित कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
प्रशासन ने फैक्ट्री के अंदर मौजूद मजदूरों से भी बातचीत की और कहा कि यदि कोई दबाव महसूस कर रहा हो तो बाहर निकल सकता है।
आंदोलन को और तेज करने की तैयारी
धरना स्थल से नेताओं ने साफ संकेत दिया कि आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा होगा। माले नेता मसूदन कोल ने मजदूरों से अपील की कि वे एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाएं।
मसूदन कोल ने कहा:
“धरना जारी रहेगा। अब यह लड़ाई मजदूरों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।”
जिला कमिटी ने संकेत दिया कि आगे गिरिडीह के विभिन्न मार्गों पर भी आंदोलन किया जा सकता है।
बड़ी संख्या में महिला-पुरुष रहे मौजूद
धरना कार्यक्रम में कन्हैया पाण्डेय, किशोर राय, हुबलाल राय, दीपक गोस्वामी, सुनील ठाकुर, मधुसूदन कोल, तुलसी तुरी, नबीन पाण्डेय, पवन यादव, भिखारी राय, दिलचंद कोल, अरबिंद टुडू, भीम कोल, मोहन कोल, बाबूलाल बास्की, राजन तुरी, प्रसादी राय, निमिया देवी, पार्वती देवी, सरिता देवी, ललिता देवी, जसमी देवी, सोनी देवी करनी देवी, नौशाद आलम, तबारक चुन्नू, एकराम और मजहर समेत हजारों महिला-पुरुष मौजूद रहे।
न्यूज़ देखो: मजदूर आंदोलन अब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा
बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ जारी आंदोलन अब केवल पांच मजदूरों की छंटनी का मामला नहीं रह गया है। यह आंदोलन स्थानीय रोजगार, प्रदूषण, श्रम कानून, प्रशासनिक जवाबदेही और औद्योगिक नीति जैसे बड़े सवालों को सामने ला रहा है। लगातार बढ़ती भीड़ और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। अब प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों की आवाज को दबाना नहीं, सुनना जरूरी है
किसी भी उद्योग की असली ताकत उसके मजदूर होते हैं। जब मजदूर अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरते हैं, तो यह केवल रोजगार का सवाल नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का विषय बन जाता है।
जरूरत है कि प्रशासन, उद्योग प्रबंधन और जनप्रतिनिधि संवाद और समाधान की दिशा में गंभीर पहल करें। संघर्ष तभी खत्म होगा जब न्याय और सम्मान दोनों सुनिश्चित होंगे।
आप भी मजदूरों, किसानों और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय कमेंट में जरूर दें। खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और जनहित की आवाज को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).