#सिमडेगा #शिक्षा_मुद्दा : वार्ड 17 के विद्यालयों में मानदेय वृद्धि और भुगतान को लेकर पहल की गई।
नगर परिषद सिमडेगा के वार्ड संख्या 17 में कार्यरत सहायक अध्यापकों की लंबित मानदेय वृद्धि को लेकर वार्ड पार्षद चंदन डे ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन सौंपा है। वर्ष 2023 से 4 प्रतिशत वृद्धि लंबित है, जिससे शिक्षकों में असंतोष है। आवेदन में मिड डे मील भुगतान और विद्यालयी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। इस पर विभाग ने सकारात्मक आश्वासन दिया है।
- वार्ड संख्या 17 के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का मुद्दा उठाया गया।
- वर्ष 2023 से 4% मानदेय वृद्धि लंबित होने की शिकायत।
- पार्षद चंदन डे ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा आवेदन।
- मिड डे मील भुगतान और खेल सुविधाओं का मुद्दा भी शामिल।
- विभाग की ओर से जल्द समाधान का सकारात्मक आश्वासन।
नगर परिषद सिमडेगा के वार्ड संख्या 17 में संचालित विद्यालयों में कार्यरत सहायक अध्यापकों की समस्याओं को लेकर पहल की गई है। वार्ड पार्षद चंदन डे ने शिक्षकों से प्राप्त शिकायत के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय पहुंचकर आवेदन सौंपा। इस आवेदन में मानदेय वृद्धि के साथ-साथ अन्य जरूरी मुद्दों को भी शामिल किया गया है।
वार्ड 17 के विद्यालयों की स्थिति
वार्ड संख्या 17 में एक उत्क्रमित मध्य विद्यालय तथा एक उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इन दोनों विद्यालयों में कुल तीन सहायक अध्यापक, जिन्हें वर्तमान में पारा शिक्षक के रूप में जाना जाता है, अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से इन शिक्षकों को मानदेय वृद्धि का लाभ नहीं मिल पाने के कारण असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
मानदेय वृद्धि 2023 से लंबित
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 से सहायक अध्यापकों के मानदेय में 4 प्रतिशत वृद्धि लंबित है। इसका मुख्य कारण संबंधित प्राधिकार का गठन नहीं होना बताया जा रहा है। इस समस्या को लेकर शिक्षकों ने लिखित रूप में अपनी बात रखी थी, जिसके बाद यह मामला आगे बढ़ाया गया।
चंदन डे ने कहा: “शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए हमने संबंधित विभाग तक उनकी आवाज पहुंचाने का काम किया है।”
जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा गया आवेदन
वार्ड पार्षद चंदन डे ने जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय कक्ष में पहुंचकर औपचारिक रूप से आवेदन सौंपा। इस आवेदन में केवल मानदेय वृद्धि ही नहीं, बल्कि विद्यालयों में मिड डे मील के भुगतान और खेलकूद सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
मिड डे मील और खेल सुविधाओं पर भी जोर
विद्यालयों में छात्रों को मिलने वाले मिड डे मील के भुगतान में हो रही देरी और खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी को भी आवेदन में रेखांकित किया गया है। इन मुद्दों का सीधा असर बच्चों की शिक्षा और उनके समग्र विकास पर पड़ता है।
चंदन डे ने कहा: “बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि विद्यालयों में सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।”
विभाग की ओर से मिला सकारात्मक आश्वासन
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने आवेदन प्राप्त करने के बाद आश्वस्त किया कि जैसे ही राज्य स्तर से संबंधित निर्णय प्राप्त होगा, भुगतान में किसी प्रकार की देरी नहीं की जाएगी। इससे शिक्षकों और स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा: “राज्य स्तरीय निर्णय मिलते ही लंबित भुगतान में देरी नहीं की जाएगी।”
न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था में छोटे मुद्दे भी बड़े असर डालते हैं
यह मामला दर्शाता है कि शिक्षा व्यवस्था में छोटे-छोटे प्रशासनिक विलंब भी शिक्षकों और छात्रों दोनों को प्रभावित करते हैं। समय पर मानदेय और सुविधाएं उपलब्ध कराना न केवल शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य स्तर पर निर्णय कब आता है और स्थानीय स्तर पर इसका क्रियान्वयन कितनी तेजी से होता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा के प्रति जागरूकता से ही बनेगा मजबूत समाज
शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, यह समाज के विकास की नींव है।
जरूरी है कि हम अपने क्षेत्र के विद्यालयों की स्थिति पर नजर रखें और समस्याओं को उठाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

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