#गिरिडीह #ग्रामीण_विकास : प्रेमटांड़ गांव में पीसीसी सड़क और विद्यालय चारदीवारी निर्माण की मांग उठी।
डुमरी विधानसभा क्षेत्र के प्रेमटांड़ (लक्ष्मण टुंडा) गांव में ग्रामीणों ने आधारभूत सुविधाओं की कमी को लेकर विधायक जयराम महतो से हस्तक्षेप की मांग की है। झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन और विद्यालय समिति की ओर से विद्यालय की चारदीवारी तथा बरमसिया स्कूल से गांव तक पीसीसी सड़क निर्माण के लिए आवेदन सौंपा गया। ग्रामीणों ने बरसात में आवागमन और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताया। ग्रामीणों का कहना है कि इन सुविधाओं के निर्माण से शिक्षा और आवागमन दोनों में सुधार आएगा।
- प्रेमटांड़ (लक्ष्मण टुंडा) गांव के ग्रामीणों ने विधायक को सौंपा आवेदन।
- पीसीसी सड़क और विद्यालय चारदीवारी निर्माण की उठाई गई मांग।
- बरसात में करीब एक किलोमीटर कच्ची सड़क कीचड़ में बदल जाती है।
- विद्यालय समिति ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता।
- आवेदन सौंपने के दौरान गंगाधर महतो, कुदुस अंसारी और रविंद्र कुमार मौजूद रहे।
- ग्रामीणों ने जल्द सकारात्मक पहल कर निर्माण कार्य शुरू कराने की अपील की।
डुमरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रेमटांड़ (लक्ष्मण टुंडा) गांव में ग्रामीणों ने सड़क और विद्यालय सुरक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों से मदद की मांग की है। झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो और उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय प्रेमटांड़ (लक्ष्मण टुंडा) विद्यालय समिति अध्यक्ष कुदुस अंसारी ने डुमरी विधायक जयराम महतो को आवेदन सौंपकर गांव में पीसीसी सड़क और विद्यालय की चारदीवारी निर्माण कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से इन समस्याओं के कारण गांव के लोग परेशान हैं और बरसात के दिनों में हालात और गंभीर हो जाते हैं।
बरसात में कीचड़ से जूझते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने विधायक को जानकारी देते हुए बताया कि प्रेमटांड़ गांव में लगभग 100 से 150 परिवार निवास करते हैं। गांव तक पहुंचने वाली सड़क आज भी कच्ची है। बरमसिया स्कूल से प्रेमटांड़ लक्ष्मण टुंडा तक लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क बरसात में पूरी तरह कीचड़मय हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब रहने के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी होती है। कई बार छोटे बच्चे फिसलकर घायल भी हो जाते हैं। वहीं शिक्षकों और ग्रामीणों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने कहा: “बरसात के दिनों में सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।”
ग्रामीणों ने बताया कि खराब सड़क के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी काफी समय लगता है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में परेशानी और बढ़ जाती है।
विद्यालय की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
आवेदन पत्र में उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय प्रेमटांड़ (लक्ष्मण टुंडा) की चारदीवारी निर्माण की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। विद्यालय समिति और ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल परिसर में चारदीवारी नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा प्रभावित होती है।
विद्यालय समिति अध्यक्ष कुदुस अंसारी ने कहा कि विद्यालय परिसर खुला रहने के कारण बाहरी लोगों और मवेशियों का प्रवेश बना रहता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं।
कुदुस अंसारी ने कहा: “विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चारदीवारी निर्माण बेहद जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय परिसर सुरक्षित होगा तो बच्चों का शैक्षणिक वातावरण भी बेहतर बनेगा और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
विधायक से जल्द पहल करने की मांग
आवेदन सौंपने के दौरान झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन के केंद्रीय महासचिव रविंद्र कुमार सहित कई ग्रामीण और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने विधायक जयराम महतो से जल्द पहल कर सड़क और चारदीवारी निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव में पीसीसी सड़क का निर्माण हो जाता है तो आवागमन की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। साथ ही विद्यालय की चारदीवारी बनने से बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
रविंद्र कुमार ने कहा: “ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं मजबूत करना सबसे जरूरी है।”
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि विधायक और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जल्द कार्रवाई करेंगे।
ग्रामीण विकास से जुड़ा अहम मुद्दा
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की कमी आज भी विकास की बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर स्कूल तक पहुंचने वाले रास्तों की खराब स्थिति का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गांवों में बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए तो ग्रामीण जीवन स्तर में तेजी से सुधार संभव है। प्रेमटांड़ गांव में सड़क और विद्यालय सुरक्षा की मांग भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लंबित इन समस्याओं का समाधान होने पर गांव के बच्चों का भविष्य बेहतर होगा और लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिलेगी।
न्यूज़ देखो: गांवों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करना गंभीर चिंता
प्रेमटांड़ गांव की यह मांग केवल सड़क और चारदीवारी निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को भी सामने लाती है। जब बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कीचड़ और असुरक्षित रास्तों से गुजरना पड़े, तो यह विकास योजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता देकर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हो सके। शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मामलों में देरी भविष्य की पीढ़ियों को प्रभावित कर सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
गांव की आवाज मजबूत बने, विकास की राह आगे बढ़े
ग्रामीण विकास केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं बल्कि जमीन पर काम होने से दिखाई देता है। सड़क, शिक्षा और सुरक्षा जैसी सुविधाएं हर गांव का अधिकार हैं। जब ग्रामीण संगठित होकर अपनी समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाते हैं, तब बदलाव की संभावना और मजबूत होती है।
जरूरत है कि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसे गांवों की समस्याओं का समाधान करें जहां आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्याएं हैं तो उन्हें सामने लाना जरूरी है।
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