बैगलेस डे में बच्चों ने दिखाया हुनर, पढ़ाई बनी खेल-खेल में सीखने का उत्सव

बैगलेस डे में बच्चों ने दिखाया हुनर, पढ़ाई बनी खेल-खेल में सीखने का उत्सव

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #शिक्षा_पहल : उत्क्रमित उच्च विद्यालय ओबरा में बैगलेस डे — बिना बैग के बच्चों ने सीखी रचनात्मक गतिविधियां।

गढ़वा के उत्क्रमित उच्च विद्यालय ओबरा में 24 अप्रैल को बैगलेस डे का आयोजन किया गया। इस दौरान कक्षा 6 से 8 के छात्र-छात्राओं ने बिना बैग के विद्यालय आकर विभिन्न रचनात्मक और शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लिया। कार्यक्रम झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निर्देशानुसार आयोजित हुआ। बच्चों ने कविता, खेल, वाद-विवाद और प्रयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का नया अनुभव प्राप्त किया।

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  • 24 अप्रैल को ओबरा स्कूल में बैगलेस डे का आयोजन।
  • कक्षा 6 से 8 के छात्र-छात्राएं बिना बैग पहुंचे विद्यालय।
  • कविता, खेल, वाद-विवाद सहित कई रचनात्मक गतिविधियां आयोजित।
  • शिक्षकों ने बच्चों को अनुभवात्मक शिक्षा का महत्व बताया।
  • बच्चों ने दिन को बताया आनंददायक और सीख से भरपूर।

गढ़वा। शिक्षा को रोचक और व्यवहारिक बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए उत्क्रमित उच्च विद्यालय ओबरा, गढ़वा में शुक्रवार 24 अप्रैल को बैगलेस डे का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रांची के निदेशक शशि रंजन के निर्देश के आलोक में आयोजित हुआ, जिसके तहत कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए बैगलेस डे मनाने का प्रावधान है।

इस दिन सभी छात्र-छात्राएं बिना पुस्तक, कॉपी और बैग के विद्यालय पहुंचे और पूरे दिन विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को किताबों के बोझ से अलग कर उन्हें अनुभवात्मक और रचनात्मक शिक्षा से जोड़ना था।

गतिविधियों से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत शारीरिक गतिविधियों के साथ की गई, जिससे बच्चों में उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ। इसके बाद छात्रों ने अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत में कविताएं प्रस्तुत कीं, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।

रचनात्मक और प्रयोगात्मक गतिविधियों से सीख

विद्यालय की शिक्षिका सरोजनी डोढराय ने बच्चों को कई रोचक गतिविधियों में शामिल किया। एक गतिविधि में बच्चों को बिना बोले अपने दिनचर्या के बारे में बताना था, जिससे उनकी अभिनय और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास हुआ। इसके अलावा उन्होंने बच्चों को प्रेरणादायक कहानी भी सुनाई।

खेल और प्रतियोगिताओं ने बढ़ाया उत्साह

बैगलेस डे के दौरान छात्रों के बीच कैरम प्रतियोगिता, पंजा लड़ाना और वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों ने बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना के साथ-साथ टीम वर्क और संवाद कौशल को भी मजबूत किया।

गीत-संगीत और जागरूकता का संगम

शिक्षिका सलमा बानो शेख ने बैगलेस डे से संबंधित गीत प्रस्तुत किया, वहीं शिक्षक राम लगन राम ने बच्चों को प्रेरणा गीत सुनाकर उन्हें उत्साहित किया।
ओबरा सीआरसी के संकुल साधन सेवी चंद्रशेखर दुबे ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए बच्चों को इसके महत्व के बारे में बताया और शिक्षकों को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

पौधों का अवलोकन और पर्यावरण शिक्षा

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को पौधों का अवलोकन कराया गया, जिसमें शिक्षिका सलमा बानो शेख और शिक्षक ब्रजेश साह ने पौधों की विशेषताओं और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इससे बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी।

शिक्षकों और प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार वर्ष में 10 दिनों तक बैगलेस डे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बच्चों को इसके लाभों के बारे में विस्तार से बताया और इसे शिक्षा में नवाचार का महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए राम लगन राम और अमित रंजन को प्रभारी बनाया गया था। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक गुलाब रब्बानी अंसारी, योगेश्वर राम, मोहम्मद नौशाद वारिस सिद्दीकी, मोहम्मद आशिक अंसारी, रामनरेश सिंह, सुरेश राम, विक्की कुमार सिंह, सद्दाम अंसारी, निशा कुमारी, सीमा कुमारी, सुचिता एक्का, रेखा मिंज, नूतन सरिता डुंगडुंग सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

बच्चों ने साझा किया अपना अनुभव

कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह दिन उनके लिए आनंददायक, रोमांचक और सीख से भरपूर रहा। बच्चों ने उत्साह के साथ नारा लगाया—
“बैगलेस डे आज है, बैगलेस डे कैसा रहा—आनंददायक रहा।”

कार्यक्रम का समापन अमित रंजन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

न्यूज़ देखो: नई शिक्षा पद्धति की ओर बढ़ता कदम

गढ़वा के ओबरा विद्यालय में आयोजित बैगलेस डे यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। इस तरह की पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाती है।
अब जरूरी है कि इस पहल को सभी विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि बच्चों को सीखने का बेहतर वातावरण मिल सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सीख को बनाएं रोचक, बच्चों के भविष्य को करें मजबूत

शिक्षा का असली उद्देश्य बच्चों को जीवन के लिए तैयार करना है, न कि केवल परीक्षा के लिए।
ऐसे कार्यक्रम बच्चों को आत्मविश्वासी, रचनात्मक और जागरूक बनाते हैं।
आइए हम सभी मिलकर ऐसी पहल का समर्थन करें और बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल दें।
आपकी क्या राय है बैगलेस डे पर? कमेंट करें, खबर को शेयर करें और शिक्षा में बदलाव की इस मुहिम को आगे बढ़ाएं।

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गढ़वा

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