#बरवाडीह #सरहुल_पर्व : सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना के साथ होगा आयोजन।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत खुरा पंचायत के खुरा गांव में शुक्रवार को पारंपरिक सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। पर्व को लेकर गांव में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। धरती माता और दुरजागीन माता की पूजा विधि-विधान के साथ की जाएगी। ग्रामीणों में पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारी की गई है।
- खुरा गांव में कल धूमधाम से मनाया जाएगा सरहुल पर्व।
- धरती माता एवं दुरजागीन माता की होगी विधिवत पूजा।
- गांव के गउवा दिलीप कुमार साहू ने दी आयोजन की जानकारी।
- बैगा महेन्द्र सिंह की उपस्थिति में संपन्न होंगे धार्मिक अनुष्ठान।
- सुबह 11 बजे से शुरू होंगे पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- ग्रामीणों में पर्व को लेकर दिख रहा खासा उत्साह।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत खुरा पंचायत के खुरा गांव में शुक्रवार को पारंपरिक सरहुल पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर गांव में अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और ग्रामीण सामूहिक रूप से आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।
सरहुल पर्व आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व माना जाता है, जिसमें धरती, जल, जंगल और प्रकृति के प्रति आस्था व्यक्त की जाती है। इस अवसर पर गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
धरती माता और दुरजागीन माता की होगी पूजा
गांव के गउवा दिलीप कुमार साहू ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरहुल पर्व श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पर्व गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना को लेकर आयोजित किया जाता है।
दिलीप कुमार साहू ने कहा: “सरहुल पर्व हमारी संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गांव के सभी लोग मिलकर इसे भाईचारे और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।”
उन्होंने बताया कि पर्व के दौरान धरती माता एवं दुरजागीन माता की विशेष पूजा की जाएगी।
बैगा महेन्द्र सिंह की उपस्थिति में होंगे धार्मिक अनुष्ठान
ग्रामीणों के अनुसार गांव के बैगा महेन्द्र सिंह की उपस्थिति में सभी धार्मिक कार्यक्रम विधि-विधान के साथ संपन्न होंगे। पूजा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाएगा और गांव की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाएगी।
ग्रामीणों का मानना है कि सरहुल पर्व प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाता है। यह पर्व लोगों को एकजुटता और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है।
ढोल-नगाड़ों के साथ होगा सांस्कृतिक आयोजन
ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार सुबह 11 बजे से पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर लोग नृत्य और गीत प्रस्तुत करेंगे।
गांव के युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। आयोजन को लेकर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखा जा रहा है।
आपसी भाईचारे का प्रतीक है सरहुल
ग्रामीणों का कहना है कि सरहुल पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। इस अवसर पर गांव के सभी लोग मिलजुल कर आयोजन में भाग लेते हैं और सामूहिक रूप से खुशियां मनाते हैं।
गांव में साफ-सफाई और पूजा स्थल की सजावट का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। महिलाएं पारंपरिक व्यंजन तैयार करने में जुटी हुई हैं।
संस्कृति संरक्षण का संदेश
स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक दौर में भी पारंपरिक त्योहारों और संस्कृति को जीवित रखना जरूरी है। सरहुल जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह के आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं।
न्यूज़ देखो: प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव का पर्व है सरहुल
सरहुल पर्व केवल एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामूहिक एकता का प्रतीक है। खुरा गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होने वाला यह आयोजन स्थानीय संस्कृति को जीवित रखने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा सकता है। ऐसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और प्रकृति संरक्षण के महत्व से जोड़ते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी संस्कृति से जुड़ाव ही हमारी असली पहचान
पारंपरिक पर्व और सांस्कृतिक आयोजन समाज को एकजुट रखने का कार्य करते हैं। अपनी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति सम्मान बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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