Palamau

मनरेगा बचाने के लिए कांग्रेस का जनआंदोलन तेज, 5 जनवरी को राष्ट्रव्यापी पदयात्रा

#पलामू #मनरेगा_बचाओ : केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ अभियान तेज किया।

पलामू में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से 5 जनवरी 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान पदयात्रा को लेकर एक अहम प्रेसवार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष बिमला कुमारी और पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। नेताओं ने इसे गरीबों के रोजगार और अधिकारों पर सीधा हमला बताया। कांग्रेस ने इस अभियान को जनअधिकारों की रक्षा का आंदोलन करार दिया।

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  • 5 जनवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ अभियान पदयात्रा।
  • पलामू में जिला कांग्रेस कमेटी की अहम प्रेसवार्ता।
  • जिला अध्यक्ष बिमला कुमारी और पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी ने किया संबोधित।
  • मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने का आरोप।
  • गरीबों, मजदूरों और ग्रामीणों के रोजगार पर खतरे की चेतावनी।
  • बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी “मनरेगा बचाओ अभियान” को लेकर पलामू जिला कांग्रेस कमेटी ने आंदोलन को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मेदिनीनगर, पलामू में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला और मनरेगा को बचाने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष की बात कही।

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए पलामू जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुश्री बिमला कुमारी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा जैसी ऐतिहासिक जनकल्याणकारी योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने की साजिश केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों गरीबों के रोजगार, अधिकार और गरिमा पर सीधा हमला है।

मनरेगा पर हमला गरीबों पर हमला: बिमला कुमारी

बिमला कुमारी ने कहा कि मनरेगा देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना है, जिसने ग्रामीण भारत को आर्थिक संबल दिया है। इस योजना से मजदूरों को सम्मान के साथ काम और मजदूरी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस योजना को कमजोर कर रही है, ताकि गरीबों की आवाज को दबाया जा सके।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

बिमला कुमारी ने कहा: “कांग्रेस पार्टी मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। सड़क से लेकर जनमानस तक हम इस जनविरोधी फैसले का विरोध करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि “मनरेगा बचाओ अभियान” के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक करेंगे और सरकार के फैसले के खिलाफ जनमत तैयार करेंगे।

संविधान की भावना के खिलाफ है मनरेगा को कमजोर करना: के.एन. त्रिपाठी

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री श्री के.एन. त्रिपाठी ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित ग्रामीण सशक्तिकरण की सबसे मजबूत योजना रही है। इसे कमजोर करना या इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करना सीधे तौर पर संविधान की भावना के खिलाफ है।

उन्होंने कहा:

के.एन. त्रिपाठी ने कहा: “भाजपा सरकार लगातार जनकल्याणकारी योजनाओं को खत्म करने या उनके चरित्र को बदलने का प्रयास कर रही है, जिससे गरीब, किसान और मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।”

उन्होंने 5 जनवरी 2026 को होने वाली पदयात्रा को सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनअधिकारों की रक्षा का आंदोलन बताया और आम जनता से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।

पदयात्रा की रूपरेखा और उद्देश्य

प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने “मनरेगा बचाओ अभियान” पदयात्रा की रूपरेखा, उद्देश्य और आंदोलन की दिशा पर भी विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि यह पदयात्रा मनरेगा के महत्व, इसके सामाजिक प्रभाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका को जनता के सामने रखने का माध्यम बनेगी।

कांग्रेस का कहना है कि इस आंदोलन के जरिए केंद्र सरकार को यह संदेश दिया जाएगा कि मनरेगा के साथ किसी भी तरह का समझौता देश के गरीबों के साथ अन्याय होगा।

बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता रहे मौजूद

इस प्रेसवार्ता में कांग्रेस संगठन के कई वरिष्ठ और सक्रिय नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में शिक्षा प्रकोष्ठ के स्टेट चेयरमैन श्याम नारायण सिंह, रामाशीष पाण्डेय, विनोद तिवारी, ओमप्रकाश अमन, रामदेव यादव, ब्रह्मदेव प्रसाद, गोपाल त्रिपाठी, मुकेश सिंह, राजेश चौरसिया, जिला प्रवक्ता गोपाल सिंह, मणिकांत, रामप्रवेश सिंह, रंजन दुबे, जितेंद्र कमलापुरी, धनंजय त्रिपाठी, जिशान खान, मुन्ना खान, नदीम खान, टिकैत कुमार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

नेताओं की मौजूदगी से यह साफ संकेत मिला कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह से एकजुट है और इसे बड़े आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है।

न्यूज़ देखो: मनरेगा बनाम सरकार की नीति

मनरेगा को लेकर कांग्रेस का यह आक्रामक रुख आने वाले दिनों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा सकता है। यह मुद्दा केवल योजना का नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध को कैसे संबोधित करती है। 5 जनवरी की पदयात्रा इस आंदोलन की दिशा और दशा तय कर सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

रोजगार और अधिकार की लड़ाई में आपकी भूमिका अहम

मनरेगा जैसे कार्यक्रम लाखों परिवारों की जिंदगी से जुड़े हैं। ऐसे में जरूरी है कि नागरिक इस मुद्दे पर सजग रहें और सही जानकारी रखें। आप भी इस विषय पर अपनी राय रखें, चर्चा करें और खबर को साझा कर लोगों को जागरूक करें। आपकी भागीदारी ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

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