छारदा के खुदिया टोली रोड में हरे पेड़ों की कटाई पर विवाद, आदिवासी ग्रामीणों ने लगाया तथ्य छुपाने का आरोप

छारदा के खुदिया टोली रोड में हरे पेड़ों की कटाई पर विवाद, आदिवासी ग्रामीणों ने लगाया तथ्य छुपाने का आरोप

author Udaychand Kumar
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#सिसई #पेड़कटाईविवाद : विवादित जमीन पर पेड़ कटाई को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच की मांग की।

गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र स्थित खुदिया टोली छारदा रोड में विवादित जमीन पर हरे पेड़ों की कटाई को लेकर नया विवाद सामने आया है। आदिवासी ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जमीन संबंधी तथ्य छुपाकर पेड़ काटने की अनुमति ली गई और 20 से अधिक आम के पेड़ काट दिए गए। मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन और थाना से जांच की मांग की है।

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  • खुदिया टोली छारदा रोड में हरे पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराया।
  • आदिवासी ग्रामीणों ने तथ्य छुपाकर परमिशन लेने का आरोप लगाया।
  • ग्रामीणों के अनुसार विवादित जमीन पर लगे थे 20 से अधिक आम के पेड़
  • मामला खाता संख्या 73, प्लॉट संख्या 784 से जुड़ा बताया गया।
  • ग्रामीणों ने सिसई थाना और अंचल कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
  • पेड़ काटने वाले पक्ष ने कहा कि उन्हें वन विभाग से अनुमति प्राप्त है।

गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र अंतर्गत खुदिया टोली छारदा रोड में विवादित जमीन पर पेड़ कटाई को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। आदिवासी ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जमीन से जुड़े वास्तविक तथ्यों को छुपाकर हरे-भरे पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति प्राप्त की गई और अब बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर पेड़ काटे गए हैं, वह लंबे समय से विवादित है और इसको लेकर पहले से न्यायालय में मामला चल चुका है। पेड़ों की कटाई के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है।

जमीन विवाद से जुड़ा है मामला

ग्रामीण अशोक भगत, मंजू देवी एवं अन्य परिजनों ने बताया कि सिसई मौजा के खाता संख्या 73, प्लॉट संख्या 784, रकबा एक एकड़ 90 डिसमिल जमीन को वर्षों पहले शेख मकरु ने खुदिया उरांव को बदले में दिया था।

इसके एवज में खुदिया उरांव से मौजा सिसई के खाता संख्या 20, प्लॉट संख्या 1233 एवं 1234 की जमीन ली गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में खुदिया उरांव से प्राप्त जमीन को शेख मकरु के वारिसों ने बेच दिया और अब बदले में दी गई जमीन पर भी दावा किया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार इस जमीन पर खुदिया उरांव द्वारा लगाए गए आम के बड़े-बड़े पेड़ मौजूद थे।

न्यायालय तक पहुंचा था विवाद

ग्रामीणों ने बताया कि जमीन के हक और स्वामित्व को लेकर खुदिया उरांव के वारिसों ने न्यायालय में वाद दायर किया था। हालांकि शुरुआती स्तर पर वह मामला खारिज हो गया था।

इसके बावजूद जमीन को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी विवाद के बीच वास्तविक स्थिति छुपाकर पेड़ काटने की अनुमति प्राप्त कर ली गई।

ग्रामीणों ने कहा: “विवादित जमीन का पूरा तथ्य बताए बिना अनुमति ली गई और अब हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है।”

20 से अधिक पेड़ काटने का आरोप

आदिवासी ग्रामीणों का दावा है कि अब तक 20 से अधिक बड़े आम के पेड़ काटे जा चुके हैं। उनका कहना है कि ये पेड़ वर्षों पुराने और पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण थे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है बल्कि उनके सामाजिक और पारंपरिक अधिकारों पर भी असर पड़ा है।

घटना के बाद ग्रामीणों ने सिसई अंचल कार्यालय और सिसई थाना में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

वन विभाग की अनुमति का दावा

दूसरी ओर पेड़ कटाई करा रहे शौकत अंसारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें वन विभाग से विधिवत अनुमति प्राप्त है।

शौकत अंसारी ने कहा: “हमें वन विभाग से पेड़ काटने का परमिशन मिला हुआ है। उसी अनुमति के आधार पर कार्य किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पेड़ काटे जा रहे हैं और किसी प्रकार की अवैध गतिविधि नहीं की जा रही है।

ग्रामीणों ने जांच की मांग उठाई

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तथ्य छुपाकर अनुमति ली गई है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

लोगों ने यह भी मांग की कि विवादित जमीन से जुड़े दस्तावेजों और अनुमति प्रक्रिया की जांच की जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी चिंता

हरे पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण संरक्षण की चिंता भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया कि बिना स्पष्ट जांच और स्वामित्व विवाद सुलझाए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई जाए।

न्यूज़ देखो: जमीन विवाद और पर्यावरण संरक्षण दोनों पर गंभीरता जरूरी

यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। यदि विवादित जमीन पर तथ्य छुपाकर अनुमति ली गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर नियंत्रण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पर्यावरण बचाना और अधिकारों की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी

पेड़ केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा भी हैं। किसी भी विवाद का समाधान कानून और पारदर्शिता के माध्यम से होना चाहिए।

अपने आसपास हो रही गलत गतिविधियों के प्रति जागरूक बनें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं। खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और समाज में जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश फैलाएं।

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Written by

सिसई, गुमला

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