“आपन सरस्वतिया” अभियान के 15वें दिन नदी से हटाए गए अवरोध, पुनर्जीवन कार्य को मिली नई गति

“आपन सरस्वतिया” अभियान के 15वें दिन नदी से हटाए गए अवरोध, पुनर्जीवन कार्य को मिली नई गति

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #नदी_पुनर्जीवन : जनसहयोग से सरस्वतिया नदी की सफाई और चौड़ीकरण कार्य जारी रहा।

गढ़वा में सरस्वतिया नदी के पुनर्जीवन के लिए चलाए जा रहे “आपन सरस्वतिया” अभियान का सोमवार को 15वां दिन रहा। अभियान के तहत नदी के प्रवाह में बाधा बनने वाले सूखे पेड़ों, डालियों और अन्य अवरोधों को हटाया गया। प्रशासन और स्थानीय लोगों की सहभागिता से नदी की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का कार्य लगातार जारी है। इस पहल का उद्देश्य नदी के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्स्थापित कर जल प्रवाह को सुचारू बनाना है।

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  • “आपन सरस्वतिया” अभियान के तहत 15वें दिन भी नदी सफाई और डी-सिल्टिंग का कार्य जारी रहा।
  • जोबरैया और पिपरा कला के बीच नदी क्षेत्र से जल प्रवाह में बाधा बने अवरोध हटाए गए।
  • नदी के बीच पड़े सूखे पेड़, बड़ी डालियां और अन्य अवरोध मशीनों की मदद से हटाए गए।
  • संत मरियम आवासीय विद्यालय, मेदिनीनगर के चेयरमैन अविनाश देव के सहयोग से अभियान संचालित हुआ।
  • स्थानीय नागरिकों ने सफाई अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए नदी संरक्षण का संकल्प लिया।
  • प्रशासन ने नदी को स्वच्छ और अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए जनसहयोग जारी रखने की अपील की।

गढ़वा जिले में सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में चल रहा “आपन सरस्वतिया” अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। सोमवार को अभियान के 15वें दिन भी प्रशासन, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से नदी की सफाई, डी-सिल्टिंग और चौड़ीकरण का कार्य किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करना और भविष्य में जल संरक्षण को मजबूत आधार प्रदान करना है।

जोबरैया और पिपरा कला के बीच चला अभियान

सोमवार को अभियान गढ़वा प्रखंड कार्यालय के सामने स्थित जोबरैया एवं पिपरा कला के बीच नदी क्षेत्र में संचालित किया गया। इस दौरान नदी के बीच वर्षों से पड़े सूखे एवं टूटे हुए वृक्षों, बड़ी-बड़ी डालियों और जलधारा को अवरुद्ध करने वाले विभिन्न स्थायी एवं अस्थायी अवरोधों को हटाया गया।

नदी के कई हिस्सों में गाद जमने और प्रवाह बाधित होने की समस्या सामने आ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए मशीनों की सहायता से व्यापक सफाई कार्य किया गया। साथ ही कई स्थानों पर नदी का चौड़ीकरण भी किया गया ताकि बरसात के दौरान जल निकासी बेहतर तरीके से हो सके।

वर्षों पुराने अवरोध बने थे समस्या

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से नदी के भीतर गिरे पेड़ और अन्य अवरोध जल प्रवाह को प्रभावित कर रहे थे। बरसात के मौसम में इन अवरोधों के कारण पानी का बहाव बाधित हो जाता था, जिससे कई जगहों पर गाद का जमाव बढ़ जाता था।

अभियान के दौरान इन अवरोधों को हटाकर नदी को उसके मूल स्वरूप में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया। इससे न केवल जल प्रवाह बेहतर होगा बल्कि भविष्य में नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

अविनाश देव के सहयोग से हुई मशीनों की व्यवस्था

सोमवार का सफाई एवं डी-सिल्टिंग अभियान मेदिनीनगर स्थित संत मरियम आवासीय विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव के सहयोग से संचालित किया गया। उनके सौजन्य से आवश्यक मशीनों की व्यवस्था की गई, जिससे नदी क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्य करना संभव हो सका।

प्रशासन ने इस सहयोग को अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान बताया। जनभागीदारी और सामाजिक सहयोग को इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

प्रशासन ने सराहा सामाजिक सहयोग

अभियान के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने अविनाश देव के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि नदी संरक्षण जैसे सार्वजनिक कार्य तभी सफल होते हैं जब समाज के विभिन्न वर्ग सक्रिय रूप से जुड़ते हैं।

अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा: “समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। जब गढ़वा की भौगोलिक सीमा से बाहर के लोग भी किसी सार्वजनिक उद्देश्य को अपना अभियान मानकर सहयोग करते हैं, तब सकारात्मक परिणाम स्वाभाविक रूप से सामने आते हैं।”

उन्होंने कहा कि प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकेगा।

स्थानीय लोगों ने निभाई सक्रिय भूमिका

अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लिया। लोगों ने सफाई कार्य में सहयोग किया और नदी संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कई ग्रामीणों ने नदी क्षेत्र को स्वच्छ बनाए रखने और भविष्य में कचरा नहीं फेंकने का संकल्प लिया।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह जनसहयोग मिलता रहा तो सरस्वतिया नदी एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप में लौट सकती है और क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत के रूप में विकसित हो सकती है।

जनआंदोलन का रूप ले रहा है “आपन सरस्वतिया”

प्रशासन के अनुसार “आपन सरस्वतिया” अभियान अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। पिछले 15 दिनों से शिक्षाविदों, व्यवसायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों का निरंतर सहयोग अभियान को मिल रहा है।

अभियान के तहत नदी की सफाई, डी-सिल्टिंग, अतिक्रमण हटाने और जल संरक्षण को लेकर लगातार कार्य किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य नदी को पूरी तरह स्वच्छ, प्रवाहमान और संरक्षित बनाना है।

न्यूज़ देखो: जनसहयोग से बदल रही नदी की तस्वीर

सरस्वतिया नदी के पुनर्जीवन का यह अभियान प्रशासन और समाज की साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। लगातार 15 दिनों तक चल रहा यह प्रयास दर्शाता है कि यदि जनभागीदारी मजबूत हो तो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है। नदी केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी, संस्कृति और भविष्य से जुड़ी धरोहर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अभियान की निरंतरता और संरक्षण के लिए आगे क्या स्थायी कदम उठाए जाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

नदी बचेगी तो भविष्य सुरक्षित रहेगा

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।

नदियां जीवन देती हैं, खेती को सहारा देती हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखती हैं।

यदि हम आज अपनी नदियों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने का संकल्प लें, तो आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर प्राकृतिक विरासत दे सकते हैं।

अपने आसपास के जल स्रोतों की रक्षा करें, सफाई के प्रति जागरूक रहें और ऐसे जनहित अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

आप सरस्वतिया नदी पुनर्जीवन अभियान के बारे में क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को साझा करें और जल संरक्षण के इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।

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गढ़वा

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