#केरसई #महाबीरमंदिर_वार्षिकोत्सव : नाम यज्ञ और कलश यात्रा का सर्वसम्मत निर्णय।
केरसई स्थित महाबीर मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव को इस वर्ष भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया गया है। मंदिर प्रांगण में आयोजित बैठक में नाम यज्ञ, कलश यात्रा, अखंड हरि कीर्तन और भंडारा के आयोजन का प्रस्ताव पारित हुआ। समिति ने 26 और 27 फरवरी 2026 को दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा तय की है। आयोजन को लेकर कमेटी गठन और तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
- 26 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजे से कलश यात्रा प्रारंभ।
- नाम यज्ञ, अधिवास पूजन और अखंड हरि कीर्तन का आयोजन।
- 27 फरवरी 2026 को हवन, पूर्णाहुति और नगर भ्रमण।
- समिति अध्यक्ष विकास कुमार ने तैयारियों की पुष्टि की।
- मुख्य यजमान दिलीप कुमार साहु, प्रधान आचार्य अजय कुमार झा।
- विस्तृत कमेटी गठन, अनेक सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
केरसई स्थित महाबीर मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव को लेकर मंदिर प्रांगण में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष वार्षिकोत्सव को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ भव्य रूप से मनाया जाएगा। दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत नाम यज्ञ, कलश यात्रा, अखंड हरि कीर्तन, भंडारा और नगर भ्रमण का आयोजन होगा। समिति ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा जारी करते हुए तैयारियों की शुरुआत कर दी है।
बैठक में सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव
मंदिर प्रांगण में आयोजित बैठक में श्रद्धालुओं एवं समिति सदस्यों ने वार्षिकोत्सव को विशेष रूप से मनाने का निर्णय लिया। उपस्थित सदस्यों ने बताया कि इस अवसर पर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना से विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
समिति अध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। मंदिर परिसर की साफ-सफाई, सजावट तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
विकास कुमार ने कहा: “वार्षिकोत्सव हमारे लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और क्षेत्रीय सद्भाव का अवसर है। हम सभी क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील करते हैं।”
दो दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा
26 फरवरी 2026 गुरुवार फाल्गुन शुक्ल दशमी
पहले दिन सुबह 7:00 बजे से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेंगी। इसके बाद अधिवास पूजन किया जाएगा और नाम हरि कीर्तन प्रारंभ होगा। दिनभर धार्मिक अनुष्ठान के साथ भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
27 फरवरी 2026 शुक्रवार फाल्गुन शुक्ल रंगभरी एकादशी
दूसरे दिन नाम हरि कीर्तन यज्ञ का समापन किया जाएगा। हवन और पूर्णाहुति के बाद नगर भ्रमण का आयोजन होगा। नगर भ्रमण के माध्यम से श्रद्धालु धार्मिक संदेश का प्रसार करेंगे और पुनः मंदिर परिसर में कार्यक्रम संपन्न होगा।
समिति का गठन और जिम्मेदारियां
कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत कमेटी का गठन किया गया है।
संरक्षक मंडल में प्रणव कुमार, गौतम कुमार, रवि गुप्ता, अजय, रोहित, मनोज प्रसाद, शशि प्रसाद, त्रिवेणी प्रसाद, बुलेश्वर प्रसाद, पी के झा को शामिल किया गया है।
मुख्य यजमान की जिम्मेदारी दिलीप कुमार साहु को सौंपी गई है, जबकि प्रधान आचार्य के रूप में अजय कुमार झा अनुष्ठान का संचालन करेंगे।
अध्यक्ष पद पर विकास कुमार रहेंगे। उपाध्यक्ष के रूप में पवन कुमार, अवधेश कुमार, अमित कुमार, अयोध्या प्रसाद, हिमांशु कुमार को जिम्मेदारी दी गई है।
सचिव पद पर आकाश कुमार तथा कोषाध्यक्ष के रूप में सूरज कुमार को नियुक्त किया गया है।
सदस्य के रूप में शिवराम प्रसाद, धीरज साहू, विक्रम कुमार, अनमोल प्रसाद, विक्की कुमार, मनोहर प्रसाद, अंकित कुमार, अमित कुमार, प्रिंस कुमार, विजय शंकर, विवेक कुमार, रोहित कुमार, नमन कुमार, संदीप कुमार, अभिषेक कुमार, सुभाष प्रसाद को शामिल किया गया है।
समिति के सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि कार्यक्रम सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
तैयारियां जोरों पर
मंदिर परिसर में साफ-सफाई और सजावट का कार्य प्रारंभ हो चुका है। श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल और प्रसाद वितरण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। समिति ने क्षेत्रवासियों से आयोजन में सक्रिय सहयोग की अपील की है।
आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। विशेषकर महिलाओं की कलश यात्रा में भागीदारी को लेकर व्यापक तैयारी की जा रही है।
न्यूज़ देखो: आस्था के साथ संगठनात्मक एकजुटता का उदाहरण
केरसई महाबीर मंदिर का यह वार्षिकोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक एकता का प्रतीक बनकर उभर रहा है। विस्तृत कमेटी गठन और स्पष्ट जिम्मेदारियों का निर्धारण दर्शाता है कि आयोजन को व्यवस्थित रूप से सफल बनाने का प्रयास हो रहा है। स्थानीय स्तर पर इस तरह की पहल सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती है। अब देखना होगा कि दो दिवसीय कार्यक्रम में कितनी व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित हो पाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था का पर्व, एकता का संकल्प
धार्मिक आयोजन तभी सफल होते हैं जब समाज मिलकर जिम्मेदारी निभाए। वार्षिकोत्सव जैसे अवसर हमें परंपरा, संस्कृति और सामूहिक सहयोग का महत्व याद दिलाते हैं।
आइए, इस आयोजन को केवल दर्शक बनकर नहीं, बल्कि सहभागी बनकर सफल करें। स्वच्छता, अनुशासन और सहयोग के साथ कार्यक्रम को यादगार बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।