#बानो #अनुमंडल_मांग : बानो को अनुमंडल दर्जा देने पर ग्रामीणों ने रखी मजबूती से बात।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में ‘बानो को अनुमंडल बनाओ मंच’ की आवश्यक बैठक सोय पंचायत भवन में आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीणों और पदाधिकारियों ने बानो को अनुमंडल बनाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। वक्ताओं ने कहा कि जिला मुख्यालय दूर होने से आम लोगों को प्रशासनिक कार्यों में कठिनाई होती है। बैठक में कई पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- सोय पंचायत भवन में ‘बानो को अनुमंडल बनाओ मंच’ की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
- ग्रामीणों ने बानो को अनुमंडल बनाने की मांग को मजबूती से उठाया।
- जिला मुख्यालय लगभग 100 किलोमीटर दूर होने से लोगों को परेशानी का मुद्दा उठा।
- अनुमंडल बनने से रोजगार बढ़ने और पलायन कम होने की बात कही गई।
- बीरजो कंडुलना, आनंद मसीह तोपनो, तनवीर हुसैन सहित कई लोग रहे मौजूद।
- 21 और 22 मई को अगली पंचायत बैठकों की घोषणा की गई।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में प्रशासनिक सुविधा और विकास को लेकर एक बार फिर अनुमंडल दर्जे की मांग तेज हो गई है। ‘बानो को अनुमंडल बनाओ मंच’ की आवश्यक बैठक सोय पंचायत भवन के सभागार में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रशासनिक सुविधा को लेकर उठी मांग
बैठक में मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि बानो प्रखंड के कई गांव जिला मुख्यालय से काफी दूर हैं, जिसके कारण आम लोगों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई मामलों में समय और संसाधन दोनों की बर्बादी होती है।
वक्ताओं ने बताया कि बानो प्रखंड के बांकी, रायकेरा, साहुबेडा, जमतई, बेडाइरगी, गेनमेर सहित कई पंचायत जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर हैं। इस दूरी के कारण लोगों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
अनुमंडल बनने से संभावित लाभ
बैठक में यह भी कहा गया कि यदि बानो को अनुमंडल का दर्जा मिलता है तो न केवल बानो प्रखंड बल्कि सीमावर्ती प्रखंड जलडेगा और कोलेबिरा के कुछ पंचायतों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासनिक केंद्र पास होने से लोगों को राहत मिलेगी और सरकारी कार्य तेजी से पूरे होंगे। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं, जिससे युवाओं को बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
मंच के पदाधिकारियों ने कहा: “अनुमंडल बनने से क्षेत्र का विकास तेज होगा और जनता को प्रशासनिक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी।”
मंच के पदाधिकारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति
इस बैठक में मंच के अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य बीरजो कंडुलना, आनंद मसीह तोपनो, तनवीर हुसैन, मुखिया सोमारी कैथवार, शंकर सिंह मरसलन लुगुन, नामलेन जड़िया सहित बड़ी संख्या में पंचायत के ग्रामीण उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में बानो को अनुमंडल बनाने की मांग का समर्थन किया और इसके लिए आगे भी जनजागरण अभियान चलाने पर सहमति जताई।
आगे की रणनीति तय
बैठक के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि ‘बानो को अनुमंडल बनाओ मंच’ की अगली बैठक 21 मई को उकौली पंचायत और 22 मई को कोनसौदे पंचायत में आयोजित की जाएगी।
इन बैठकों का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस आंदोलन से जोड़ना और प्रशासन तक मांग को मजबूत तरीके से पहुंचाना है।
न्यूज़ देखो: स्थानीय मांगों और विकास की जमीनी आवाज
बानो को अनुमंडल बनाने की यह मांग केवल प्रशासनिक सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और जनभागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी है। दूरस्थ गांवों की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, और ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक इकाई का विस्तार एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है। अब देखना होगा कि यह मांग सरकार और प्रशासनिक स्तर पर कितनी गंभीरता से ली जाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
गांव की आवाज को मजबूत बनाएं
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए जरूरी है कि स्थानीय समस्याएं समय पर सामने आएं और उनका समाधान हो। जनता की भागीदारी और एकजुटता से ही बड़े बदलाव संभव हैं। बानो जैसी मांगें क्षेत्रीय विकास की दिशा तय करती हैं।
आप भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाएं और जिम्मेदार नागरिक बनें। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और विकास की इस आवाज को आगे बढ़ाएं।

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