पलामू में निजी स्कूलों की मनमानी पर भाकपा का विरोध, री-एडमिशन फीस वसूली पर कार्रवाई की मांग

पलामू में निजी स्कूलों की मनमानी पर भाकपा का विरोध, री-एडमिशन फीस वसूली पर कार्रवाई की मांग

author News देखो Team
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#पलामू #शिक्षा_विवाद : गढ़वा डीसी की तरह प्राइवेट स्कूल के मनमानी को बंद करें उपायुक्त पलामू – रूचिर तिवारी।

पलामू में निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन और अन्य शुल्क के नाम पर मनमानी वसूली के खिलाफ भाकपा ने आवाज उठाई है। पार्टी नेता रूचिर कुमार तिवारी ने उपायुक्त को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। उन्होंने स्कूलों पर शिक्षा अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया। कार्रवाई नहीं होने पर अभिभावकों के साथ आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

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  • रूचिर कुमार तिवारी ने उपायुक्त को पत्र लिखकर शिकायत की।
  • निजी स्कूलों पर री-एडमिशन फीस में मनमानी वसूली का आरोप
  • कई बड़े स्कूलों का नाम लेकर जांच की मांग
  • शिक्षा अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप
  • कार्रवाई नहीं होने पर प्रदर्शन की चेतावनी

पलामू जिले में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी शुल्क वसूली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव सह डालटेनगंज विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी रूचिर कुमार तिवारी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए उपायुक्त को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि जिले के कई निजी स्कूल अभिभावकों से री-एडमिशन और अन्य शुल्क के नाम पर भारी रकम वसूल रहे हैं।

निजी स्कूलों पर गंभीर आरोप

रूचिर कुमार तिवारी ने अपने पत्र में सेक्रेड हार्ट, डीएवी, संत मरियम, संत जेवियर, लोटस अकैडमी, ऑक्सफोर्ड जैसे स्कूलों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये संस्थान हर वर्ष विभिन्न नामों से अभिभावकों से बड़ी रकम वसूल रहे हैं।

रूचिर तिवारी ने कहा: “री-एडमिशन और एनुअल चार्ज के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है।”

किताबों की खरीद में भी दबाव

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नर्सरी कक्षा के बच्चों के लिए किताबें केवल स्कूल या उनके द्वारा चिन्हित दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है।

इसके अलावा हर साल पाठ्यक्रम में बदलाव कर किताबों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति के उल्लंघन का आरोप

तिवारी ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नई शिक्षा नीति का खुला उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था का पालन नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा: “निजी स्कूल गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा नहीं दे रहे, जो कानून का उल्लंघन है।”

शिक्षा विभाग पर भी सवाल

उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में गंभीर नहीं दिख रहे हैं।

तिवारी ने कहा: “ऐसा लगता है कि अधिकारी इस मुद्दे पर आंखें मूंदे बैठे हैं।”

उपायुक्त से जांच की मांग

रूचिर तिवारी ने पलामू उपायुक्त से मांग की है कि वे स्वयं स्कूलों का निरीक्षण कर जांच करें और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करें।

उन्होंने कहा कि इससे अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर रोक लगेगी।

आंदोलन की चेतावनी

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो भाकपा अभिभावकों के साथ बैठक कर कलेक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन करेगी।

उन्होंने कहा: “जनहित में आंदोलन करना हमारी मजबूरी होगी।”

अभिभावकों में बढ़ती चिंता

इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों में भी चिंता और असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि शिक्षा महंगी होती जा रही है और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है, जहां निजी संस्थानों की मनमानी को लेकर स्पष्ट नियमों का पालन जरूरी है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा या व्यापार?

पलामू का यह मामला दिखाता है कि शिक्षा के नाम पर कई जगह व्यापार हावी हो रहा है। यदि नियमों का पालन नहीं हुआ, तो आम अभिभावकों पर बोझ बढ़ता जाएगा। अब प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट संदेश दे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा को अधिकार बनाएं, बोझ नहीं

हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, न कि बोझ।
जरूरी है कि हम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करें।
अगर कहीं गलत हो रहा है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाएं।
जागरूक अभिभावक ही बदलाव ला सकते हैं।

अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और इस मुद्दे को आगे बढ़ाएं।

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