#गढ़वा #स्वास्थ्य_जांच : नर्सिंग होम निरीक्षण में मिली भारी अनियमितता — बिना डॉक्टर ऑपरेशन और इलाज पर उठे सवाल।
गढ़वा में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने विभिन्न निजी नर्सिंग होम का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद मरीज भर्ती मिले, लेकिन चिकित्सक मौजूद नहीं थे। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर कई अस्पतालों को बंद करने का निर्देश दिया गया। मामले में संबंधित डॉक्टरों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
- सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने कई नर्सिंग होम का किया निरीक्षण।
- जी एन हॉस्पिटल, सहारा हॉस्पिटल, रिशु राज हॉस्पिटल में मिली अनियमितता।
- ऑपरेशन के बाद मरीज भर्ती, लेकिन चिकित्सक रहे नदारद।
- गंभीर खामियां मिलने पर कई अस्पतालों को बंद करने का निर्देश।
- निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों पर भी कार्रवाई की तैयारी।
गढ़वा। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से शुक्रवार को सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने शहर के विभिन्न निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद सिविल सर्जन ने तत्काल सख्त कदम उठाते हुए संबंधित अस्पतालों को बंद करने का निर्देश दिया।
निरीक्षण के दौरान उनके साथ जिला के डीडीएम सुजीत मुंडा भी मौजूद थे। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया।
कई अस्पतालों में मरीज मिले, डॉक्टर गायब
सिविल सर्जन ने शहर में संचालित जी एन हॉस्पिटल, सहारा हॉस्पिटल, रिशु राज हॉस्पिटल और चंद्रिका हॉस्पिटल सहित कई नर्सिंग होम का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान जी एन हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद भर्ती एक मरीज मिला, जबकि सहारा हॉस्पिटल में एक मरीज को रक्त चढ़ाया जा रहा था। वहीं रिशु राज हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद भर्ती पांच मरीज पाए गए।
सबसे गंभीर बात यह रही कि इन अस्पतालों में इलाज और ऑपरेशन के बावजूद मौके पर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं मिला।
अस्पष्ट जवाब मिलने पर सख्ती
जब सिविल सर्जन ने अस्पताल संचालकों से पूछा कि ऑपरेशन किस डॉक्टर की निगरानी में किए गए हैं, तो संचालकों ने डॉ. मनोज दास और डॉ. कुश कुमार का नाम लिया।
हालांकि मौके पर संबंधित चिकित्सकों की अनुपस्थिति और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने पर सिविल सर्जन ने नाराजगी जताई और संबंधित अस्पतालों को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया।
डॉ. जॉन एफ केनेडी ने कहा: “मरीजों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन अस्पतालों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
चंद्रिका हॉस्पिटल में नहीं मिला कोई मरीज
निरीक्षण के दौरान चंद्रिका हॉस्पिटल का भी जायजा लिया गया, लेकिन वहां एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला। इसके बावजूद अस्पताल की व्यवस्थाओं और दस्तावेजों की जांच की गई।
सरकारी अस्पताल के बाद निजी प्रैक्टिस पर सवाल
निरीक्षण के दौरान एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। विभिन्न अस्पताल संचालकों ने बताया कि जिले के कई छोटे नर्सिंग होम और झोलाछाप अस्पताल कथित तौर पर कुछ डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
सिविल सर्जन ने कहा कि यदि ये चिकित्सक निजी अस्पतालों में इतने ऑपरेशन कर सकते हैं, तो सरकारी अस्पतालों में भी गरीब मरीजों को उसी स्तर की सुविधा मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी ड्यूटी के बाद निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
गरीब मरीजों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद जिले में निजी अस्पतालों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। आम लोगों का कहना है कि कई निजी नर्सिंग होम बिना पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ डॉक्टरों के संचालन में हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
आगे और कार्रवाई की संभावना
सिविल सर्जन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की भी जांच की जाएगी। जिन संस्थानों में नियमों की अनदेखी मिलेगी, उनके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई होगी।
न्यूज़ देखो: मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई जरूरी
गढ़वा में स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई बताती है कि निजी अस्पतालों में निगरानी की कितनी जरूरत है। बिना डॉक्टर के ऑपरेशन और इलाज होना गंभीर चिंता का विषय है।
जरूरी है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो, ताकि गरीब और आम मरीज सुरक्षित इलाज पा सकें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक बनें, सुरक्षित इलाज का अधिकार पहचानें
इलाज करवाने से पहले अस्पताल और डॉक्टर की जानकारी जरूर लें।
आपकी सतर्कता ही आपके परिवार की सुरक्षा है।
गलत व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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