गुड़मा गांव में पत्थलगढ़ी पूजा पर सजेगी नागपुरी संस्कृति की शाम, 1 जून को होगा भव्य सांस्कृतिक आयोजन

गुड़मा गांव में पत्थलगढ़ी पूजा पर सजेगी नागपुरी संस्कृति की शाम, 1 जून को होगा भव्य सांस्कृतिक आयोजन

author Rohit Kumar Sahu
20 Views Download E-Paper (4)
#गुमला #पत्थलगढ़ी_महोत्सव : गुड़मा गांव में नागपुरी कलाकारों की प्रस्तुति से सजेगा सांस्कृतिक कार्यक्रम।

गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत गुड़मा गांव में पत्थलगढ़ी पूजा के अवसर पर 1 जून 2026 को भव्य नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रसिद्ध गायक, गायिकाएं और कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। आयोजन को लेकर गांव और आसपास के इलाकों में उत्साह का माहौल है। समिति ने इसे आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल बताया है।

Join WhatsApp
  • गुड़मा गांव में 1 जून की रात नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा।
  • कार्यक्रम का आयोजन पत्थलगढ़ी पूजा के अवसर पर किया जा रहा है।
  • प्रसिद्ध कलाकार सुहाना देवी, सरिता बड़ाईक, पंचम राम समेत कई कलाकार शामिल होंगे।
  • आयोजन समिति ने इसे आदिवासी संस्कृति संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
  • कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासनिक सहयोग भी रहेगा।
  • गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल है।

गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत कोलेंग पंचायत के गुड़मा ग्राम में आगामी 1 जून 2026 को पत्थलगढ़ी पूजा के अवसर पर भव्य नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम रात 8 बजे से शुरू होगा, जिसमें क्षेत्र के कई चर्चित नागपुरी कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। आयोजन को लेकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में अभी से उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। पत्थलगढ़ी पूजा के इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन समाज की पारंपरिक पहचान को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।

पत्थलगढ़ी आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान

पत्थलगढ़ी आदिवासी समाज की एक महत्वपूर्ण पारंपरिक व्यवस्था मानी जाती है। यह परंपरा जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा ग्राम सभा की एकता और अधिकारों का प्रतीक मानी जाती है।

इस परंपरा में गांव के सामाजिक नियम, परंपराएं और अधिकार पत्थरों पर अंकित कर स्थापित किए जाते हैं। इसे आदिवासी स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक भी माना जाता है।

गुड़मा गांव में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम इसी परंपरा को आगे बढ़ाने और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

नागपुरी कलाकारों की प्रस्तुति बनेगी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में क्षेत्र की प्रसिद्ध नागपुरी गायिकाएं सुहाना देवी, बिंदेश्वरी देवी और सरिता बड़ाईक अपनी प्रस्तुति देंगी। वहीं गायक पंचम राम और अनीश महिला अपने गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर करेंगे।

इसके अलावा डांसर सारिका नायक और तमन्ना कुमारी पारंपरिक और आधुनिक नागपुरी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम में लोक संस्कृति और पारंपरिक कला की झलक देखने को मिलेगी।

आयोजन समिति के सदस्यों ने कहा: “हमारा उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है, ताकि हमारी सांस्कृतिक पहचान मजबूत बनी रहे।”

गांव में उत्सव जैसा माहौल

पत्थलगढ़ी पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर गुड़मा गांव में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोजन स्थल को सजाने और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का काम लगातार जारी है।

गांव के युवा और समिति के सदस्य कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी तैयारी की गई है। आयोजन समिति ने बताया कि पुलिस प्रशासन की मदद से शांतिपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम संपन्न कराया जाएगा।

समिति के अनुसार आयोजन के दौरान पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि लोग अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकें।

आयोजन समिति निभा रही सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आयोजन समिति के सदस्य लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। समिति में अध्यक्ष किरण कुमार, उपाध्यक्ष बिगु लोहरा, कोषाध्यक्ष लक्षु लोहरा, सचिव महेश मांझी, उपसचिव नानकु सिंह तथा सह सचिव भूगल प्रधान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।

लोक संस्कृति संरक्षण की दिशा में पहल

नागपुरी संस्कृति और आदिवासी परंपराएं झारखंड की पहचान मानी जाती हैं। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है और ग्रामीण क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराएं जीवित रहती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में लोक संस्कृति को बचाए रखने के लिए इस प्रकार के सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

न्यूज़ देखो: संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का सामूहिक प्रयास

गुड़मा गांव का यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने की एक सकारात्मक पहल है। लोक कला और संस्कृति को मंच देने से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है और समाज में सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है। अब जरूरत ऐसे आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देने की है ताकि स्थानीय कला और परंपराएं आने वाले समय में भी जीवित रह सकें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी संस्कृति से जुड़ें, लोक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं

लोक संस्कृति किसी भी समाज की असली पहचान होती है।
जब गांव, समाज और युवा मिलकर अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं, तभी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है।
आइए, अपनी भाषा, कला और परंपराओं के संरक्षण में सहभागी बनें।
खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और स्थानीय कलाकारों के उत्साह को आगे बढ़ाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

पालकोट, गुमला

🗣️ Join the Conversation!

What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

🔔

Notification Preferences

error: