#मैकलुस्कीगंज #दामोदर_महोत्सव : दामोदर नदी तट पर श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह के बीच महोत्सव सम्पन्न।
रांची जिले के मैकलुस्कीगंज स्थित बघमरी दामोदर नदी तट पर गंगा दशहरा सह दामोदर महोत्सव का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में भाजपा नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन, पूजन और महाआरती आयोजित की गई। आयोजन के दौरान लोगों ने दामोदर नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने का संकल्प भी लिया।
- बघमरी स्थित दामोदर नदी तट पर गंगा दशहरा सह दामोदर महोत्सव आयोजित हुआ।
- भाजपा नेता स्वामी देवेंद्र प्रकाश समेत कई जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।
- पुरोहित सुदामा पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन-पूजन कराया।
- श्रद्धालुओं ने दामोदर नदी को स्वच्छ रखने का सामूहिक संकल्प लिया।
- दोपहर में मेला और शाम में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया।
- आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।
रांची जिले के मैकलुस्कीगंज क्षेत्र अंतर्गत बघमरी स्थित दामोदर नदी तट मंगलवार को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का केंद्र बना रहा। गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित दामोदर महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। पूरे दिन चले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक और सामाजिक सहभागिता का भी विशेष माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत नदी तट पर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन, पूजन और आरती के साथ हुई। पुरोहित सुदामा पांडेय ने मंत्रोच्चारण के बीच श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने दामोदर नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।
धार्मिक अनुष्ठानों से शुरू हुआ महोत्सव
सुबह से ही दामोदर नदी तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर लोगों ने नदी तट पर पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
पुरोहित सुदामा पांडेय ने वैदिक विधि-विधान से हवन और पूजन कराया। मंत्रोच्चारण के बीच वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने दामोदर नदी के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर जागरूकता का संदेश भी दिया।
पुरोहित सुदामा पांडेय ने कहा: “नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आस्था की पहचान हैं। इन्हें स्वच्छ रखना हम सभी का दायित्व है।”
फीता काटकर मेला का शुभारंभ
दोपहर में आयोजित दामोदर मेला का उद्घाटन मुख्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। मेले में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने मेले में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महोत्सव में मुख्य रूप से भाजपा नेता स्वामी देवेंद्र प्रकाश, रांची ग्रामीण के पूर्व उपाध्यक्ष प्रीतम साहू, किसान मोर्चा अध्यक्ष बिंटू नाथ साहदेव, भाजपा खलारी मंडल अध्यक्ष अनिल कुमार गंझू, खलारी मंडल प्रतिनिधि श्याम सुंदर सिंह, शशि प्रसाद साहू, रवि भूषण, दिलीप पासवान और अनिल तूरी उपस्थित रहे।
शाम की महाआरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
संध्या समय दामोदर नदी तट पर आयोजित महाआरती कार्यक्रम ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लेकर धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता निभाई।
दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चारण के बीच दामोदर तट का दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रद्धालुओं ने आरती के दौरान नदी संरक्षण का संदेश भी दिया।
आयोजन में स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका
महोत्सव को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को संभाला।
इस आयोजन में अनंत मुंडा, रबिंद्र मुंडा, बिशेश्वर मुंडा, मनीष भगत, विनोद राणा, पवन भगत, पंकज भगत, पंचम लोहरा, हेमलाल गंझू, त्रिवेणी मुंडा, हरदीप भगत सहित कई लोगों का सराहनीय योगदान रहा।
नदी संरक्षण का दिया गया संदेश
महोत्सव के दौरान लोगों ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि दामोदर नदी क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसे स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान लोगों ने प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ नदी तट बनाने का भी आह्वान किया।

न्यूज़ देखो: धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला आयोजन
मैकलुस्कीगंज में आयोजित दामोदर महोत्सव केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बना। नदी संरक्षण और स्वच्छता का संदेश आज के समय की बड़ी जरूरत है। ऐसे आयोजन समाज को पर्यावरण और संस्कृति दोनों के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नदी बचेगी तो संस्कृति बचेगी, मिलकर प्रकृति की रक्षा करें
हमारी नदियां केवल जलधारा नहीं बल्कि हमारी सभ्यता और परंपरा की पहचान हैं।
धार्मिक आयोजनों के माध्यम से यदि पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचे तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
आइए, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें।
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